आगरा से मथुरा तक घर-घर गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो’, ब्रज में जन्मे हजारों कान्हा
आगरा, मथुरा और पूरे ब्रज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। मथुरा श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आधी रात भगवान का जन्म हुआ और चांदी की कामधेनु के दूध से अभिषेक किया गया। मथुरा-वृंदावन में बारिश के बावजूद 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। वहीं आगरा में करीब 350 बच्चों ने जन्म लिया। कई परिवारों ने जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की इच्छा पूरी होने पर नवजात को कान्हा और राधारानी का स्वरूप मानकर स्वागत किया।
आधी रात को मंदिरों में गूंजे घंटे-घड़ियाल, कहीं गर्भगृह में हुआ अभिषेक तो कहीं घर में जन्मे लड्डू गोपाल, मथुरा-वृंदावन में उमड़ा 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का सैलाब
आगरा/मथुरा। ब्रज की धरती पर शुक्रवार की रात जैसे द्वापर युग फिर जीवंत हो उठा। घड़ी की सुइयां जैसे ही रात के 12 बजे पर पहुंचीं, आगरा से लेकर मथुरा-वृंदावन तक हर तरफ एक ही स्वर गूंज उठा—‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।’ मंदिरों में घंटे-घड़ियाल बज उठे, शंखनाद हुआ और भक्तों ने हाथ उठाकर श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। घरों में भी कान्हा के जन्म की खुशियां मनाई गईं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे ब्रज में ऐसा माहौल रहा, मानो हर घर नंद बाबा का घर बन गया हो। मंदिरों में भगवान के जन्म का उल्लास था तो घरों में लड्डू गोपाल के जन्म और झूला झुलाने की तैयारियां। आगरा में भी बड़ी संख्या में परिवारों के घर शुक्रवार को किलकारियां गूंजीं। जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में जन्मे बच्चों को परिजनों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी का स्वरूप मानकर स्वागत किया।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आधी रात को जन्मे कान्हा
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर जन्मोत्सव का सबसे भव्य दृश्य देखने को मिला। जन्म के निर्धारित समय से पहले ही हजारों श्रद्धालु भगवान के जन्म के साक्षी बनने के लिए डटे रहे। रात 11:55 बजे पांच मिनट के लिए मंदिर के पट बंद किए गए। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर मंगल ध्वनियों से गूंज उठा। इसके बाद 12:05 बजे भगवान की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाया गया। भगवान को चांदी के कमल पर विराजमान कर पंचामृत से स्नान कराया गया। कान्हा को पंचरत्नी पीतांबरी पोशाक पहनाई गई। रत्न-जड़ित मुकुट और आकर्षक आभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया। जन्म के समय उज्जैन से आए डमरू और मृदंग वादकों ने मंगल ध्वनि और आनंद संकीर्तन से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
चांदी की कामधेनु से हुआ कान्हा का अभिषेक
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान का अभिषेक भी विशेष रहा। सोने से सजी चांदी की कामधेनु गाय के दूध से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। जन्माष्टमी के अवसर पर गर्भगृह को करीब 200 किलो चांदी और आकर्षक फूल-पत्तियों से सजाया गया था। रात करीब 12:45 बजे भगवान की प्रतिमा को दोबारा गर्भगृह में विराजमान किया गया। इसके बाद शयन आरती हुई और मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
ब्रज में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा-वृंदावन में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि बारिश भी भक्तों के कदम नहीं रोक सकी। जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन में 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालु कान्हा के रंग में रंगे नजर आए। कोई पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचा तो कोई भगवान के अलग-अलग स्वरूपों की पोशाक में नजर आया। कुछ श्रद्धालु भालू और बंदर की वेशभूषा में भी दिखाई दिए। हर तरफ एक ही जयघोष सुनाई देता रहा—‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।’
बांग्लादेश से आए दंपती की आंखों से छलके आंसू
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बांग्लादेश से पहुंचे दंपती तपन और जोली के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला रहा। पहली बार श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही दोनों भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। भगवान के जन्मोत्सव का हिस्सा बनने की खुशी में दोनों फूट-फूटकर रोने लगे।
आतिशबाजी से जगमगाया मथुरा
जन्माष्टमी पर मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी आतिशबाजी के साथ मनाई गई। रात में आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। वहीं वृंदावन के प्रियाकांत जू मंदिर को हजारों दीपों से सजाया गया। दीपों की रोशनी में पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा। ऐसा लगा मानो जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन में दीपावली उतर आई हो। भक्तों ने दीप जलाकर भगवान कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाईं।
करीब 350 परिवारों में गूंजी किलकारी
ब्रज की भक्ति से आगरा भी अछूता नहीं रहा। शुक्रवार को आगरा में करीब 350 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें कई परिवार ऐसे भी रहे, जिन्होंने जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की इच्छा को लेकर पहले से डॉक्टरों से संपर्क किया था और निर्धारित तारीख पर सिजेरियन डिलीवरी कराई। हालांकि बड़ी संख्या में बच्चों का जन्म सामान्य प्रसव से भी हुआ। संयोग से जन्माष्टमी के दिन जन्मे बच्चों को परिवारों ने भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद माना। कहीं बेटे के जन्म पर परिवार ने उसे कान्हा का स्वरूप माना तो कहीं बेटी को राधारानी का आशीर्वाद बताया। अस्पतालों से लेकर घरों तक बच्चों के जन्म पर मिठाइयां बांटी गईं और परिजनों ने खुशियां मनाईं।
लेडी लॉयल में 25, एसएन मेडिकल कॉलेज में 21 बच्चों ने लिया जन्म
लेडी लॉयल महिला अस्पताल की एसआईसी डॉ. पुष्पलता के अनुसार शुक्रवार को अस्पताल में करीब 25 बच्चों का जन्म हुआ। वहीं एसएन मेडिकल कॉलेज के गायनिक विभाग की एचओडी डॉ. शिखा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में करीब 21 बच्चों ने जन्म लिया। दोनों प्रमुख सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चों में लड़कों की संख्या अधिक रही। जन्माष्टमी के दिन बेटे के जन्म को परिजनों ने कान्हा के आगमन से जोड़कर देखा और कई परिवारों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। इसके अलावा आगरा के सीएचसी-पीएचसी और निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में प्रसव हुए। जन्माष्टमी के शुभ दिन बच्चे के जन्म की इच्छा रखने वाले कुछ परिवारों ने डॉक्टरों से पहले ही बातचीत कर डिलीवरी की तारीख तय कराई थी।
हर तरफ कृष्ण जन्म की खुशी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ब्रज में भक्ति और मातृत्व का अनोखा संगम देखने को मिला। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की परंपरा निभाई गई तो आगरा के अस्पतालों और घरों में नवजात बच्चों की किलकारियां गूंजीं। कहीं चांदी के कमल पर भगवान कृष्ण का अभिषेक हुआ तो कहीं अस्पताल के बेड पर जन्मे बच्चे को मां ने पहली बार गोद में लेकर कान्हा का रूप माना। कहीं मंदिरों में आधी रात को शंख-घंटे बजे तो कहीं घरों में बच्चे के जन्म की खुशी में मिठाइयां बांटी गईं। ब्रज की इस जन्माष्टमी में भगवान के जन्म का उत्सव सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं रहा—शुक्रवार की रात आगरा से मथुरा-वृंदावन तक ऐसा लगा, जैसे सचमुच हर घर नंद का घर बन गया हो और हर आंगन में अपना-अपना कान्हा जन्मा हो।