ब्रजरज उत्सवः हिमाचल की शॉल-टोपी, त्रिपुरा के बांस के लैंप और कश्मीरी परिधानों की खूब मांग, राजस्थानी 56 तरह के अचार और केरल के व्यंजन भी बने आकर्षण
मथुरा। धौली प्याऊ रेलवे मैदान में सजे ब्रजरज उत्सव के बाजार में देशभर की लोककला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की धूम है। हिमाचल की गर्म शॉल और टोपियों से लेकर त्रिपुरा के बांस के लैंप, कश्मीर के परिधानों, सहारनपुर के एंटीक फर्नीचर और राजस्थान के 56 प्रकार के अचार तक की विविधता लोगों को आकर्षित कर रही है। देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों से आए कारीगरों और कारोबारियों ने यहां अपनी दुकानें सजाई हैं। एक ही परिसर में विभिन्न क्षेत्रों की कला, संस्कृति, खानपान और पारंपरिक जीवनशैली की झलक देखने को मिल रही है।
बाजार में हिमाचल प्रदेश के हैंडलूम से बने शॉल, स्टोल और टोपियां लोगों की पसंद बने हुए हैं। त्रिपुरा के बांस से तैयार लाइट लैंप, होम डेकोरेशन के सामान और आभूषण भी खूब आकर्षित कर रहे हैं। पंजाब की महिलाओं की जूतियां, कश्मीर के शॉल, सूट और साड़ियां तथा कोलकाता की कॉटन साड़ियों की मांग है। राजस्थान की पारंपरिक जूतियां और गुजरात के हैंडलूम उत्पाद भी बाजार की रौनक बढ़ा रहे हैं। प्रयागराज की खादी जैकेट, अलीगढ़ की महिलाओं की कुर्तियां और अमेठी के चमड़े से बने सजावटी उत्पाद भी खरीदारों का ध्यान खींच रहे हैं।
हस्तशिल्प की विविधता बाजार का खास आकर्षण है। मैनपुरी की लकड़ी पर तारकशी की कला को लेकर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित राजकुमार की कारीगरी लोगों को पसंद आ रही है। भदोही के कालीन अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। कर्नाटक के मैसूर की लकड़ी से बनी त्रिआयामी तस्वीरें भी लोगों को भा रही हैं।
सहारनपुर का एंटीक फर्नीचर खास चर्चा में है। यहां राजवाड़ा सोफा, राजमहल के कोनों और साइड में सजावट के लिए तैयार फर्नीचर तथा झूले प्रदर्शित किए गए हैं। हिमाचल के पारंपरिक काठ-कुनी शैली के पुराने घरों की बनावट से प्रेरित नमूने भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
खानपान और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की भी बाजार में खूब रौनक है। मुजफ्फरनगर के विभिन्न किस्मों के गुड़, राजस्थान के 56 प्रकार के अचार तथा केरल का ड्राई फ्रूट हलवा, नमकीन और अन्य खाद्य उत्पाद लोगों को लुभा रहे हैं। गाजीपुर से आए जूट के एंटीक सजावटी उत्पादों के साथ महिलाओं के उपयोग की वस्तुएं और रसोई के पारंपरिक सामान भी पसंद किए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र ने बताया कि ब्रजरज उत्सव का बाजार देश की विविध लोककलाओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को एक मंच उपलब्ध करा रहा है। हिमाचल, कश्मीर, त्रिपुरा, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों के कारीगर और व्यापारी अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थानीय और पारंपरिक कारीगरों को अपने हुनर के प्रदर्शन तथा कारोबार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना उत्सव का प्रमुख उद्देश्य है। बाजार में खादी और स्वदेशी उत्पादों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।