दयालबाग में गूंजा हुजूर स्वामीजी महाराज का जयघोष, आरती, भंडारा और कव्वाली से भक्तिमय हुआ फलबाग, जन्म दिवस पर शुबह-शाम कृषि सेवा के साथ हुए विशेष आयोजन, देश-विदेश की करीब 580 सतसंग शाखाओं में हुआ सजीव प्रसारण
दयालबाग (आगरा)। राधास्वामी मत के आद्य प्रवर्तक, संस्थापक एवं प्रथम संत सतगुरु परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज के पावन जन्म दिवस और जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को दयालबाग में श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। फलबाग में प्रातः और सायंकाल निर्धारित कृषि सेवा के साथ आरती, विशेष पाठ, पावन भंडारा, कव्वाली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ। देश-विदेश की विभिन्न अनुमत शाखाओं से बड़ी संख्या में सतसंगी भाई-बहन और बच्चे कार्यक्रम में शामिल हुए। पावन भंडारा कार्यक्रम का सजीव प्रसारण ई-कैस्केड के माध्यम से देश-विदेश की करीब 580 सतसंग शाखाओं में किया गया।

हुजूर स्वामी जी महाराज की जयंती पर मौजूद गुरु महाराज प्रो. पेम सरन सतसंगी और रानी साहिबा।
श्रद्धा से हुआ आयोजन का शुभारंभ
पावन अवसर पर सतसंगियों के बीच यह वंदना विशेष रूप से गूंजती रही—
“परम पुरुष पूरन धनी, राधास्वामी नाम।
तिनके चरण पदम पर, कोटि-कोटि प्रणाम॥”
भंडारा दिवस पर प्रातः एवं सायंकाल दोनों शिफ्टों में फलबाग में निर्धारित कृषि कार्य और सेवा का क्रम चला। इसके साथ ही दोनों समय अलग-अलग धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूरे फलबाग क्षेत्र में सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
गुरु महाराज और रानी साहिबा ने अर्पित की श्रद्धा
खेतों में पधारने के बाद सर्वप्रथम गुरु महाराज प्रोफेसर प्रेम सरन सतसंगी साहब और रानी साहिबा जी ने परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज तथा परम गुरु हुजूर डॉ. एम. बी. लाल साहब के पावन स्वरूपों के समक्ष माथा टेककर श्रद्धा अर्पित की।
इसके बाद निर्धारित कार्यक्रमों का क्रम आगे बढ़ा और बड़ी संख्या में मौजूद सतसंगी भाई-बहनों तथा बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विशेष पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
प्रातःकालीन आरती के अवसर पर तीन विशेष पाठ आयोजित किए गए। इनमें पहले पाठ में रानी साहिबा जी ने भी सहभागिता की। इसके साथ संत सुपरह्यूमन योजना के बच्चों ने दो आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम के निर्धारित क्रम में पीटी, आत्मरक्षा और सुरक्षा-सावधानियों से संबंधित प्रस्तुतियां भी हुईं। आरती के बाद सभी सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों को प्रसाद के रूप में इलायची दाना एवं मुरमुरे वितरित किए गए।
सायंकाल गूंजी विशेष कव्वाली
सायंकाल आयोजित पावन भंडारा कार्यक्रम में दो विशेष प्रस्तुतियां हुईं। इनमें एक विशेष पाठ और दूसरी विशेष कव्वाली रही। दोनों प्रस्तुतियों में रानी साहिबा जी की सहभागिता रही।
सतसंगी भाई-बहनों के समूह ने विशेष कव्वाली प्रस्तुत की—
“पन्नी गली से हुआ तुलू, सच्चे खुदा का आफताब…”
पावन जन्म दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह कव्वाली कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में रही और पूरे वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
कृषि सेवा में भी दिखी सक्रिय सहभागिता
पावन भंडारा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रातः एवं सायंकाल निर्धारित कृषि सेवा में भी बड़ी संख्या में सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों ने सक्रिय भागीदारी की। सेवा कार्य के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन पूरे आयोजन की विशेषता रहा।
देश-विदेश की विभिन्न अनुमत शाखाओं से पहुंचे सतसंगियों की मौजूदगी से फलबाग क्षेत्र में दिनभर श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
गुरु महाराज ने दृष्टि से किया भावविभोर
प्रातः एवं सायंकाल के कार्यक्रमों के बाद गुरु महाराज ईवी से अपने निवास की ओर प्रस्थान करते समय मार्ग में उपस्थित सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों को अपनी दृष्टि से भावविभोर करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष भाव और उत्साह दिखाई दिया।
580 शाखाओं में पहुंचा आयोजन का सजीव प्रसारण
दयालबाग में आयोजित पावन भंडारा कार्यक्रम का ई-कैस्केड के माध्यम से सजीव प्रसारण किया गया। इसके जरिए देश-विदेश की लगभग 580 सतसंग शाखाओं में बैठे सतसंगी भाई-बहनों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। इस प्रकार हुजूर स्वामीजी महाराज के पावन जन्म दिवस का आयोजन दयालबाग से निकलकर देश-विदेश की शाखाओं तक आध्यात्मिक भाव के साथ पहुंचा।