टाइम के प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी, भारत के रणवीर कपूर और विकास खन्ना भी सूची में, बांग्लादेश और नेपाल के पीएम का भी नाम, पाक का कोई नहीं
टाइम मैगजीन की 2026 की '100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों' की सूची ने दक्षिण एशियाई राजनीति और वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद की एक नई तस्वीर पेश की है।
वाशिंगटन। हर साल दुनिया भर की नजरें टाइम मैगजीन की उस लिस्ट पर टिकी होती हैं, जो तय करती है कि पिछले एक साल में किन चेहरों ने मानवता और व्यवस्था पर सबसे गहरा असर डाला है। साल 2026 की इस सूची ने दक्षिण एशिया में सत्ता के बदलते समीकरणों और भारतीय प्रतिभा के वैश्विक दबदबे को फिर से साबित कर दिया है। पड़ोसी मुल्कों की नई लीडरशिप से लेकर बॉलीवुड और सिलिकॉन वैली तक, इस बार की लिस्ट कई मायनों में ऐतिहासिक और दिलचस्प है।
नेपाल की राजनीति में एक नया इतिहास रचने वाले बालेन शाह ने टाइम मैगजीन की 2026 की सूची में अपनी जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया है। मात्र 35 वर्ष की आयु में नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने वाले बालेन शाह को उनके साहसिक फैसलों और आम चुनावों में अपनी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के लिए यह सम्मान मिला है। दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब बालेन शाह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले 2023 में जब वे काठमांडू के मेयर थे, तब उन्हें 'टाइम 100 नेक्स्ट' की उभरते हुए नेताओं की सूची में शामिल किया गया था।
पड़ोसी देश बांग्लादेश के लिए भी यह सूची खुशियां लेकर आई है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री और बीएनपी नेता तारिक रहमान को टाइम ने 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है। करीब 17 साल तक लंदन में निर्वासन झेलने के बाद उनकी स्वदेश वापसी और फरवरी 2026 के चुनावों में मिली प्रचंड जीत ने उन्हें एक वैश्विक नायक के रूप में स्थापित किया है। टाइम ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा है, जो खंडित देश को एकजुट करने और चरमराई आर्थिक स्थिति को सुधारने की बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। युवाओं के लिए रोजगार और देश में लोकतांत्रिक स्थिरता लाना उनकी प्राथमिकता रही है, जिसे दुनिया ने सराहा है।
दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में पाकिस्तान के लिए यह रिपोर्ट निराशाजनक रही। साल 2026 की प्रतिष्ठित टाइम 100 सूची में पाकिस्तान के किसी भी राजनेता, अभिनेता या सामाजिक कार्यकर्ता का नाम शामिल नहीं है। जहां एक ओर भारत, नेपाल और बांग्लादेश के चेहरे दुनिया को दिशा दे रहे हैं, वहीं पाकिस्तान का इस वैश्विक लिस्ट से बाहर रहना वहां की राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता की ओर इशारा करता है।
भारत का जिक्र आते ही तकनीक का नाम सबसे ऊपर आता है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए इस सूची में स्थान दिया गया है। भारतीय-अमेरिकी पिचाई जिस तरह से वैश्विक तकनीक को नई दिशा दे रहे हैं, उसने उन्हें इस साल का सबसे प्रभावशाली चेहरा बनाया है। एआई की दौड़ में गूगल का नेतृत्व करना और उसे आम लोगों के लिए सुलभ बनाना पिचाई की बड़ी उपलब्धि मानी गई है। वे आज केवल एक कंपनी के प्रमुख नहीं बल्कि वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के नीति नियंता बन चुके हैं।
मनोरंजन के क्षेत्र में भारत का झंडा अभिनेता रणबीर कपूर ने बुलंद किया है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से इस साल वे एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने टाइम 100 की सूची में अपनी जगह बनाई है। उनकी फिल्मों की सफलता और उनके अभिनय की बारीकियों ने न केवल भारतीय दर्शकों को बल्कि अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों को भी प्रभावित किया है। टाइम ने उन्हें मनोरंजन जगत के एक ऐसे चेहरे के रूप में पेश किया है, जिसने भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप को वैश्विक मंच पर बड़ी ही मजबूती के साथ रखा है। रणबीर की इस उपलब्धि ने बॉलीवुड की सॉफ्ट पावर को एक बार फिर दुनिया के सामने साबित कर दिया है।
भारतीय-अमेरिकी सेलिब्रिटी शेफ विकास खन्ना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय संस्कृति और खान-पान का कोई सानी नहीं है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में विकास खन्ना का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय भोजन को एक नई पहचान और सम्मान दिलाया है। वे केवल एक शेफ नहीं हैं, बल्कि एक लेखक और फिल्म निर्माता के रूप में भी मानवीय संवेदनाओं को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। उनकी सामाजिक सेवा और खान-पान की कला के मिश्रण ने उन्हें इस प्रतिष्ठित सालाना सूची का हिस्सा बनाया है।
यूट्यूब के सीईओ नील मोहन का नाम इस सूची में शामिल होना डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव की पुष्टि करता है। भारतीय मूल के नील मोहन जिस तरह से दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म का संचालन कर रहे हैं, उसने सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। कंटेंट क्रिएटर्स की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने में उनकी भूमिका को टाइम ने विशेष रूप से रेखांकित किया है।