बेलारूस ने किया ऐलान, तीन ताकतवर देशों की लिस्ट में भारत, अमेरिका बाहर
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच पर बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भारत की तारीफों के पुल बांध दिए। उन्होंने अपने भाषण में भारत को दुनिया के ताकतवर देशों की लिस्ट में शामिल किया। हैरानी की बात ये है कि इसमें अमेरिका का नाम ही शामिल नहीं है। शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भारत की तारीफों के पुल बांध दिए। संयुक्त बयान में एससीओ के सदस्य देशों ने ईरान पर अमेरिकी हमलों की निंदा की।
बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच पर बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भारत की तारीफों के पुल बांध दिए। उन्होंने अपने भाषण में भारत को दुनिया के ताकतवर देशों की लिस्ट में शामिल किया। हैरानी की बात ये है कि इसमें अमेरिका का नाम ही शामिल नहीं है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए।
बेलारूस के राष्ट्रपति ने कहा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कितने ही बराबर हैं। हम मानते हैं कि चीन, रूस और भारत तीन ताकतवर देश हैं। ये तीनों आर्थिक रूप से ताकतवर परमाणु देश हैं। एससीओ समिट में मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड अपनाए जाने को अस्वीकार्य करार दिया गया।
संयुक्त बयान में एससीओ के सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर गहरी चिंता जताई और ईरान पर अमेरिकी हमलों की निंदा की। इस बयान को बिश्केक घोषणा-पत्र नाम दिया गया है। एससीओ में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।
घोषणा पत्र में कहा गया है कि सदस्य देशों ने आतंकवादी और अलगाववादी मकसद के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल को रोकने के महत्व पर जोर दिया है। सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय सूचना सुरक्षा, सूचना संरक्षण और नए प्रकार के अपराधों से निपटने के क्षेत्रों में आपसी समन्वय को मजबूत करेंगे।
भारत ने शिखर सम्मेलन में सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने, आतंकवाद और चरमपंथ जैसे अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के उपायों पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय ने 13 फैसलों की जानकारी दी, जिनमें से एक है एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए सार्वभौमिक केंद्र के नियमों को मंजूरी देना।
पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और अन्य नेताओं की मौजूदगी में कहा कि वह आतंकवाद को सरकार की नीति के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों का मुकाबला करें।