अंकित बालियान हत्याकांड में सपा का विरोधाभास उजागरः जाटों की नाराजगी थामने निकले थे अखिलेश, अपनों ने ही शूटरों के एनकाउंटर पर सवाल उठाकर बढ़ा दी मुश्किल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान से पैदा हुई जाट समाज की नाराजगी पहले ही अखिलेश के लिए चुनौती बन चुकी थी। अंकित बालियान प्रकरण ने उस चुनौती को और कठिन कर दिया है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि 2027 में जाट किसके साथ जाएंगे, बल्कि यह भी है कि सपा जिस जाट समाज को अपने साथ जोड़ना चाहती है, उसके सामने अपने ही विरोधाभासी संदेश का बचाव कैसे करेगी।
लखनऊ/शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है। ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान से जाट समाज में पहले से नाराजगी झेल रहे अखिलेश यादव ने पीड़ित जाट परिवार तक पहुंच बनाकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एनकाउंटर संबंधी बयानों ने इस कोशिश को कमजोर कर दिया।
‘चवन्नी’ वाले बयान ने पहले ही बिगाड़ दिया था माहौल
अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को जयंत चौधरी और रालोद पर निशाना माना गया था। जयंत ने पलटवार करते हुए इसे जाट समाज को निशाना बनाने वाला बयान बताया और कहा कि सियासी लड़ाई में कुछ कहना था तो उनका नाम लेकर कहते। मायावती ने भी अखिलेश से जाट समाज से माफी मांगने की मांग की थी।
इस विवाद के बीच अंकित बालियान की हत्या ने अखिलेश यादव को जाट समाज तक पहुंच बनाने का मौका दिया। पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए सपा की ओर से पीड़ित परिवार तक पहुंच को महज संवेदना नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना गया।
26 अगस्त को कैराना से सपा सांसद इकरा हसन अपने भाई और सपा विधायक नाहिद हसन के साथ बंतीखेड़ा पहुंचीं। उन्होंने अंकित के परिवार से मुलाकात की और पुलिस से जल्द हत्याकांड का खुलासा करने की मांग की। इसी दौरान अंकित के पिता सत्यवीर सिंह की फोन पर अखिलेश यादव से बात कराई गई।
अखिलेश ने परिवार को न्याय की लड़ाई में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। यह कदम उस समय आया जब ‘चवन्नी’ विवाद के बाद जाट समाज में सपा को लेकर नाराजगी की चर्चा थी। हालांकि इसे अखिलेश की घोषित रणनीति कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन राजनीतिक संदेश स्पष्ट था।
एनकाउंटर ने बदल दिया सपा का संदेश
सोमवार को पुलिस ने अंकित हत्याकांड के दो कथित शूटरों सुमित और मोहित को मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम था और वे बाइक से शामली से सोनीपत की ओर भाग रहे थे। दो अन्य कथित आरोपी सत्यम और आर्यन अभी फरार हैं।
एनकाउंटर के बाद सपा के भीतर से ही ऐसे बयान आए, जिन्होंने पार्टी की मुश्किल बढ़ा दी। वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने उत्तर प्रदेश में हत्याओं और फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा उठाया, जबकि सांसद अवधेश प्रसाद ने दोषियों को सजा देने का अधिकार न्यायपालिका को बताते हुए एनकाउंटर की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
यहीं सपा का विरोधाभास सामने आया। जिस परिवार तक अखिलेश न्याय का भरोसा लेकर पहुंच रहे थे, उसी परिवार के लिए न्याय की दिशा में हुई पुलिस कार्रवाई पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाकर जाटों की नाराजगी और बढ़ा दी है।
परिवार ने ही दे दिया जवाब
रामगोपाल यादव और अवधेश प्रसाद के बयानों के बाद अंकित के पिता सत्यवीर सिंह और पत्नी सीमा ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया। सत्यवीर सिंह ने कहा कि एनकाउंटर के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।
पत्नी सीमा ने सपा नेताओं से सवाल किया कि यदि किसी नेता के परिवार के सदस्य के साथ ऐसी घटना होती तो क्या वे एनकाउंटर पर इसी तरह सवाल उठाते? उन्होंने कहा कि हत्या करने वालों का समाज में रहना खतरा है और गैंगवार पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। परिवार की यह प्रतिक्रिया सपा के लिए इसलिए असहज है क्योंकि पार्टी जिस परिवार तक सहानुभूति का संदेश लेकर पहुंची थी, वही परिवार उसके वरिष्ठ नेताओं के बयान से सहमत नहीं दिखा।
जयंत चौधरी ने साधा मौका
सपा की इस मुश्किल के बीच रालोद प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी सोमवार को बंतीखेड़ा पहुंचे। उन्होंने अंकित के पिता से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।
‘चवन्नी’ विवाद के कुछ ही दिन बाद जयंत का अंकित परिवार के बीच पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। अखिलेश जिस जाट परिवार तक पहुंचकर नाराजगी कम करने की कोशिश कर रहे थे, जयंत उसी परिवार के दरवाजे पर पहुंचकर अपने पुराने राजनीतिक आधार के साथ खड़े नजर आए।
अखिलेश के सामने दोहरी चुनौती
अखिलेश के सामने चुनौती सिर्फ जाट वोट हासिल करने की नहीं, बल्कि पीडीए की राजनीति के साथ पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली जाट समाज में भरोसा कायम करने की भी है। अंकित परिवार तक इकरा हसन को भेजना और पिता की अखिलेश से फोन पर बात कराना इसी दिशा में संदेश था, लेकिन एनकाउंटर के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयान ने इसे कमजोर कर दिया।
दूसरी ओर रालोद अब भाजपा के साथ है और जयंत चौधरी को अपने पुराने जाट आधार को यह भरोसा दिलाना है कि गठबंधन में रहते हुए भी वे जाट हितों और पश्चिमी यूपी की आवाज बने हुए हैं। अंकित परिवार से मुलाकात उनके लिए यही जमीनी जुड़ाव दिखाने का अवसर बनी।
2027 में दिखेगा असर
अंकित हत्याकांड के आधार पर अभी जाट वोट के किसी बड़े ध्रुवीकरण का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। लेकिन ‘चवन्नी’ विवाद के बाद अखिलेश के सामने जाटों की नाराजगी कम करने की चुनौती थी और इस प्रकरण ने उसे आसान बनाने के बजाय और जटिल कर दिया।
एक तरफ अखिलेश पीड़ित परिवार तक पहुंचकर भरोसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता उस पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं जिसे परिवार न्याय की दिशा में कदम मान रहा है। जयंत चौधरी ने इसी मौके पर परिवार के बीच पहुंचकर राजनीतिक बढ़त का संदेश दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की सियासत में इस घटनाक्रम का कितना असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।