ट्रेनों में भजन गाने वाले सुनील लोधी की आवाज ने मचाई धूम, ‘हनुमान अंश’ से रातोंरात बने सितारा; अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने थामा हाथ
भोपाल। सागर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर तंबूरा बजाते हुए भजन गाने वाले दृष्टिबाधित लोकगायक सुनील लोधी की आवाज अब देशभर में पहचानी जाने लगी है। कभी गांव की चौपाल और धार्मिक आयोजनों में भजन गाने वाले सुनील को आर्थिक मजबूरी में ट्रेनों में भी अपनी आवाज का सहारा लेना पड़ा, लेकिन उनकी प्रतिभा ने आखिरकार उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचा दिया। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उनके गाए भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई...’ ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है।
सुनील की इस सफलता की जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची तो उन्होंने गुरुवार को उन्हें भोपाल स्थित समत्व भवन यानी मुख्यमंत्री निवास बुलाया। मुख्यमंत्री ने सुनील का भजन सुना, उनकी प्रतिभा की सराहना की और उन्हें तथा उनके माता-पिता को सम्मानित किया। साथ ही सुनील के लिए एक लाख रुपये की सम्मान निधि, संगीत शिक्षा में सहयोग और आंखों के इलाज के लिए हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की।
बचपन से आंखों में अंधेरा, आवाज बनी पहचान
करीब 25 वर्षीय सुनील लोधी सागर जिले के जैसीनगर विकासखंड के अगरा गांव के रहने वाले हैं। वह जन्म से दृष्टिबाधित हैं। उनका परिवार साधारण आर्थिक परिस्थितियों में जीवन यापन करता है। पिता के पास सीमित जमीन है और खेती तथा मवेशी पालन ही परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन रहा है।
आंखों की रोशनी न होने के बावजूद सुनील ने संगीत को अपनी ताकत बनाया। स्कूल के दिनों से ही वह भजन गाने लगे थे। शिक्षक उनसे भजन सुनते और गांव के लोग उनकी आवाज मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेते थे। धीरे-धीरे धार्मिक आयोजनों और भजन मंडलियों में उनकी मांग बढ़ने लगी। हाथ में तंबूरा और हनुमान भक्ति से भरा मन उनकी पहचान बन गया।
चौपाल से ट्रेनों तक जारी रहा सुरों का सफर
सुनील के लिए गायकी केवल शौक नहीं थी, बल्कि जीवन चलाने का जरिया भी थी। वह स्थानीय स्तर पर बुंदेली लोकगीत और भजन गाते रहे। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें ट्रेनों में भी भजन गाने पड़े। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
उनकी आवाज में बुंदेलखंड की मिट्टी की सहजता, लोकसंगीत की मिठास और भक्ति का भाव था। यही कारण रहा कि बिना किसी बड़े संगीत संयोजन के की गई उनकी साधारण रिकॉर्डिंग भी लोगों को पसंद आने लगी।
2019 में सोशल मीडिया ने खोला नया रास्ता
सुनील की जिंदगी को नई दिशा वर्ष 2019 में मिली। ‘बुंदेली दुनिया’ से जुड़े रोहित साहू ने उनकी प्रतिभा को सोशल मीडिया के मंच तक पहुंचाया। इसके बाद सुनील के बुंदेली गीतों और भजनों की रिकॉर्डिंग होने लगी। शुरुआती गीतों में ‘दूल्हा बन के आ गई’ जैसे लोकगीतों को लोगों ने पसंद किया, लेकिन ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ ने उनकी पहचान को एक अलग ऊंचाई दे दी।
इस भजन में सुनील की आवाज और तंबूरा की लय का बेहद सादा संयोजन था। इसके बावजूद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। अलग-अलग रिपोर्टों में इसके करीब 2.8 से 2.9 करोड़ से अधिक व्यूज बताए गए हैं। इसी के साथ सुनील की आवाज गांव की सीमाओं से निकलकर संगीत की बड़ी दुनिया तक पहुंचने लगी।
एक तस्वीर बनी फिल्मी दुनिया तक पहुंचने का जरिया
‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ की लोकप्रियता के बाद संगीत से जुड़े लोगों का ध्यान सुनील की ओर गया। इंदौर के पंकज वीआरके ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें रिकॉर्डिंग के लिए आगे बढ़ाया। सुनील इंदौर पहुंचे और इसके बाद मुंबई के साई बाबा स्टूडियो में कई भजनों की रिकॉर्डिंग हुई। इन्हीं में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भी शामिल था।
