नौकरी की परीक्षा देने निकले युवा सफर की मुश्किलों में उलझे, 300 से 500 किलोमीटर दूर केंद्र आवंटित करने पर उठे सवाल, बरेली में तमाम ने स्टेशन पर गुजारी रात

-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) देने पहुंचे हजारों अभ्यर्थियों को दूरदराज के परीक्षा केंद्रों और अव्यवस्थित यात्रा के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई परीक्षार्थियों को 300 से 500 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ा। ट्रेनों में भारी भीड़, ठहरने की महंगी व्यवस्था और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चिंता के बीच अनेक अभ्यर्थियों को बरेली जंक्शन के फर्श पर रात गुजारनी पड़ी। युवाओं ने परीक्षा केंद्रों के आवंटन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि केंद्र गृह जनपद या आसपास के जिलों में ही बनाए जाएं।

Oct 30, 2026 - 21:43
 0
नौकरी की परीक्षा देने निकले युवा सफर की मुश्किलों में उलझे, 300 से 500 किलोमीटर दूर केंद्र आवंटित करने पर उठे सवाल, बरेली में तमाम ने स्टेशन पर गुजारी रात
बरेली जंक्शन स्टेशन पर परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए स्टेशन का दौरा करते रेलवे के अधिकारी।

जिला प्रशासन ने परीक्षा को नकलविहीन और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन दूरदराज के केंद्रों तक पहुंचने की चुनौती ने अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। प्रतियोगी परीक्षाओं में लंबी दूरी पर केंद्र आवंटित किए जाने को लेकर युवाओं का आक्रोश भी सामने आया। उनका कहना है कि नौकरी पाने की कोशिश में उन्हें परीक्षा से पहले ही आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है।

बाराबंकी निवासी एमबीए के छात्र सुनील पाराशरी ने सरकार और भर्ती बोर्डों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के समय सरकार हर मतदाता के घर के पास मतदान केंद्र बना देती है, लेकिन नौकरी की परीक्षा देने के लिए युवाओं को 400 से 500 किलोमीटर दूर भेज दिया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखकर केंद्र क्यों नहीं बनाए जा सकते।

आजमगढ़ निवासी आशीष ने बताया कि रेलवे जूनियर इंजीनियर (जेई) की परीक्षा में उनका केंद्र आगरा में लगभग 500 किलोमीटर दूर आवंटित हुआ था। दूरी और यात्रा की कठिनाइयों के कारण वह समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके और परीक्षा देने से वंचित रह गए।

गोरखपुर के निखिल प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार को युवाओं की सहनशक्ति की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्हें इस तरह परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं का गुस्सा पहले भी नेपाल और दिल्ली जैसे स्थानों पर देखने को मिल चुका है। इसलिए परीक्षा केंद्र आवंटन की व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाना चाहिए।

बरेली जंक्शन के प्लेटफार्म पर जमीन पर लेटी हरदोई की पुष्पा राजे ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्र अभ्यर्थियों के गृह जिले या सीमावर्ती जिलों में ही आवंटित किए जाने चाहिए। लंबी दूरी की यात्रा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को इस व्यावहारिक समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।

सुल्तानपुर निवासी अनुपम शुक्ला ने बताया कि वह करीब 450 किलोमीटर का सफर तय करके बरेली पहुंचे हैं। इतनी लंबी और थकाने वाली यात्रा का असर पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर भी पड़ता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से पहले ही यात्रा की थकान उनकी एकाग्रता प्रभावित कर देती है।

दिल्ली निवासी मधू शिवहरे ने बताया कि नर्सिंग का कोर्स करने के बावजूद बेरोजगारी के कारण उन्हें पीईटी परीक्षा देनी पड़ रही है। उनका परीक्षा केंद्र बदायूं में आया है। ट्रेन में भारी भीड़ और धक्के खाने के बाद वह बरेली पहुंचीं। बदायूं जाने के लिए उन्हें रात बरेली स्टेशन के ठंडे फर्श पर गुजारनी पड़ी। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि अब सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है।

रायबरेली निवासी मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र प्रदीप कुमार ने भी लंबी दूरी पर परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने की समस्या बताई। उन्होंने कहा कि इससे पहले रेलवे जेई परीक्षा का केंद्र भी उनका आगरा में करीब 500 किलोमीटर दूर आया था। अत्यधिक दूरी और यात्रा की कठिनाइयों के कारण वह उस परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। उनका कहना है कि युवाओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।

अयोध्या निवासी मनोज कुमार ने ट्रेनों में भीड़ की समस्या बताते हुए कहा कि यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती। जनरल टिकट लेकर सफर करने वाले अभ्यर्थियों को मजबूरी में स्लीपर और एसी कोचों में भीड़ के बीच यात्रा करनी पड़ती है। आने-जाने में काफी पैसा खर्च हो जाता है। ऐसे में होटल या लॉज में ठहरना गरीब और मध्यमवर्गीय परीक्षार्थियों के लिए संभव नहीं होता। इसी कारण अनेक अभ्यर्थियों को बरेली जंक्शन के फर्श पर रात बितानी पड़ी।

रेलवे ने किए विशेष ट्रेनों और व्यवस्थाओं के दावे

दूसरी ओर रेलवे ने परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाने की जानकारी दी है। मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक प्रेम शंकर झा और वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव के निर्देश पर एसीएम अंकित शर्मा तथा बरेली के सीआई सैय्यद इमरान की देखरेख में विभागीय टीमों ने काम किया। आरपीएफ और जीआरपी की टीमों को भी व्यवस्था में लगाया गया।

रेलवे के अनुसार, पीईटी 2026 के परीक्षार्थियों के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया। भीड़ प्रबंधन के लिए लगातार निगरानी रखी गई और हजारों यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। इसके साथ ही खानपान, पेयजल, उद्घोषणा, हेल्प डेस्क और अतिरिक्त टिकट काउंटरों की व्यवस्था भी की गई।

हालांकि परीक्षार्थियों का कहना है कि विशेष ट्रेनों और व्यवस्थाओं के दावों के बावजूद उन्हें भीड़ और ठहरने की समस्या से जूझना पड़ा। उनका सवाल है कि जब भर्ती परीक्षाओं में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दूसरे जिलों में भेजे जाते हैं, तो परीक्षा केंद्रों का आवंटन करते समय उनकी यात्रा, आर्थिक स्थिति और सुरक्षा का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता।

SP_Singh AURGURU Editor