सीबीएसई की दसवीं का रिजल्ट जारी,  नंबर नहीं,  सिर्फ ग्रेडिंग दी गई है

 सीबीएसई 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। स्टूडेंट्स अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से अपनी ऑनलाइन मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। मार्कशीट पर मार्क्स नहीं होंगे, सिर्फ ग्रेडिंग दी जाती। मार्कशीट डाउनलोड करने के बाद स्टूडेंट्स अपने सब्जेक्ट वाइज ग्रेड (ए1 से डी, ई) चेक कर सकते हैं।

Apr 15, 2026 - 21:34
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सीबीएसई की दसवीं का रिजल्ट जारी,  नंबर नहीं,  सिर्फ ग्रेडिंग दी गई है

नई दिल्ली।  सीबीएसई बोर्ड के 10वीं का रिजल्ट जारी हो गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस साल काफी पहले दसवीं के परिणाम घोषित किया है। पिछले साल 10वीं का रिजल्ट 13 मई को घोषित किया गया था, जबकि इस साल नतीजे 15 अप्रैल को जारी किए गए हैं। स्टूडेंट्स को यह पता होना चाहिए कि उनकी 10वीं मार्कशीट पर ए1 से ई तक ग्रेड कैसे मिलती है?

बहुत से लोगों का यही मानना है कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मार्कशीट में ग्रेड देता है। माना जाता है कि 91 से 100 नंबर पाने वालों को एI, 81 से 90 नंबर पाने वालों को ए2, 71 से 80 नंबर लाने पर बी1 और... 33 से 40 नंबर पर डी ग्रेड मिलता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। सीबीएसई इससे साफ इनकार करता है। सीबीएसई द्वारा जारी करिकुलम के अनुसार, 10वीं के ग्रेड मार्क्स की रेंज (जैसे 91 से 100, 81 से 90, वगैरह) के आधार पर तय नहीं किए जाते हैं।

सीबीएसई 10वीं ग्रेड देने के लिए 'रिलेटिव ग्रेडिंग' सिस्टम अपनाता है। सीबीएसई का मानना है कि यह 'एब्सोल्यूट ग्रेडिंग' के मुकाबले ज्यादा वैज्ञानिक तरीका है। 'एब्सोल्यूट ग्रेडिंग' में ग्रेड पहले से तय कट-ऑफ लेवल के आधार पर दिए जाते हैं। जैसे 91 से 100 नंबर पाने वालों को एI, 81 से 90 नंबर पाने वालों को ए2, 71 से 80 नंबर लाने पर बी1 आदि दिया जाता है।

लेकिन 'रिलेटिव ग्रेडिंग' सिस्टम में ग्रेड उस ग्रुप के आधार पर तय होते हैं जिसमें छात्र आते हैं, और यह छात्रों की रिलेटिव मेरिट पर आधारित होता है। ग्रेड हर विषय में अलग-अलग होते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उस विषय में कितने छात्र पास हुए हैं।

ज्यादातर लोगों को लगता है कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 91 से 100 नंबर के बीच लाने पर ए1 मिलता है। लेकिन सीबीएसई नहीं है। मान लीजिए कि अंग्रेजी के पेपर में लाखों स्टूडेंट्स बैठे थे। बोर्ड सबसे पहले उन सभी स्टूडेंट्स की लिस्ट तैयार करता है जो पास हुए हैं। इसके बाद उस लिस्ट को 8 बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। पास होने वाले कुल छात्रों में से टॉप 12.5% को ए1 ग्रेड मिलता है। इसके बाद वाले टॉप 12.5% स्टूडेंट्स ए2, अगले टॉप 12.5% स्टूडेंट्स को बी2 और यही मैथड सभी स्टूडेंट्स की मार्कशीट पर लागू किया जाता है।

एब्सोल्यूट ग्रेडिंग में स्टूडेंट्स के नंबर्स को आधार बनाया जाता है। अगर पेपर कठिन आया और नंबर हुए तो सभी की ग्रेड कम हो जाएगी। वहीं रिलेटिव ग्रेडिंग में स्टूडेंट्स की रैंक को आधार बनाया जाता है। अगर पेपर का लेवल डिफिकल्ट होता है तो सभी के नंबर कम होंगे, फिर भी टॉप स्टूडेंट्स को ए1 ग्रेड मिलेगा यानी इसका सीधा असर मार्कशीट पर देखने को नहीं मिलेगा।