होर्मुज में फंसे भारत के 40 जहाज, गैस और तेल है भरा हुआ, ईरान-अमेरिका में गोलीबारी ने बढ़ाया संकट
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जारी खींचतान के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बरकरार है। इस अहम समुद्री रूट से कमर्शियल ट्रैफिक सामान्य रूप से नहीं चल पा रहा है।
तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहा संकट दुनिया और भारत के लिए लगातार मुश्किल का सबब बना हुआ है। मौजूदा समय में भी भारत आ रहे कम के कम 40 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पास फंसे हैं, जिनको इस समुद्री गलियारे से सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पा रहा है। इन जहाजों से एलपीजी, एलएनजी, कच्चा तेल, खाद और दूसरा सामान आ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग मार्गों में से है लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष की वजह से यहां से होने वाला यातायात प्रभावित है।
एक अखबार ने अधिकारियों के हवाले से शुक्रवार को बताया है कि भारत आने वाले 40 से ज्यादा जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हैं। ये होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर नहीं पा रहे हैं। इन जहाजों में से आधे ऊर्जा उत्पाद ले जा रहे हैं। नई दिल्ली ने भारत के झंडे वाले कुल 13 जहाजों के होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में फंसे होने की बात कही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने खाड़ी से प्राथमिकता के आधार पर निकाले जाने वाले 41 जहाजों की एक सूची तैयार की है। इसमें ऊर्जा उत्पाद ले जाने वाले 18 टैंकर, उर्वरक से लदे 16 जहाज और अन्य माल ले जाने वाले सात जहाज शामिल हैं। इससे भारत की उर्जा सुरक्षा पर चिंता बढ़ सकती है क्योंकि कच्चे तेल और गैस से लदे जहाज यहां से नहीं निकल पा रहे हैं।
फारस की खाड़ी में शुक्रवार को तनाव एक बार फिर बढ़ गया है क्योंकि होर्मुज में गोलीबारी हुई है। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया है। इससे बीते एक महीने से चल रहे नाजुक युद्धविराम के टूटने का खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल ईरानी नेता अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे स्थायी तौर पर युद्ध रुकने का रास्ता निकल सकता है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिका पर युद्धविराम को ना मानने का आरोप लगाया है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने जास्क बंदरगाह और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो ईरानी तेल टैंकरों और कई तटीय इलाकों पर हमला किए हैं, जो संघर्ष-विराम का सीधा उल्लंघन है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये कार्रवाई पिछले महीने हुए संघर्ष-विराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसका उनके सुरक्षाबलों ने कड़ा जवाब दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेनाओं की मौजूदगी अस्थिरता का कारण बन गई है, उनको यहां से हटना चाहिए।