सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, एक महीने में दोनों धातुएं हुईं काफी सस्ती
नई दिल्ली। फेस्टिव सीजन में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और ऊंचे भाव पर बड़े निवेशकों की बिकवाली के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम तेजी से नीचे आए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 9,134 रुपये घटकर 1.81 लाख रुपये रह गई है। गुरुवार को इसका भाव 1.90 लाख रुपये था। इसी तरह 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,201 रुपये सस्ता होकर 1.41 लाख रुपये पर आ गया है।
एक महीने में चांदी 39 हजार और सोना 8 हजार रुपये सस्ता
अक्टूबर में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इस महीने अब तक चांदी 39,485 रुपये और सोना 8,084 रुपये सस्ता हो चुका है। एक अक्टूबर 2026 को एक किलो चांदी का भाव 2.20 लाख रुपये और 10 ग्राम सोने की कीमत 1.48 लाख रुपये थी। अब दोनों धातुओं के दाम में आई गिरावट से त्योहारों पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
सोने की कीमत गिरने की तीन प्रमुख वजहें
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार के कई कारक हैं।
ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली: त्योहारों से पहले सोने की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। ऊंचे भाव का लाभ उठाने के लिए बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार में सोने की बिकवाली बढ़ गई।
मजबूत डॉलर का असर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड की मजबूती से सोने की मांग प्रभावित हुई। इससे वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना और घरेलू बाजार में भी भाव नीचे आए।
खरीदारों की कम दिलचस्पी: रिकॉर्ड ऊंचे दाम देखकर आम खरीदारों ने भी खरीदारी से कुछ दूरी बना ली। दुकानों पर मांग कम होने से बाजार में कीमतों को सहारा नहीं मिल पाया।
चांदी सस्ती होने के पीछे ये तीन कारण
औद्योगिक मांग में कमी: चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में होता है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण उद्योगों की मांग प्रभावित होने से चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा है।
बिकवाली का दबाव: शेयर और वायदा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच बड़े ट्रेडर्स ने चांदी की बिकवाली की। इससे बाजार में बिक्री का दबाव बढ़ा और कीमतों में तेज गिरावट आई।
सोने की कीमतों में गिरावट: सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अक्सर एक-दूसरे का असर दिखाई देता है। सोने के भाव नीचे आने के साथ चांदी में भी बिकवाली बढ़ी और इसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट?
कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच सोने-चांदी की खरीदारी एकमुश्त करने के बजाय किस्तों में करना बेहतर हो सकता है। खरीदार कुछ मात्रा अभी खरीद सकते हैं और शेष खरीदारी 15 से 20 दिन के अंतराल पर कर सकते हैं। निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को एक-दो महीने के बजाय छह महीने से एक साल तक की अवधि को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आए भाव
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में असाधारण तेजी के बाद लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी का भाव 2.30 लाख रुपये था, जो 29 जनवरी 2026 को बढ़कर 3.86 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। मौजूदा 1.81 लाख रुपये के भाव के मुकाबले यह करीब 2.05 लाख रुपये की गिरावट है।
इसी तरह 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत 1.33 लाख रुपये थी। 29 जनवरी 2026 को यह बढ़कर 1.76 लाख रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। मौजूदा 1.41 लाख रुपये के भाव के हिसाब से सोना अपने उस रिकॉर्ड स्तर से करीब 35 हजार रुपये सस्ता हो चुका है। कीमतों में आई इस गिरावट ने त्योहारों के दौरान सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को राहत का अवसर दिया है।