आगरा में महिला आयोग की जनसुनवाई, 44 पीड़िताओं ने रखीं शिकायतें
आगरा के नवीन सर्किट हाउस में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने महिला जनसुनवाई की। इस दौरान 44 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पेंशन के मामले प्रमुख रहे। अध्यक्ष ने अधिकारियों और थानाध्यक्षों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला आयोग में आने वाले प्रत्येक प्रार्थना पत्र का शत-प्रतिशत निस्तारण कराया जाएगा। साथ ही घरेलू हिंसा रोकने, बेटियों की सुरक्षा और विवाह पूर्व काउंसलिंग को जरूरी बताया।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश, बोलीं- गलत रिश्ते की सजा पूरी जिंदगी नहीं भुगते कोई बेटी
आगरा। महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान और उन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से शुक्रवार को नवीन सर्किट हाउस में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने महिला जनसुनवाई की। इस दौरान कुल 44 महिलाओं ने अपनी शिकायतें और समस्याएं आयोग के सामने रखीं। जनसुनवाई में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पेंशन से जुड़े मामले प्रमुख रूप से सामने आए।
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को सभी शिकायतों पर प्रभावी एवं समयबद्ध कार्रवाई करने और निस्तारण की आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न मामलों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थानाध्यक्षों से दूरभाष पर बातचीत कर पीड़ित महिलाओं को तत्काल राहत दिलाने के लिए कड़े निर्देश भी दिए।
पिछली शिकायतों के निस्तारण की भी हुई समीक्षा
जनसुनवाई एवं समीक्षा बैठक की शुरुआत में एसडीएम नरेंद्र गंगवार और जिला प्रोबेशन अधिकारी अतुल सोनी ने महिला आयोग की अध्यक्ष का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। इसके बाद अध्यक्ष ने बैठक में मौजूद अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया और पिछली महिला जनसुनवाई तथा समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की जानकारी मांगी। उन्होंने पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से अनुपालन आख्या तलब की। जिन मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई थी, उनमें आवश्यक निर्देश देते हुए समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित कराने को कहा।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
बैठक में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के कार्यों की भी समीक्षा की गई। आयोग अध्यक्ष ने विशेष रूप से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण और कौशल विकास योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कौशल विकास मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इन योजनाओं से जुड़ सकें। महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
हर शिकायत का शत-प्रतिशत निस्तारण कराया जाएगा
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि महिला आयोग में आने वाले प्रत्येक प्रार्थना पत्र का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित कराया जाएगा। महिलाओं में अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। यही वजह है कि वे उत्पीड़न और अन्य समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हुए महिला आयोग और पुलिस तक पहुंच रही हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से अपील की कि थानों पर पहुंचने वाली पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को संवेदनशीलता और गंभीरता से सुना जाए। पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव जरूरी है। थानों पर सम्मानजनक व्यवहार और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होने से पीड़ित महिलाओं को काफी राहत मिल सकती है।
गलत रिश्ते की सजा पूरी जिंदगी नहीं भुगते कोई बेटी
घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए आयोग अध्यक्ष ने अभिभावकों से बेटियों की सुरक्षा और भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी बेटी को ससुराल में प्रताड़ित किया जा रहा है तो सामाजिक दबाव या लोकलाज के कारण उसे दोबारा उसी माहौल में भेजने से बचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गलत रिश्ते की सजा किसी बेटी को पूरी जिंदगी नहीं भुगतनी चाहिए। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मसम्मान से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
विवाह से पहले काउंसलिंग जरूरी
डॉ. चौहान ने विवाह से पहले युवक-युवतियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों की काउंसलिंग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शादी केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का संबंध है। इसलिए विवाह से पहले आपसी समझ, संवाद, व्यवहार और पारिवारिक सामंजस्य जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा की रोकथाम केवल पुलिस या महिला आयोग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर प्रयास करने होंगे। अभिभावकों को भी बेटियों की समस्याओं को समझना होगा और किसी भी तरह के उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जनसुनवाई एवं समीक्षा बैठक में एसडीएम नरेंद्र गंगवार, एसीपी सुनीता चौहान, डिप्टी सीएमओ डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, जिला कौशल प्रबंधक अमित धाकरे, सहायक श्रमायुक्त शगुन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।