एडीए की सील और नोटिस बेअसर,आगरा में अवैध निर्माण का खेल जारी

आगरा में एडीए की अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई पर दो मामलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरेश नगर में जून में सील किए गए कॉम्प्लेक्स में पांचवीं मंजिल पर दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत की गई है। वहीं ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण को लेकर दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में नोटिस जारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। दोनों मामलों में एडीए की निगरानी व्यवस्था और प्रवर्तन अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Nov 4, 2026 - 00:57
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एडीए की सील और नोटिस बेअसर,आगरा में अवैध निर्माण का खेल जारी

सुरेश नगर में सील कॉम्प्लेक्स में दोबारा निर्माण शुरू, ताज की मंडी में नोटिस के बाद भी नहीं रुका निर्माण, एडीए की निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में कहीं प्राधिकरण के नोटिस को नजरअंदाज कर निर्माण जारी है तो कहीं एडीए की लगाई गई सील के बावजूद भवन में दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत सामने आई है। इन दोनों मामलों ने प्राधिकरण के प्रवर्तन अनुभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब एडीए अवैध निर्माण की जानकारी होने पर नोटिस जारी करता है और भवन को सील भी कर देता है, तो फिर उसी परिसर में निर्माण कैसे जारी रह जाता है?

ताजा मामला सुरेश नगर का है। यहां एडीए की ओर से जून में सील किए गए एक कॉम्प्लेक्स में दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कराने के मामले में प्रवर्तन दल ने कार्रवाई करते हुए भवन पर सील लगाई थी, लेकिन अब इसी सील किए गए परिसर में पांचवीं मंजिल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। सुरेश नगर रेजिडेंशियल सोसायटी ने इस मामले में एडीए उपाध्यक्ष से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

सीलिंग के बाद भी पांचवीं मंजिल पर निर्माण

सुरेश नगर में सील किए गए कॉम्प्लेक्स में दोबारा निर्माण शुरू होने की शिकायत ने एडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जून में जब प्रवर्तन दल ने भवन को सील किया था, तब माना गया था कि अवैध निर्माण पर रोक लग जाएगी। लेकिन अब पांचवीं मंजिल पर निर्माण शुरू होने की शिकायत सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि सील लगाने के बाद भवन की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?

क्या सील लगाने के बाद प्रवर्तन विभाग ने मौके पर दोबारा निरीक्षण किया? क्या भवन की नियमित निगरानी की गई? यदि सील तोड़कर अथवा आदेशों की अनदेखी कर निर्माण शुरू किया गया है तो संबंधित लोगों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सुरेश नगर रेजिडेंशियल सोसायटी ने एडीए उपाध्यक्ष को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच और अवैध निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। शिकायत के बाद प्राधिकरण की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

लोहामंडी में नोटिस के बाद भी निर्माण पर सवाल

दूसरा मामला लोहमंडी वार्ड के ताज की मंडी स्थित पुनिया पाड़ा का है। यहां अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण को लेकर एडीए के प्रवर्तन अनुभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। प्राधिकरण के दस्तावेजों के अनुसार, 26 दिसंबर 2025 को सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 12 फरवरी 2026 को दूसरा पत्र जारी कर स्पष्ट किया गया कि निर्माण की स्वीकृति के संबंध में संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई जवाब अथवा स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत नहीं किया गया है।

एडीए ने इसी पत्र में निर्माण कार्य तत्काल बंद करने और परिसर खाली करने के निर्देश दिए थे। साथ ही तीन दिन के भीतर सूचना देने को कहा गया था। चेतावनी दी गई थी कि आदेश का पालन नहीं होने पर प्राधिकरण परिसर को सील कर देगा। इसके बावजूद निर्माण को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। जिस निर्माण की जानकारी प्राधिकरण को थी, जिस पर नोटिस जारी हो चुका था और स्वीकृति से संबंधित जवाब भी नहीं दिया गया था, वहां समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या प्रवर्तन विभाग की जिम्मेदारी केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रह गई है?

पीछे बने मकानों को भी नोटिस, फ्लैट्स की सीलिंग की तैयारी

मामले में क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि पिछले सप्ताह ही नोटिस जारी किया गया है और अब इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के मुताबिक, संपत्ति के पीछे की ओर बनाए जा रहे इसी संपत्ति से संबंधित अन्य मकानों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं एडीए के अधिकारी का कहना है कि फ्लैट्स के संबंध में पहले ही सीलिंग के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब सीलिंग की कार्रवाई की जानी है। नोटिस में निर्धारित समयसीमा बुधवार को पूरी हो रही है। इसके बाद प्राधिकरण की ओर से अगली कार्रवाई की जाएगी।

प्रवर्तन विभाग की जवाबदेही कौन तय करेगा

दोनों मामलों में सबसे बड़ा सवाल एडीए की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। सुरेश नगर में सील किए गए भवन में दोबारा निर्माण की शिकायत है, जबकि ताज की मंडी में नोटिस और चेतावनी के बावजूद निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई भवन बिना मानचित्र स्वीकृति के बनाया जा रहा है तो शुरुआती स्तर पर ही निर्माण क्यों नहीं रुकवाया जाता? सीलिंग के बाद भी निर्माण शुरू होने की शिकायत पर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब क्यों नहीं मांगा जाता? नोटिस जारी करने के बाद उसकी अनुपालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?

शहर में आम नागरिकों को नक्शा स्वीकृत कराने और भवन निर्माण के नियमों का पालन करने के लिए एडीए के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं दूसरी ओर अवैध निर्माण पर नोटिस और सीलिंग के बावजूद काम जारी रहने की शिकायतें सामने आना विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

नोटिस और सीलिंग से आगे बढ़कर कार्रवाई कब

एडीए की प्रवर्तन व्यवस्था का उद्देश्य केवल नोटिस जारी करना या भवन पर सील लगाना नहीं, बल्कि अवैध निर्माण को रोकना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी है। यदि सीलिंग के बाद भी निर्माण जारी रहता है तो यह केवल भवन मालिक की ओर से नियमों की अनदेखी का मामला नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता का भी सवाल है।

अब देखना यह है कि एडीए सुरेश नगर के सील कॉम्प्लेक्स में दोबारा निर्माण की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में नोटिस के बाद निर्माण को रोकने के लिए कितनी गंभीरता दिखाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इन मामलों में लापरवाही सामने आने पर संबंधित प्रवर्तन अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है या फिर कार्रवाई एक बार फिर नोटिस और आश्वासन तक ही सीमित रह जाती है।