चुनावी ड्यूटी के बाद बड़ा अवसर: असम-बंगाल में तैनात अर्धसैनिक बलों से सीमा पर तुरंत अभेद्य फेंसिंग करा लेनी चाहिए
असम और बंगाल में चुनाव के लिए तैनात अर्धसैनिक बलों को एक माह अतिरिक्त रोककर अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर मजबूत फेंसिंग कराई जा सकती है। इससे कम लागत, तेज कार्य और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी, साथ ही घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
-डॊ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राजेश चौहान-
असम, बंगाल और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं लंबे समय से घुसपैठ, तस्करी और सुरक्षा चुनौतियों के कारण संवेदनशील रही हैं। ऐसे में बंगाल और असम में विधान सभा चुनाव के लिए बड़ी संख्या में तैनात अर्धसैनिक बल केवल सुरक्षा ड्यूटी तक सीमित न रहकर, यदि रणनीतिक रूप से उपयोग किए जाएं, तो सीमा सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को बहुत जल्द मजबूत करने का एक दुर्लभ अवसर बन सकता है।
वर्तमान समय में बंगाल और असम में चुनावी ड्यूटी के लिए भारी संख्या में अर्धसैनिक बल पहले से मौजूद हैं। इन बलों को चुनाव समाप्ति के बाद कम से कम एक माह तक वहीं रोका जाए और उनकी सहायता से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर मजबूत, प्रभावी और अभेद्य फेंसिंग का निर्माण तत्काल शुरू करा दिया जाना चाहिए। यह कदम न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि अतिरिक्त प्रशासनिक देरी और ठेकेदारी प्रक्रियाओं से भी मुक्ति दिला सकता है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता है- त्वरित क्रियान्वयन और कम लागत। यदि पारंपरिक ठेकेदारी व्यवस्था से हटकर, अर्धसैनिक बलों के श्रमदान और निगरानी में यह कार्य कराया जाए, तो गुणवत्ता पर सीधा नियंत्रण रहेगा और भ्रष्टाचार या लापरवाही की संभावना भी घटेगी। साथ ही, मौके पर पहले से मौजूद बलों के कारण निर्माण के दौरान सुरक्षा संबंधी जोखिम भी न्यूनतम रहेंगे।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि सरकार पहले से यह घोषणा कर दे कि इस कार्य से होने वाली बचत का एक हिस्सा अर्धसैनिक बलों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा, तो इससे बलों का मनोबल भी बढ़ेगा और कार्य में उनकी भागीदारी और प्रतिबद्धता भी सशक्त होगी।
इतिहास से सीख लेना भी जरूरी है। पंजाब में आई बाढ़ के कारण अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर लगी कई किलोमीटर लंबी फेंसिंग बह गई थी, जिसे समय रहते पुनर्निर्मित नहीं किया जा सका। ऐसी परिस्थितियां दोबारा न बनें, इसके लिए समय रहते ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
यह प्रस्ताव केवल एक प्रशासनिक सुझाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का व्यावहारिक और त्वरित समाधान है। सही योजना, इच्छाशक्ति और संसाधनों के समुचित उपयोग से सीमाओं को अभेद्य बनाया जा सकता है। यही समय है, जब इस दिशा में निर्णायक पहल की जाए।