बीसीसीआई ने तोड़ी रियान पराग विवाद पर चुप्पी,  कहा-  पराग से मांगी जाएगी सफाई,  नशेबाजी पड़ी राजस्थान रॉयल्स कप्तान पर भारी

राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग मंगलवार को पंजाब किंग्स के खिलाफ मुल्लांपुर में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम में ‘वेपिंग’ (ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना) करते हुए टीवी कैमरों में कैद होने के बाद विवादों में घिर गए हैं।

Apr 29, 2026 - 23:07
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बीसीसीआई ने तोड़ी रियान पराग विवाद पर चुप्पी,  कहा-  पराग से मांगी जाएगी सफाई,  नशेबाजी पड़ी राजस्थान रॉयल्स कप्तान पर भारी

नई दिल्ली। रियान पराग विवाद पर बीसीसीआई की पहली प्रतिक्रिया आ गई है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि आगे की कार्रवाई पर विचार करने से पहले रियान पराग से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। दरअसल, राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग मंगलवार को मुल्लांपुर में पंजाब किंग्स के खिलाफ आईपीएल 2026 के मैच के दौरान टीम के ड्रेसिंग रूम में वेपिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
 
लाइव प्रसारण के दौरान फिल्माए गए ये वीडियो तुरंत वायरल हो गए और ऑनलाइन बहस छेड़ दी। अब बीसीसीआई का ध्यान इस घटना पर गया है। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि हम इस मामले पर रियान से स्पष्टीकरण मांगेंगे, क्योंकि वैपिंग की अनुमति नहीं है। उनके स्पष्टीकरण के आधार पर आईपीएल आगे की कार्रवाई करेगा।

माना जा रहा है कि यह क्लिप राजस्थान रॉयल्स के 223 रन के लक्ष्य का पीछा करते समय पराग के आउट होने के तुरंत बाद फिल्माया गया था। हालांकि अभी तक सजा के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन खबरों के अनुसार मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है।

24 वर्षीय पराग का बल्ले से प्रदर्शन अब तक कुछ खास नहीं रहा है। नौ मैचों में उन्होंने 14.63 के औसत और 124.47 के स्ट्राइक रेट से 117 रन बनाए हैं, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 29 है। इस सीजन में उन्होंने अभी तक अर्धशतक नहीं लगाया है। संजू सैमसन के जाने के बाद रियान पराग को राजस्थान ने अपना कप्तान बनाया था।

आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स से जुड़ा यह दूसरा विवाद है। इससे पहले गुवाहाटी में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ आईपीएल मैच के दौरान फ्रेंचाइजी मैनेजर रविंदर ‘रोमी’ भिंडर को फोन का इस्तेमाल करते हुए कैमरे में कैद किया गया था। बाद में बीसीसीआई की भ्रष्टाचार-विरोधी और सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) ने उन्हें चेतावनी और एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ बरी कर दिया। बोर्ड ने अपनी एसीएसयू शाखा को मामले की जांच करने के लिए कहा था और सुरक्षा शाखा को कोई गंभीर गड़बड़ी नहीं मिली।