ब्रज की 65 सीटों में से सपा के कब्जे वाली सीटों पर भाजपा की विशेष नजर, बूथ प्रबंधन से विधायकों के रिपोर्ट कार्ड तक पर नजर
आगरा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने ब्रज क्षेत्र की 65 विधानसभा सीटों पर संगठन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र की 65 में से 53 सीटें जीती थीं, जबकि सपा और अन्य विपक्षी दलों ने बाकी सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा ने अब प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विस्तारक तैनात कर बूथ अध्यक्षों और पन्ना प्रमुखों को सक्रिय करने, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने तथा संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
पार्टी की विशेष नजर फिरोजाबाद जिले पर है, जहां पिछले चुनाव में उसे पांच में से केवल दो सीटें फिरोजाबाद और टूंडला पर जीत मिली थी। जिले की जसराना, शिकोहाबाद और सिरसागंज सीट पर सपा को जीत हासिल हुई थी। इसी प्रकार मैनपुरी की करहल और किशनी तथा कासगंज की पटियाली जैसी सीटों पर भी भाजपा की है, जहां पिछले चुनाव में सपा ने जीत दर्ज की थी। बरेली और बदायूं में भी सपा की जीती सीटें क्षेत्रीय चुनावी समीकरणों का हिस्सा हैं।
हर विधानसभा में विस्तारक, बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की तैयारी
भाजपा ने ब्रज क्षेत्र की सभी 65 विधानसभा सीटों पर विस्तारक तैनात किए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी बूथ अध्यक्षों और पन्ना प्रमुखों के साथ नियमित बैठकें करने, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने और संगठन के भीतर समन्वय बढ़ाने की है। विस्तारक स्थानीय समस्याओं और कार्यकर्ताओं की शिकायतों की जानकारी भी नेतृत्व तक पहुंचाएंगे। पार्टी का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बदले राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए विधानसभा चुनाव की तैयारी समय रहते शुरू करना जरूरी है।
2022 में इन सीटों पर सपा ने दर्ज की थी जीत
ब्रज क्षेत्र में भाजपा की चुनावी समीक्षा के लिहाज से 2022 के परिणाम महत्वपूर्ण हैं। फिरोजाबाद जिले की जसराना, शिकोहाबाद और सिरसागंज सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। मैनपुरी जिले की करहल और किशनी तथा कासगंज की पटियाली सीट भी सपा के खाते में गई थी। हाथरस की सादाबाद सीट पर उस समय सपा गठबंधन के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल ने जीत हासिल की थी। इन सीटों पर 2027 में प्रत्याशी चयन, स्थानीय संगठन की स्थिति और विपक्षी दलों के समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
ब्रज क्षेत्र के संगठनात्मक दायरे में बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर भी शामिल हैं। वर्ष 2022 में बरेली की बहेड़ी और भोजीपुरा तथा बदायूं की बिसौली, सहसवान और शेखूपुर सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। इन जिलों में भाजपा की चुनावी तैयारियों का आकलन करते समय इन सीटों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
विधायकों के प्रदर्शन और संगठनात्मक नाराजगी की समीक्षा
भाजपा की रणनीति केवल विपक्ष के कब्जे वाली सीटें वापस लेने तक सीमित नहीं है। पार्टी को अपनी जीती हुई सीटों पर भी जनप्रतिनिधियों की स्थिति, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और स्थानीय गुटबाजी का आकलन करना है। भाजपा मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और संभावित प्रत्याशियों की स्थिति का आकलन कर रही है।
मथुरा की बैठक में हो चुका है चुनावी रणनीति पर मंथन
3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की बैठक में संगठनात्मक समन्वय और 2027 की तैयारियों पर चर्चा हो चुकी है। ब्रज क्षेत्र में पार्टी की लोकसभा सीटों की संख्या 2019 के 12 से घटकर 2024 में आठ रह गई थी। विधानसभा चुनाव 2022 में भी भाजपा की सीटें 2017 की 57 से घटकर 53 रह गई थीं। इन परिणामों के बाद ब्रज क्षेत्र में संगठन को मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है।
चुनौती: विपक्षी सीटों पर वापसी और अपनी जीत कायम रखना
भाजपा के सामने ब्रज क्षेत्र में दोहरी चुनौती है। उसे सपा के कब्जे वाली सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करनी है और साथ ही उन विधानसभा क्षेत्रों में भी संगठनात्मक असंतोष दूर करना है जहां उसके विधायक हैं। विस्तारकों के जरिए बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं से संवाद और स्थानीय फीडबैक जुटाने की पहल इसी दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, 2027 में चुनावी नतीजे प्रत्याशी चयन, स्थानीय मुद्दों, गठबंधन और मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर भी निर्भर करेंगे।