तीसरी बार आकाश आनंद पर गिरी मायावती की गाज, क्या बसपा में शुरू हो गया उत्तराधिकारी बदलने का खेल?, बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी से उठे सवाल

बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश आनंद को एक बार फिर बसपा की प्रमुख जिम्मेदारियों से दूर कर दिया है। इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन चुनाव से पहले हुई इस कार्रवाई ने आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और मायावती के उत्तराधिकारी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

Sep 4, 2026 - 14:51
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तीसरी बार आकाश आनंद पर गिरी मायावती की गाज, क्या बसपा में शुरू हो गया उत्तराधिकारी बदलने का खेल?, बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी से उठे सवाल
बसपा सुप्रीमो मायावती और उनके दोनों भतीजे आकाश आनंद एवं ईशान आनंद।

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे और पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर कर दिया है। गुरुवार को लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि आकाश आनंद को अभी और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। हालांकि मायावती ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आकाश आनंद की ऐसी कौन-सी अपरिपक्वता सामने आई, जिसके चलते उन्हें फिर से पार्टी की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का फैसला लेना पड़ा।

आकाश आनंद के खिलाफ यह मायावती का तीसरा बड़ा एक्शन है। इससे पहले उन्हें पार्टी के सभी पदों से हटाने के साथ ही बसपा से निष्कासित भी किया जा चुका है। इतना ही नहीं, उन्हें मायावती का उत्तराधिकारी बनाए जाने का फैसला भी वापस ले लिया गया था। कई महीनों बाद आकाश आनंद की पार्टी में वापसी हुई और उन्हें मायावती के बाद पार्टी में नंबर दो की हैसियत दी गई। इसके बाद वह सक्रिय रूप से संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में जुट गए थे।

इस बार फौरी तौर पर आकाश आनंद की ऐसी कोई बड़ी गलती सामने नहीं आई है, जिसे इस फैसले की वजह माना जा सके। हालांकि बसपा के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखने वालों का मानना है कि मामला उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा हो सकता है। माना जा रहा है कि आकाश आनंद अशोक सिद्धार्थ से उतनी दूरी बनाकर नहीं चल रहे, जितनी मायावती चाहती हैं।

अशोक सिद्धार्थ कभी मायावती के बेहद करीबी और प्रमुख सिपहसालारों में शामिल थे। मायावती ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा था। इसी भरोसे का एक बड़ा संकेत यह था कि आकाश आनंद का विवाह अशोक सिद्धार्थ की बेटी से हुआ। लेकिन रिश्तेदारी के बाद बसपा में नीतिगत मामलों में अशोक सिद्धार्थ के बढ़ते दखल की चर्चाएं सामने आईं तो मायावती को यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसी दौर में आकाश आनंद पर भी कार्रवाई हुई थी।

बाद में आकाश आनंद की पार्टी में वापसी के समय यह संदेश साफ था कि उन्हें अशोक सिद्धार्थ से राजनीतिक दूरी बनाए रखनी होगी। ऐसे में अगर अब मायावती को यह महसूस हो रहा है कि आकाश आनंद इस दूरी को उस स्तर पर कायम नहीं रख रहे हैं, जिसकी उनसे अपेक्षा थी, तो मौजूदा कार्रवाई की एक वजह यह भी हो सकती है। हालांकि यह अभी राजनीतिक अनुमान है और मायावती ने अपने फैसले की ऐसी कोई वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है।

मायावती का यह फैसला बसपा के भीतर ही कई लोगों के गले नहीं उतर रहा। वजह साफ है—उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और लगभग सभी प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे समय में बसपा को अपने सबसे प्रमुख युवा चेहरे को अधिकारविहीन करने के बजाय मैदान में उतारने की जरूरत थी। पार्टी पहले ही संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे में नेतृत्व के भीतर का यह असमंजस उसके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

दूसरी बड़ी चुनौती नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद की है। उनकी आजाद समाज पार्टी दलित समाज के बीच अपनी जमीन लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। खासकर दलित युवाओं के एक वर्ग में चंद्रशेखर की राजनीतिक सक्रियता और आक्रामक शैली आकर्षण पैदा कर रही है। यही वह चुनौती थी, जिसके जवाब के तौर पर आकाश आनंद को बसपा के युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया गया था।

लेकिन अब स्थिति उलट दिखाई दे रही है। आकाश आनंद को पहले पार्टी से निष्कासित किया गया, फिर उन्हें उत्तराधिकारी की भूमिका से हटाया गया और अब एक बार फिर पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया है। इससे न केवल उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि उनके भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। बार-बार होने वाली ऐसी कार्रवाई से कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह संदेश जा सकता है कि क्या मायावती स्वयं आकाश आनंद की नेतृत्व क्षमता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं?

सबसे बड़ा सवाल अब बसपा के उत्तराधिकार को लेकर है। मायावती की राजनीति में उत्तराधिकारी के तौर पर आकाश आनंद को स्थापित करने की प्रक्रिया जिस तरह आगे बढ़ी थी, उसमें उन्हें अचानक पीछे करना सामान्य संगठनात्मक बदलाव से कहीं बड़ा संकेत माना जा सकता है। और इसी बीच लखनऊ की बैठक में आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद की मौजूदगी ने चर्चाओं को और हवा दे दी।

ईशान आनंद पहली बार बसपा की किसी महत्वपूर्ण बैठक में नजर आए। मायावती ने बैठक में उनके बारे में कोई घोषणा या टिप्पणी नहीं की, इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्हें आकाश आनंद के विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा है। लेकिन राजनीति में संकेत भी अपने आप में मायने रखते हैं। सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मायावती अब आकाश आनंद के बजाय ईशान आनंद को भविष्य के लिए परख रही हैं?

फिलहाल इसका जवाब मायावती के पास है। लेकिन इतना जरूर है कि आकाश आनंद पर बार-बार होने वाली कार्रवाई ने बसपा में उत्तराधिकार के सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है। चुनावी मौसम में यह सिर्फ एक नेता को जिम्मेदारी से हटाने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इससे यह सवाल भी जुड़ गया है कि मायावती के बाद बसपा की कमान किसके हाथ में होगी और क्या आकाश आनंद अब भी उस दौड़ में सबसे आगे हैं?

SP_Singh AURGURU Editor