आखिर किसकी हैआगरा कॊलेज की भूमि पर नजर, जिसकी वजह से स्टाफ क्लब को देना पड़ा कड़ा संदेश, कहा- एक इंच भूमि भी नहीं छोड़ेंगे, हर कुत्सित प्रयास का देंगे मुंहतोड़ जवाब
आगरा के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान आगरा कॉलेज की भूमि और परिसंपत्तियों पर नजर गड़ाने वालों को स्टाफ क्लब ने कड़ा और आक्रामक संदेश दिया है। स्टाफ क्लब ने साफ चेतावनी दी है कि कॉलेज की एक इंच भूमि भी किसी को नहीं दी जाएगी और यदि किसी ने कब्जा या हस्तांतरण का प्रयास किया तो शिक्षक, कर्मचारी, छात्र और पूर्व छात्र मिलकर उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।
स्टाफ क्लब की चेतावनी: कुत्सित प्रयासों को नहीं किया जाएगा बर्दाश्त
आगरा। आगरा कॉलेज के शिक्षकों के संगठन स्टाफ क्लब के सचिव प्रोफेसर विजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि आगरा कॉलेज आगरा अपनी वर्तमान परिसंपत्तियों और परिसर की एक इंच भूमि के हस्तांतरण अथवा कब्जे के किसी भी कुत्सित प्रयास का मुंहतोड़ जवाब देगा।
उन्होंने कहा कि स्टाफ क्लब के संज्ञान में आया है कि शहर के कुछ स्वार्थी और अराजक व्यक्ति एवं संगठन आगरा कॉलेज की बहुमूल्य भूमि और उसकी अवसंरचनाओं पर नजर गड़ाए हुए हैं। स्टाफ क्लब ने ऐसे तत्वों को आगाह करते हुए कहा कि यदि वे आगरा के 203 वर्ष पुराने ऐतिहासिक उच्च शिक्षा संस्थान के विकास में सहयोग नहीं कर सकते तो कम से कम इसकी संपत्तियों पर कुदृष्टि डालने से बाज आएं।
विश्वविद्यालय बनने की दिशा में प्रयासरत है आगरा कॉलेज
स्टाफ क्लब ने कहा कि आगरा कॉलेज पहले ही राज्य विश्वविद्यालय या केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है और ऐसे में मौजूदा भूमि और अवसंरचनाएं भी भविष्य में कम पड़ सकती हैं।
विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया कि मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पूर्व प्राचार्य की कथित मिलीभगत से आगरा कॉलेज का बहुमूल्य क्रीड़ांगन बिना किसी वैध प्रक्रिया और मुआवजे के ले लिया था, जिसके खिलाफ स्टाफ क्लब लगातार प्रयास कर रहा है।
340 बीघा भूमि पर किसी की नजर बर्दाश्त नहीं
स्टाफ क्लब ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार आगरा कॉलेज के पास कुल 340 बीघा भूमि है। यदि किसी ने इस भूमि या इसकी अवसंरचनाओं पर नजर गड़ाने की कोशिश की तो उसे कड़ा प्रतिरोध झेलना पड़ेगा।
संस्था के एक हजार से अधिक शिक्षक-कर्मचारी, लगभग बीस हजार विद्यार्थी और हजारों पूर्व छात्र कॉलेज की संपत्ति और सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव संघर्ष करेंगे।
सरकार और प्रशासन से भी की अपील
स्टाफ क्लब ने प्रदेश सरकार, राजनीतिक वर्ग और प्रशासन से भी आग्रह किया कि आगरा कॉलेज की ऐतिहासिक भूमि और दस्तावेजों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए, अन्यथा शिक्षक और छात्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
इस बारे में जानकारी किये जाने पर पता चला कि कुछ लोगों द्वारा प्रदेश शासन को आगरा कॉलेज की भूमि हस्तांतरित कराने की कोशिशें की जा रही हैं। कॊलेज के थॊमसन हॊस्टल से होकर राजामंडी के दरियानाथ मंदिर तक नया रास्ता बनाने के लिए कॊलेज की यह भूमि हासिल करने के प्रयास किये जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि एक व्यापार संगठन ने इस बारे में एक प्रस्ताव भी शासन को भेजा है। इसकी भनक लगते ही स्टाफ क्लब ने आक्रामक तेवर अपना लिए हैं।
स्टाफ क्लब ने इस सोच को शिक्षा विरोधी और कुत्सित मानसिकता बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और कॉलेज प्रशासन से भी आग्रह किया कि संस्था की भूमि और अवसंरचनाओं की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
पूर्व छात्रों से भी सहयोग की अपील
स्टाफ क्लब ने कॉलेज के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों से भी आगे आने की अपील की। इनमें प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और आगरा के सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. एस. पी. सिंह बघेल, जो आगरा कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक भी हैं, से कॉलेज की भूमि के संरक्षण और इसे पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने में सहयोग देने का आग्रह किया है।
राजा की मंडी से सटी भूमि वापस दिलाने की मांग
स्टाफ क्लब ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरी प्रचारिणी से लेकर राजा की मंडी तक की भूमि एक ही खसरा नंबर में दर्ज है और उसका विधिक स्वामित्व आगरा कॉलेज के पास है।
संगठन ने मांग की कि राजा की मंडी से सटी कॉलेज की भूमि को वापस दिलाया जाए और उसे किसी भी अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए।
यह प्रेस विज्ञप्ति स्टाफ क्लब के सचिव प्रोफेसर विजय कुमार सिंह और इसके अन्य कार्यकारिणी पदाधिकारियों द्वारा जारी की गई, जो आगरा कॉलेज के 200 से अधिक शिक्षकों के प्रतिनिधि संगठन का प्रतिनिधित्व करते हैं।