ट्रंप को मिडटर्म चुनाव में करारा झटका, सीनेट के बाद हाउस में भी डेमोक्रेट्स का कब्जा

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। टेक्सास में जीना हिनोजोसा ने गवर्नर चुनाव जीतकर इतिहास रचा, जबकि ओहायो में विवेक रामास्वामी को एमी एक्टन ने हरा दिया। भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया ने भी जीत दर्ज की। ईरान युद्ध, महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को रिपब्लिकन पार्टी की हार की प्रमुख वजह माना जा रहा है। ट्रंप ने चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की बात कही है।

Nov 4, 2026 - 12:02
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ट्रंप को मिडटर्म चुनाव में करारा झटका, सीनेट के बाद हाउस में भी डेमोक्रेट्स का कब्जा

ईरान युद्ध, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा रिपब्लिकन पार्टी का खेल, 

भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत, टेक्सास में 30 साल बाद पलटा सत्ता का समीकरण 

ट्रंप बोले- नतीजे स्वीकार हैं, डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर करेंगे काम

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को 2026 के मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच हुए इन चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने जबरदस्त वापसी करते हुए सीनेट का नियंत्रण हासिल कर लिया है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी से बहुमत छीन लिया है। चुनाव परिणामों को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी और उनके नेतृत्व पर एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए जरूरी आंकड़ा पार कर लिया है। हाउस में भी डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत की पुष्टि अमेरिकी मीडिया ने कर दी है। चुनाव में डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, कंसास और साउथ कैरोलिना जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन राज्यों में भी सेंध लगाई है। इसके अलावा नॉर्थ कैरोलिना और ओहायो में भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है।

सीनेट में डेमोक्रेट्स का कब्जा, छह सीटों पर बड़ी जीत

अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास 53, डेमोक्रेट्स के पास 45 और दो निर्दलीय सांसद थे, जो डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करते थे। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी से कम से कम छह महत्वपूर्ण सीटें छीनकर सदन का राजनीतिक समीकरण बदल दिया है। टेक्सास, कंसास और साउथ कैरोलिना में मिली जीत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन राज्यों में लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव रहा है।

टेक्सास में जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हराकर बड़ा उलटफेर किया। कंसास में एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को पराजित किया। वहीं, साउथ कैरोलिना में एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम को शिकस्त दी। ओहायो में पूर्व डेमोक्रेटिक सीनेटर शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन हस्टेड को हराकर वापसी की। नॉर्थ कैरोलिना में रॉय कूपर और आयोवा में जोश ट्यूरेक ने भी डेमोक्रेटिक पार्टी को महत्वपूर्ण जीत दिलाई।

हाउस में भी ट्रंप की पार्टी को झटका

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। इस बार सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए थे। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास सदन में मामूली बहुमत था। लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक दर्जन से अधिक सीटों पर बढ़त और जीत हासिल कर सत्ता का समीकरण बदल दिया। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने हाउस का नियंत्रण भी हासिल कर लिया है।

आयोवा में क्रिस्टीना बोहानन ने रिपब्लिकन सांसद मरियानेट मिलर-मीक्स को हराकर पहला संसदीय क्षेत्र डेमोक्रेटिक पार्टी के खाते में डाल दिया। यह सीट पिछले चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के पास थी। इसके अलावा आयोवा में डेमोक्रेट्स ने तीन संसदीय सीटों पर जीत दर्ज की। हाउस में डेमोक्रेट्स की जीत का मतलब है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। विपक्षी पार्टी संसदीय समितियों के जरिए सरकार के फैसलों की जांच करा सकती है और प्रशासन से जवाब मांग सकती है।

टेक्सास में 30 साल बाद डेमोक्रेट्स की वापसी

इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम टेक्सास से सामने आया है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराकर इतिहास रच दिया है। वह टेक्सास की पहली लैटिना गवर्नर बनेंगी। लैटिना का अर्थ लैटिन अमेरिकी मूल की महिला से है। टेक्सास की आबादी में लैटिन अमेरिकी मूल के लोगों की बड़ी हिस्सेदारी है। इस राज्य में तीन दशक से अधिक समय बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने गवर्नर पद पर जीत दर्ज की है।

जीत के बाद हिनोजोसा ने कहा कि उन्हें टेक्सास के लोगों पर हमेशा भरोसा था। उन्होंने शिक्षा, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के हितों और राजनीति में बड़े उद्योगपतियों के प्रभाव को कम करने जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताया। इस हार के बाद ट्रंप ने ग्रेग एबॉट पर भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एबॉट को रिपब्लिकन पार्टी के सिद्धांतों से भटका हुआ बताते हुए उनकी हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।

ओहायो में विवेक रामास्वामी की हार

भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर चुनाव में बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने उन्हें हराकर जीत हासिल की है। एमी एक्टन ओहायो की पहली निर्वाचित महिला गवर्नर बनेंगी। उनकी जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 20 साल बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस राज्य में गवर्नर पद हासिल किया है।

40 वर्षीय विवेक रामास्वामी ने 2024 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पेश की थी। बाद में उन्होंने अपना नाम वापस लेकर डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था। इस चुनाव में ट्रंप ने भी रामास्वामी के पक्ष में प्रचार किया था। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी उनके लिए चुनावी अभियान चलाया। इसके बावजूद रामास्वामी मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल नहीं हुए।

डोनाल्ड ट्रम्प के विरोध के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी की इल्हान उमर ने मिनेसोटा से पांचवीं बार जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन नेगल को हराया।"

भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया की जीत

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। डेमोक्रेटिक नेता सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। 40 वर्षीय सुहास का जन्म टेक्सास के ह्यूस्टन में हुआ था। वह पेशे से वकील हैं और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी पॉलिसी एडवाइजर के रूप में काम कर चुके हैं।

