ब्रज में जन्माष्टमी का चरम उल्लास, कन्हैया मित्तल के भजनों पर झूमी कृष्णनगरी; ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंजा पाञ्चजन्य, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर सुबह से उमड़ रहा श्रद्धालुओं का रेला, शाम की बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था की लहर—द्वारिकाधीश, बांके बिहारी, दाऊजी, बरसाना और गोवर्धन में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दीपों से झिलमिलाए यमुना के घाट

मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर शुक्रवार को समूचा ब्रज भक्ति, आस्था और उल्लास के सागर में डूबा नजर आया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा और लाखों श्रद्धालु कान्हा के जन्म की प्रतीक्षा में डटे रहे। शाम को हुई बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था को नहीं डिगा सकी। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के साथ द्वारिकाधीश मंदिर, वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर, दाऊजी, बरसाना और गोवर्धन में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इसी भक्तिमय माहौल के बीच श्रीकृष्णोत्सव-2026 के तहत डैम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में आयोजित भक्ति संगीत की शाम ने जन्माष्टमी के उल्लास को और चरम पर पहुंचा दिया। प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल के भजनों पर श्रद्धालु और युवा जमकर झूमे तथा पूरा प्रेक्षागृह ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंज उठा।

Sep 4, 2026 - 23:56
Sep 4, 2026 - 23:58
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ब्रज में जन्माष्टमी का चरम उल्लास, कन्हैया मित्तल के भजनों पर झूमी कृष्णनगरी; ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंजा पाञ्चजन्य, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर सुबह से उमड़ रहा श्रद्धालुओं का रेला, शाम की बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था की लहर—द्वारिकाधीश, बांके बिहारी, दाऊजी, बरसाना और गोवर्धन में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दीपों से झिलमिलाए यमुना के घाट
मथुरा के पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर श्रद्धालुओं को भक्ति संगीत में डुबोते प्रख्यात भजन गायक कन्हैया मित्तल।

श्रीकृष्णोत्सव-2026 के अंतर्गत जन्माष्टमी पर यमुना के घाटों पर दीप जलाते श्रद्धालु।

जन्मभूमि पर आस्था का सैलाब

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें और भीड़ दिखाई दी। दूर-दराज से आए श्रद्धालु कान्हा के जन्म के साक्षी बनने के लिए मथुरा में डटे रहे। शाम को बारिश शुरू होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश के बीच भी भक्त जन्मभूमि की ओर बढ़ते रहे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।

मथुरा के अलावा वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, दाऊजी, बरसाना और गोवर्धन में भी जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। पूरे ब्रज में मंदिरों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर कृष्ण भक्ति का वातावरण दिखाई दिया।

पाञ्चजन्य में भक्ति संगीत की धूम

श्रीकृष्णोत्सव-2026 के अंतर्गत जन्माष्टमी की शाम डैम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम रही। दिनभर चले कार्यक्रमों में कृष्ण भक्ति के विविध रंग देखने को मिले। दोपहर में युवा कथावाचक मोहित शेवानी की प्रस्तुति ‘कृष्णानायन—सुनिए वो जो कभी कहा नहीं गया’ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

मोहित शेवानी ने संगीतात्मक शैली में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनसुने प्रसंग प्रस्तुत किए। कथा और संगीत के भावपूर्ण मेल ने दर्शकों को बांधे रखा और प्रेक्षागृह में मौजूद लोग कृष्ण की लीलाओं और प्रसंगों में भावविभोर नजर आए।

सुरों में उतरे कृष्ण के अनंत रंग

इसके बाद हार्टफुलनेस फाउंडेशन की ओर से विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। प्रसिद्ध गायिका स्नीति मिश्रा ने ‘कृष्ण : अनंत रंग, अनंत भाव’ की प्रस्तुति के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के विविध भावों को सुरों में पिरोया।

उनके साथ अनिरबान ने भजन एवं बांसुरी वादन किया, जबकि मैत्रेयी राय ने भजन गायन से प्रस्तुति को भावपूर्ण बनाया। बांसुरी की मधुर तान और भक्ति संगीत के सुरों ने पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह के वातावरण को पूरी तरह कृष्णमय कर दिया।

कन्हैया मित्तल ने बांधा भक्ति का समां

जन्माष्टमी की शाम का सबसे बड़ा आकर्षण प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल की भजन संध्या रही। मंच पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई देने लगा। कन्हैया मित्तल ने भगवान श्रीकृष्ण और खाटू श्याम की भक्ति से जुड़े लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

उन्होंने ‘श्याम से मिलने का सत्संग’, ‘मेरे बांके बिहारी लाल’, ‘कीर्तन की है रात’ और ‘हारे के सहारे आजा’ जैसे लोकप्रिय भक्ति गीत प्रस्तुत किए। भजनों की लय बढ़ने के साथ प्रेक्षागृह में मौजूद श्रद्धालु और युवा अपनी जगह पर खड़े होकर झूमने लगे। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच लगातार ‘राधे-राधे’ और ‘श्याम बाबा की जय’ के जयकारे गूंजते रहे।

कन्हैया मित्तल की आवाज में कृष्ण भक्ति और श्याम भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भक्ति संगीत की इस प्रस्तुति ने जन्माष्टमी की शाम को यादगार बना दिया और देर तक पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह कृष्ण और श्याम की भक्ति में डूबा रहा।

चौराहों पर भी बिखरे ब्रज संस्कृति के रंग

पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह के साथ मथुरा शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और तिराहों पर भी श्रीकृष्णोत्सव का उल्लास देखने को मिला। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से बनाए गए सुसज्जित मंचों पर लोक कलाकारों ने कृष्ण लीला, रासलीला, लोक नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ब्रज की समृद्ध लोक संस्कृति के रंग बिखेरे।

जन्मभूमि की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं के लिए चौराहों पर आयोजित ये प्रस्तुतियां उत्सव का विशेष आकर्षण बनी रहीं। जगह-जगह कृष्ण भक्ति से जुड़े गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने ब्रज की पारंपरिक संस्कृति को जीवंत कर दिया।

दीपों से झिलमिलाए यमुना के घाट

श्रीकृष्णोत्सव-2026 के अंतर्गत जन्माष्टमी पर यमुना के घाटों पर दीपोत्सव का भी आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने यमुना के घाटों पर दीपदान किया। शाम ढलते ही दीपों की कतारों से यमुना के घाट झिलमिला उठे और घाटों का दृश्य श्रद्धा तथा आध्यात्मिकता से भर गया।

एक ओर जन्मभूमि पर कान्हा के जन्म की प्रतीक्षा में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा, वहीं दूसरी ओर यमुना के घाटों पर दीपों की रोशनी और मंदिरों में गूंजते भजन ब्रज की आध्यात्मिक छटा को और गहरा करते रहे।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को मथुरा-वृंदावन सहित पूरा ब्रज दिनभर आस्था और उत्सव में डूबा रहा। जन्मभूमि पर कान्हा के जन्म की प्रतीक्षा, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, बारिश के बावजूद कायम रहा भक्तों का उत्साह और रात में कन्हैया मित्तल की भजन संध्या ने श्रीकृष्णोत्सव-2026 को भक्ति और संस्कृति के अद्भुत संगम में बदल दिया।

SP_Singh AURGURU Editor