बिहार में मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की ताजपोशी के बाद यूपी में केशव प्रसाद मौर्य की परवान चढ़ती उम्मीदों को झटका?

बिहार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने देश भर के कुशवाह समाज को बड़ा संदेश दिया है। हालांकि इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने की उम्मीदें पाले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर पड़ सकता है। जाहिर है कि भाजपा दो राज्यों में एक ही जाति से दो मुख्यमंत्री नहीं बनाने से बचेगी, क्योंकि ऐसा करने का गलत संदेश दूसरी पिछड़ी जातियों में जा सकता है। 

Apr 16, 2026 - 12:04
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बिहार में मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की ताजपोशी के बाद यूपी में केशव प्रसाद मौर्य की  परवान चढ़ती उम्मीदों को झटका?

-एसपी सिंह-

भारतीय राजनीति में जातीय संतुलन और सामाजिक समीकरण हमेशा सत्ता के केंद्र में रहे हैं। बिहार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने न सिर्फ सत्ता का नेतृत्व बदला है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक संदेश भी दिया है। कुशवाह (लव-कुश) समाज से आने वाले सम्राट चौधरी की ताजपोशी को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसका असर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी साफ दिखाई दे सकता है।

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से केशव प्रसाद मौर्य को पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया गया है। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने संगठन की कमान सौंपी थी और उनके नेतृत्व में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उस समय मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम भी प्रमुखता से उभरा, लेकिन अंततः योगी आदित्यनाथ ने बाजी मार ली।

इसके बाद पार्टी ने संतुलन साधते हुए केशव मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाया, ताकि पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व मजबूत बना रहे। हालांकि, मुख्यमंत्री न बन पाने की कसक समय-समय पर उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों में झलकती रही। पार्टी ने 2022 में उन्हें विधान सभा चुनाव के मैदान में उतारा, लेकिन हार के कारण केशव प्रसाद मौर्य के बढ़ते कद को झटका लगा था। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें फिर से डिप्टी सीएम बनाकर स्पष्ट संकेत दिया कि उनका राजनीतिक महत्व अब भी बरकरार है।

इसी पृष्ठभूमि में 2027 को लेकर केशव प्रसाद मौर्य की उम्मीदें आकार ले रही थीं। वे लगातार खुद को पिछड़ा वर्ग के सबसे प्रभावी नेता के रूप में स्थापित करने में जुटे थे। लेकिन अब बिहार में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से न केवल राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं, बल्कि केशव प्रसाद मौर्य की परवान चढ़ती उम्मीदों को भी झटका लगा है।

दरअसल, सम्राट चौधरी और केशव प्रसाद मौर्य दोनों ही कुशवाह समाज से आते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए दो बड़े राज्यों में एक ही जाति से मुख्यमंत्री बनाना राजनीतिक रूप से संतुलित नहीं माना जाएगा। पार्टी को अन्य पिछड़ी जातियों- जैसे निषाद, कुर्मी, लोध, बघेल आदि को भी साधना है। यही कारण है कि बिहार में लिया गया फैसला उत्तर प्रदेश की भविष्य की रणनीति को सीधे प्रभावित कर सकता है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि बीजेपी की राजनीति केवल व्यक्तियों के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि व्यापक सामाजिक समीकरणों और चुनावी गणित पर आधारित होती है। ऐसे में बिहार में कुशवाह समाज को मुख्यमंत्री पद देकर पार्टी ने एक तरह से उस वर्ग को संतुष्ट कर दिया है, जिससे उत्तर प्रदेश में उसी समाज के नेता के लिए शीर्ष पद की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं।

हालांकि राजनीति संभावनाओं का खेल है और परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती, लेकिन मौजूदा परिदृश्य में यह साफ दिखता है कि सम्राट चौधरी की ताजपोशी ने केशव प्रसाद मौर्य की मुख्यमंत्री बनने की राह को जटिल जरूर बना दिया है।

SP_Singh AURGURU Editor