आगरा तेजाब कांड में पुलिस विवेचना पर अदालत में उठे सवाल, 13 महीने जेल में रहा कल्लू निर्दोष, अब रिजवान-फैजान पर चलेगा मुकदमा
आगरा। शाहगंज क्षेत्र के चर्चित तेजाब कांड में अदालत ने पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की दिशा बदल दी है। अदालत ने उस कल्लू को राहत दी है, जिसे इस मामले में आरोपी बनाकर 13 महीने जेल में रहना पड़ा था। सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने रिजवान और फैजान को प्रथम दृष्टया वास्तविक आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ नए सिरे से मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। दोनों को 15 सितंबर 2026 को धारा 326ए और 506 के तहत विचारण के लिए तलब किया गया है।
पत्नी, बेटी और बेटे पर फेंका था तेजाब
मामला मई 2022 का है। वादी असलम की पत्नी रेशमा, बेटी इल्मा और बेटे साहिल पर तेजाब फेंके जाने की घटना सामने आई थी। घटना के बाद पुलिस ने कल्लू नामक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना की और उसके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। कल्लू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और वह करीब 13 महीने जेल में रहा।
बिना पढ़वाए तहरीर पर हस्ताक्षर कराने का आरोप
वादी असलम का आरोप है कि घटना के समय वह घबराया हुआ था। इसी दौरान पुलिस और वास्तविक आरोपियों ने कथित रूप से बिना पढ़वाए उससे एक तहरीर पर हस्ताक्षर करा लिए। इसी तहरीर के आधार पर कल्लू को मामले में फंसा दिया गया। बाद की सुनवाई में वादी और पीड़ित पक्ष की ओर से घटना को लेकर अलग तथ्य सामने रखे गए।
गवाहों ने बताए रिजवान और फैजान के नाम
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों और पीड़ितों के बयानों में रिजवान और फैजान के नाम सामने आए। गवाहों ने अदालत में बताया कि तेजाब रिजवान और फैजान ने फेंका था। आरोप है कि विरोध करने पर दोनों ने चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी थी।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पारिवारिक विवाद और मकान खाली कराने की रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया था। इसी आधार पर वास्तविक आरोपियों को मुकदमे में शामिल करने की मांग की गई।
धारा 319 के तहत दाखिल हुआ प्रार्थना पत्र
वादी की ओर से अधिवक्ता नरेश पारस ने अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-1 में धारा 319 सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न न्यायिक आदेशों और कानूनी दृष्टांतों का हवाला देते हुए रिजवान और फैजान को आरोपी के रूप में तलब कर उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की। अधिवक्ता पारस ने कहा कि सतत कानूनी अध्ययन और मजबूत पैरवी के जरिए वास्तविक आरोपियों को न्यायालय के समक्ष लाने का प्रयास किया गया।
दूसरी ओर बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय आहूजा ने भी अदालत में अपने तर्क प्रस्तुत किए।
अदालत ने माना प्रथम दृष्टया मामला बनता है
अपर सत्र न्यायाधीश माननीय पुष्कर उपाध्याय की अदालत ने गवाहों के बयानों और पत्रावली का गहन अवलोकन किया। अदालत के समक्ष आए साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया रिजवान और फैजान के खिलाफ मामला बनता पाया गया। इसके बाद न्यायालय ने धारा 319 सीआरपीसी के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए दोनों को मुकदमे में तलब करने का आदेश दिया।
15 सितंबर को दोनों आरोपियों की पेशी
अदालत ने रिजवान और फैजान को धारा 326ए और 506 के तहत विचारण के लिए 15 सितंबर 2026 को तलब किया है। इसके साथ ही मामले में अब दोनों के खिलाफ नए सिरे से मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
13 महीने जेल में रहने वाले कल्लू के मामले ने बदली दिशा
इस आदेश से मामले की पूरी दिशा बदल गई है। जिस कल्लू के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था और जिसके विरुद्ध मुकदमा आगे बढ़ चुका था, उसके मामले में अब सामने आए तथ्यों ने पुलिस की प्रारंभिक विवेचना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वास्तविक आरोपियों को अदालत के समक्ष लाने की कोशिश सफल हुई है और इससे न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है।
हालांकि रिजवान और फैजान के खिलाफ आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं और उनके दोषी होने का अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।