करवा चौथ पर ब्रजरज उत्सव में लखबीर सिंह लक्खा की आवाज का जादू, भजनों पर जमकर झूमे श्रद्धालु
मथुरा। करवा चौथ के पर्व पर ब्रजरज उत्सव में प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा की दमदार आवाज और जोशीले अंदाज ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता भक्ति के रंग में सराबोर होकर झूम उठे। ‘प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी’ से लेकर ‘श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में’ तक लोकप्रिय भजनों की गूंज के बीच उत्सव स्थल तालियों और जयकारों से गूंजता रहा।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित ब्रजरज उत्सव में बृहस्पतिवार को करवा चौथ के बावजूद भक्ति संगीत का उत्साह देखते ही बना। देर शाम शुरू हुई लखबीर सिंह लक्खा की प्रस्तुति में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों ने उनके लोकप्रिय भजनों का आनंद लिया। उनकी गायकी के साथ श्रोता सुर मिलाते, तालियां बजाते और झूमते नजर आए।
माता रानी के भजनों के लिए विशेष पहचान रखने वाले लखबीर सिंह लक्खा ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत मां के भजनों से की। ‘सर को झुका लो शेरों वाली को मना लो’, ‘मुझे रंग दे ओ’ और ‘प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी’ जैसे भजनों ने भक्तिरस का माहौल बना दिया। इसके बाद ‘कीजो केसरी के लाल, मेरा छोटा-सा काम’ की प्रस्तुति ने भी श्रोताओं को खूब आकर्षित किया।
कार्यक्रम में भक्ति के विविध रंग देखने को मिले। मां भवानी के भजनों के साथ हनुमानजी, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की भक्ति से जुड़े गीतों ने भी श्रोताओं को भावविभोर किया। ‘श्याम के बिना तुम आधे, तुम्हारे बिना श्याम आधे’ और ‘श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में’ जैसे लोकप्रिय भजनों पर उत्सव स्थल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
लखबीर सिंह लक्खा की आवाज के उतार-चढ़ाव, प्रभावशाली गायकी और जोशीले अंदाज ने प्रस्तुति को खास बना दिया। श्रोता भजनों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते नजर आए। करवा चौथ के त्योहार की व्यस्तताओं के बीच भी भक्ति संगीत के प्रति लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। उनकी प्रस्तुति ने ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक शाम को भक्तिमय बना दिया।
इससे पूर्व कार्यक्रम में निखिल शर्मा ने भजन और सूफी गायन प्रस्तुत किया। कामोद शर्मा ने ध्रुपद गायन से श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा से परिचित कराया, जबकि राजिता मिश्रा की टीम ने लोक गायन के माध्यम से ब्रज की सांस्कृतिक रंगत बिखेरी।
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नाटक का मंचन भी किया गया। इसके माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और लीलास्थली ब्रज में स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया गया। संगीत, लोककला और सामाजिक जागरूकता से सजे कार्यक्रम ने ब्रजरज उत्सव को सांस्कृतिक विविधता और भक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया।