'हनुमान अंश' की मुरीद हुईं कंगना रनौत,  नीम करौरी बाबा की कहानी देख बोलीं- ये सत्संग है,  देखने जाओ

कंगना रनौत ने हाल ही 'हनुमान अंश'देखी जो नीम करौरी बाबा की जिंदगी पर बनी है और वह इसकी फैन हो गई हैं। उन्होंने इस फिल्म को सत्संग बताया और सभी से इसे जाकर देखने की अपील की।

Sep 2, 2026 - 19:56
Sep 2, 2026 - 22:32
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'हनुमान अंश' की मुरीद हुईं कंगना रनौत,  नीम करौरी बाबा की कहानी देख बोलीं- ये सत्संग है,  देखने जाओ


मुंबई। एक्ट्रेस कंगना रनौत 'हनुमान अंश' की मुरीद हो गई हैं। उन्होंने इस फिल्म को एक सत्संग बताया और सभी से इसे देखने की अपील कर डाली। नीम करौरी बाबा पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर कमाई की जो सुनामी लेकर आई है, उसने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। फिल्म 26 दिनों में ही 2600% से अधिक मुनाफा कमाकर इस साल की सबसे ज्यादा मुनाफेदार फिल्म बन चुकी है और ₹50 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। दर्शक थिएटर्स में हाथ जोड़े फिल्म देख रहे हैं और 'सीता राम सीता राम' जप रहे हैं। अब कंगना भी इससे खासा प्रभावित हो गई हैं।

कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर नीम करौरी बाबा की एक तस्वीर शेयर की और साथ में लिखा, ''हनुमान अंश' एक फिल्म नहीं, बल्कि सत्संग है, जिसमें उन लोगों की छोटी-छोटी कहानियों को बड़ी खूबसूरती से पिरोया गया है, जिन्होंने नीम करौरी बाबा के साक्षात दर्शन किए, उनके साथ प्रत्यक्ष अनुभव रहे। अपनी थैरेपी स्किप करो और जाकर इस फिल्म को देखो।'
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कमाई की बात करें, तो ₹1.8-2 करोड़ के बजट में बनी 'हनुमान अंश' ने 26 दिनों में भारत में ₹54.13Cr करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है, और ₹63.82 Cr की ग्रॉस कमाई की है। सैकनिक के मुताबिक, फिल्म ने 26वें दिन 54.5% की बढ़त दिखाई और ₹8.50 करोड़ कमाए। 'हनुमान अंश' ने रिलीज होने पर कुल ₹10 लाख की ओपनिंग की थी, जिसके बाद इसने कभी ₹20 लाख, ₹30 लाख, ₹4 या ₹5 लाख रुपये ही कमाए। लेकिन 17वें दिन से इसने करोड़ों में कमाई शुरू कर दी। इसके शोज भी बढ़ा दिए गए। 24वें दिन 'हनुमान अंश' ने ₹12.75 करोड़ कमाकर हैरान कर दिया। इसने यश की 'टॉक्सिक' को भी पानी पिला दिया है।

नीम करौरी बाबा एक महान हिंदू संत थे। उन्हें हनुमान जी का साक्षात अवतार माना जाता है। वह एक आध्यात्मिक गुरु भी थे। उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा उर्फ लक्ष्मण दास था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में साल 1900 के आसपास का बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब नीम करौरी बाबा ट्रेन से सफर कर रहे थे, तो टिकट न होने पर टीटीई ने उन्हें यूपी के एक गांव के पास उतार दिया, जिसका नाम नीमकरली था। लेकिन फिर लाख कोशिशों के बावजूद ट्रेन आगे नहीं बढ़ पाई। फिर नीम करौरी बाबा को दोबारा जब ट्रेन में बैठा लिया गया, तभी वह आगे बढ़ी। तभी से लक्ष्मण दास जी का नाम नीम करौरी बाबा पड़ गया। उन्होंने साल 1964 में उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम आश्रम की स्थापना की थी, जहां आज दुनियाभर की हस्तियां दर्शन के लिए जाती हैं।