विद्यार्थियों के व्यवहार में बदलाव, तनाव और उदासी के संकेत पहचानें शिक्षक, केवल पढ़ाई नहीं मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी निभाएं- डॊ. नवीन गुप्ता

मथुरा/आगरा। विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, परीक्षा का तनाव और पारिवारिक परिस्थितियां उनके मानसिक स्वास्थ्य एवं सीखने की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रह सकती। उन्हें विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षक, परामर्शदाता और मार्गदर्शक बनकर उनकी भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक जरूरतों को भी समझना होगा। यह बात व्यवहार विज्ञानी एवं लाइफ कोच डॉ. नवीन गुप्ता ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), मथुरा में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में कही।

Oct 30, 2026 - 21:52
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विद्यार्थियों के व्यवहार में बदलाव, तनाव और उदासी के संकेत पहचानें शिक्षक, केवल पढ़ाई नहीं मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी निभाएं- डॊ. नवीन गुप्ता
मथुरा डायट में आयोजित सेमिनार में शिक्षकों को प्रशिक्षित करते व्यवहार विज्ञानी एवं लाइफ कोच डॊ. नवीन गुप्ता। सेमिनार में हुई गतिविधियों के कुछ चित्र।

29 अक्टूबर 2026 को राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए 'शिक्षक एक परामर्शदाता, मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत के रूप में' विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डायट मथुरा के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने की। संचालन डायट मथुरा के प्रवक्ता डॉ. गौरव गुंजन ने किया।

डॉ. नवीन गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की मनोवैज्ञानिक विशेषताएं, भावनात्मक आवश्यकताएं और सीखने की क्षमता अलग-अलग होती हैं। शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को गंभीरता से समझना चाहिए। तनाव, उदासी, सामाजिक अलगाव और आत्मविश्वास की कमी जैसे संकेतों की पहचान करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। समय रहते इन संकेतों को समझकर बच्चों को उचित मार्गदर्शन दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए मेंटर, काउंसलर और रोल मॉडल की भूमिका निभाएं। बच्चों के साथ संवेदनशील संवाद स्थापित करें, ताकि वे अपनी समस्याएं और भावनाएं बिना किसी झिझक के साझा कर सकें।

सेमिनार में DOS (डिस्कवरी ऒफ सेल्फ) साइकोमेट्रिक टूल के माध्यम से स्वयं, विद्यार्थियों और दूसरों को समझने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इसके साथ ही Conflict Management और Team Building जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यालयों में सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करना जरूरी है। शिक्षकों की संवेदनशीलता और उचित मार्गदर्शन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास तथा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor