ब्रजरज उत्सव में महारास, मयूर रास और भजन क्लबिंग की धूम, गीतांजलि शर्मा के कथक और मानसी सिंह के भजनों ने बांधा समां

मथुरा। ब्रजरज उत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या रविवार को ब्रज की भक्ति, शास्त्रीय नृत्य और आधुनिक संगीत के अनूठे संगम से सराबोर रही। प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गीतांजलि शर्मा ने महारास, मयूर रास और बरसाने की पारंपरिक होली की प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं भजन गायिका मानसी सिंह के मधुर भजनों और मधुरम डिवोशनल बैंड की भजन क्लबिंग ने भक्ति संगीत का नया रंग बिखेरा। देर रात तक चले कार्यक्रम में दर्शक ब्रज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के रंगों में डूबे रहे।

Nov 1, 2026 - 22:24
 0
ब्रजरज उत्सव में महारास, मयूर रास और भजन क्लबिंग की धूम, गीतांजलि शर्मा के कथक और मानसी सिंह के भजनों ने बांधा समां
ब्रजरज उत्सव में रविवार की सायं हुए महारास की एक झलक। 

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 11 दिवसीय ब्रजरज उत्सव अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है। उत्सव में स्थानीय लोगों के साथ ब्रज दर्शन के लिए आए पर्यटकों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ लोगों ने खानपान और मनोरंजन का आनंद लिया। एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी), हस्तशिल्प, खादी सहित विभिन्न स्टॉलों पर जमकर खरीदारी हुई। दोपहर से शुरू होने वाली उत्सव की रौनक देर रात तक बनी रही।

रविवार की सांस्कृतिक संध्या में मधुरम डिवोशनल बैंड की भजन क्लबिंग विशेष आकर्षण रही। बैंड के कलाकारों ने पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत और वाद्ययंत्रों के साथ नए अंदाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। ड्रम, बास और लीड गिटार के साथ कीबोर्ड, बांसुरी, तबला और ढोलक की संगत ने भजनों में नई लय और ऊर्जा भर दी।

अरमान और पूजा ने गणेश वंदना से प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके बाद 'शिव कैलाशों के वासी', 'किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए', 'राधे अलबेली सरकार', 'मेरे कान्हा ने बंसी बजाई' और 'राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी' जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। भजनों की धुन पर दर्शक भी झूमते और तालियां बजाते नजर आए।

वहीं, प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गीतांजलि शर्मा ने अपने समूह के साथ राधा-कृष्ण की लीलाओं पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां दीं। राधा-कृष्ण वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कथक की भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध पद संचालन ने दर्शकों को ब्रज की भक्ति परंपरा से जोड़ दिया। उनके समूह ने मयूर रास के माध्यम से राधा-कृष्ण के प्रेम को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

'कलावृक्ष कथक केंद्र' के कलाकारों ने कृष्ण जन्म से लेकर गोवर्धन लीला तक के प्रसंगों को नृत्य नाटिका के माध्यम से मंच पर उतारा। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भव्य महारास रहा। इसके बाद बरसाने की विश्वप्रसिद्ध लठामार होली और फूलों की होली का मनोहारी मंचन किया गया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।

सांस्कृतिक संध्या में भजन गायिका मानसी सिंह ने भी अपनी मधुर आवाज से भक्तिमय वातावरण बना दिया। उन्होंने 'मेरे आपकी कृपा से सब काम हो रहा है', 'कैसे न इतराऊं मैं, बरसाना मिला है' और 'तुम उठो सिया, शृंगार करो' जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भक्तिरस से सराबोर किया।

ब्रजरज उत्सव की यह सांस्कृतिक संध्या ब्रज की पारंपरिक रासलीला, कथक, लोक संस्कृति और आधुनिक भक्ति संगीत के संगम के रूप में यादगार रही।

SP_Singh AURGURU Editor