वहीं, फ्लोरिडा से भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने भी जीत हासिल की है। उन्होंने 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया। उन्हें 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 48.1 प्रतिशत मत मिले। पिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। इसके अलावा भारतीय मूल की मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी अपना पद बरकरार रखा है। भारतीय मूल के उम्मीदवारों की इन सफलताओं को अमेरिकी राजनीति में भारतीय समुदाय के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक नेता प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के 7वें संसदीय क्षेत्र से लगातार छठी जीत हासिल की है। प्रमिला जयपाल अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। उनका जन्म चेन्नई में हुआ था। वह 2016 में पहली बार सांसद चुनी गई थीं। प्रमिला जयपाल संसद में प्रवासियों के अधिकार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं।

ईरान युद्ध और महंगाई ने बिगाड़ा रिपब्लिकन पार्टी का खेल

चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। इनमें ईरान के साथ युद्ध, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, महंगाई और आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक दबाव प्रमुख हैं। ट्रंप ने भी स्वीकार किया है कि ईरान के साथ युद्ध का असर उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने माना कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी मतदाता नाराज थे।

चुनाव के बाद सामने आए AP के मतदाता सर्वेक्षण में भी महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को प्रमुख चुनावी मुद्दा बताया गया है। आवास, ईंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने मतदाताओं को प्रभावित किया। रिपब्लिकन पार्टी के कई रणनीतिकारों ने भी हार के लिए ट्रंप की नीतियों और उनके चुनाव प्रचार के तरीके को जिम्मेदार ठहराया है। खासतौर पर उन राज्यों में पार्टी को नुकसान हुआ, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने आसानी से जीत हासिल की थी।

ट्रंप ने नतीजे स्वीकारे

चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नतीजों को स्वीकार करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव परिणाम स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर काम करेंगे। द न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ बातचीत में ट्रंप ने कहा कि डेमोक्रेट्स ने अच्छा काम किया और उन्होंने कड़ी मेहनत से चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि हम उनके साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं और उम्मीद है कि मिलकर कोई रास्ता निकाल लेंगे।

हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इन परिणामों को अपने ऊपर व्यक्तिगत हमले के रूप में नहीं देखते। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति की तारीफ की, लेकिन रिपब्लिकन उम्मीदवारों की हार के लिए उनकी अपनी कमजोरियों को जिम्मेदार बताया।

ट्रंप ने पोस्ट की 'वीटो' लिखी लाल टोपी

चुनाव परिणामों के बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लाल रंग की एक टोपी की तस्वीर साझा की, जिस पर 'वीटो' लिखा हुआ था। इस पोस्ट को संसद में डेमोक्रेटिक बहुमत के बावजूद राष्ट्रपति के पास मौजूद संवैधानिक अधिकारों के राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति को संसद से पारित किसी विधेयक पर वीटो लगाने का अधिकार है। हालांकि, राष्ट्रपति के वीटो को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पलटा जा सकता है। डेमोक्रेट्स के पास फिलहाल इतना बहुमत नहीं है। ऐसे में ट्रंप के पास विपक्ष के विधेयकों को रोकने का अधिकार बना रहेगा।

अब राजनीतिक पंडित बनेंगे ट्रंप

चुनाव परिणामों के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक और दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि अब वह राजनीतिक पंडित बनेंगे और चुनाव में उम्मीदवारों की जीत तथा हार के कारणों पर अपनी राय देंगे। ट्रंप ने कहा कि वह अच्छे और बुरे दोनों तरह के राजनीतिक विश्लेषण करेंगे और बताएंगे कि किन वजहों से उम्मीदवार जीते या हारे। उनकी इस टिप्पणी को चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान के बाद राजनीतिक माहौल पर उनकी प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

गवर्नर चुनावों में भी डेमोक्रेट्स का दबदबा

अमेरिका के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए चुनाव हुए। इनमें टेक्सास और ओहायो के अलावा जॉर्जिया और आयोवा में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने रिपब्लिकन पार्टी से सत्ता छीन ली। जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स ने जीत दर्ज की। आयोवा में रॉब सैंड ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराया। ओहायो में एमी एक्टन और टेक्सास में जीना हिनोजोसा की जीत ने डेमोक्रेटिक पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत राजनीतिक बढ़त दिलाई। इन परिणामों से स्पष्ट है कि मतदाताओं ने सिर्फ संसद के चुनाव में ही नहीं, बल्कि राज्यों के नेतृत्व के चयन में भी रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ अपना रुख दिखाया है।

ट्रंप प्रशासन के सामने बढ़ेंगी राजनीतिक चुनौतियां

मिडटर्म चुनाव में दोनों सदनों का नियंत्रण गंवाने के बाद ट्रंप प्रशासन के सामने अगले दो वर्षों में कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी अब संसदीय समितियों के जरिए सरकारी नीतियों, खर्च, विदेश नीति और प्रशासनिक फैसलों की जांच कर सकती है। अधिकारियों को संसदीय सुनवाई में बुलाया जा सकता है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।

इसके अलावा ट्रंप के नए विधायी प्रस्तावों को संसद से मंजूरी दिलाना भी मुश्किल हो सकता है। बजट, टैक्स, आव्रजन और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर दोनों पार्टियों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। कुल मिलाकर 2026 का मिडटर्म चुनाव ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हुआ है। डेमोक्रेट्स की इस वापसी ने अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन बदल दिया है। अब देखना होगा कि ट्रंप विपक्ष के साथ तालमेल बनाकर सरकार चलाते हैं या आने वाले दो वर्षों में अमेरिकी राजनीति में टकराव और तेज होता है।