चुनाव आयोग का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल, कहा- एसआईआर के सभी फैसले सर्वसम्मति से, फॉर्म-6 में बदलाव नहीं
सीईसी और एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों की याचिका पर अब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उन्होंने एसआईआर से जुड़े फैसलों और अन्य मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया है।
नई दिल्ली। सीईसी के कामकाज के खिलाफ याचिका पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब किया। आयोग ने कहा है कि याचिका पूरी तरह एक न्यूज रिपोर्ट पर आधारित है। आयोग ने सीईसी को पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग का भी विरोध किया है।
चुनाव आयोग के हलफनामे में को लेकर बताया गया है कि इसे तीनों सदस्यों की सहमति से दाखिल किया गया है। एसआईआर के सभी आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। फाइल पर सीईसी या चुनाव आयुक्तों की ओर से की गई टिप्पणी या सुझाव को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
आगे बताया गया कि कोई फाइल फाइल एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और उसके बाद सीईसी के पास जाती है। जल्दबाजी वाले मामलों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मंजूरी ली जाती है और बाद में उसे फाइल पर दर्ज किया जाता है। अगर चुनाव आयोग का कोई अधिकारी अपने निर्धारित अधिकारों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आगे कहा गया है कि काम के बंटवारे से जुड़ा 28 जुलाई का आदेश डेप्यूटेशन पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ। फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। इसमें बदलाव करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है। एसआईआर के लिए मतदाताओं से लिया जाने वाला घोषणा पत्र अलग दस्तावेज है।
हल्फनामें कहा गया है कि ऑनलाइन उपलब्ध फॉर्म को देख कर लग सकता है कि फॉर्म-6 को कुछ बदलाव किया गया है। इसलिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन को भी कागजी फॉर्म की तरह फॉर्म-6 और घोषणा पत्र में अलग-अलग किया गया है। जिन मतदाताओं के नाम पुराने रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। सुनवाई सिर्फ विशेष परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन होगी।
बताया गया कि ईआरओ के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम न जोड़ा जाता है और न हटाया जाता है। नियमों के पालन की जांच के लिए आईआईटी के विशेषज्ञों वाली समिति बनाई गई है। किसी भी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी. यह संक्षिप्त जवाब है। विस्तृत जवाब देने के लिए समय दिया जाए।