इसके बाद उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। मुंबई के वर्सोवा बीच पर सुनील और उनके साथी रोहित की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट हुई। फिल्म निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर इस तस्वीर पर पड़ी और उन्होंने सुनील से संपर्क किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें रात में ही स्टूडियो बुलाया गया।
सुनील होटल से स्टूडियो पहुंचे और वहां अपनी आवाज में भजन सुनाया। उनकी गायकी ने फिल्म की टीम को प्रभावित किया और ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ को फिल्म ‘हनुमान अंश’ के लिए चुन लिया गया।
रिकॉर्डिंग के समय नहीं पता था कि फिल्म में जाएगी आवाज
सुनील के लिए यह अनुभव किसी सपने से कम नहीं था। उन्होंने जिस भजन को अब तक पारंपरिक अंदाज में तंबूरा पर गाया था, वही फिल्म का हिस्सा बन गया। खास बात यह है कि सुनील को रिकॉर्डिंग के समय यह जानकारी तक नहीं थी कि उनके गाए भजन का इस्तेमाल फिल्म में किया जाएगा।
फिल्म में उनकी आवाज आने के बाद भजन सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। इंस्टाग्राम पर बड़ी संख्या में लोग इस पर रील बनाने लगे। देखते ही देखते सुनील की पहचान एक स्थानीय बुंदेली लोकगायक से निकलकर फिल्मी दुनिया में पहुंच गई।
‘हनुमान अंश’ से बढ़ी पहचान
नीम करौरी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। फिल्म के साथ सुनील का भजन भी दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना। शुरुआत में फिल्म को सीमित शो मिले, लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया के बाद इसकी चर्चा बढ़ती गई।
फिल्म की लोकप्रियता का लाभ सुनील को भी मिला। उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रण मिलने लगे और फिल्मी दुनिया से भी नए प्रस्ताव आने की चर्चा है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ‘हनुमान अंश’ के आगे आने वाले हिस्सों में सुनील की आवाज का इस्तेमाल किए जाने का वादा किया गया है।
मुख्यमंत्री निवास में सुनी गई वही भावपूर्ण आवाज
सुनील की सफलता की खबर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची तो उन्होंने उन्हें मुख्यमंत्री निवास में आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनील लोधी को एक लाख रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की। इसके साथ ही उनकी संगीत शिक्षा पूरी कराने में सहयोग का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री ने सुनील की आंखों के इलाज के लिए भी हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। उनकी आंखों की रोशनी लौटने की संभावनाओं के लिए आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। सरकार की ओर से सुनील को संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए भी सहयोग का भरोसा दिया गया है।
संघर्ष से सफलता तक पहुंची एक आवाज
सुनील लोधी की कहानी इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा को पहचान मिलने के लिए बड़े शहर या किसी बड़े संगीत घराने से जुड़ाव जरूरी नहीं है। सागर के अगरा गांव में तंबूरा लेकर भजन गाने वाला एक दृष्टिबाधित युवक अपनी आवाज के दम पर चौपाल और ट्रेनों से निकलकर इंदौर, मुंबई के स्टूडियो और फिर बड़े पर्दे तक पहुंच गया।
जिस आवाज को कभी राह चलते लोग मोबाइल में रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर साझा कर देते थे, वही आवाज आज ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच रही है। सुनील के लिए ‘हनुमान अंश’ महज एक फिल्म में गाने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष के बाद मिली वह पहचान है, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी है।