60 साल से बसे आशियानों पर संकट, बापू नगर के 200 से ज्यादा परिवारों को नोटिस
आगरा के खंदारी स्थित बापू नगर में सिंचाई विभाग के मकान खाली करने के नोटिस से 200 से ज्यादा परिवारों में दहशत है। विभाग का कहना है कि मकान नहर की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाए गए हैं, जबकि स्थानीय परिवारों का दावा है कि वे यहां 60 साल तक से रह रहे हैं और उनके पास हाउस टैक्स व बिजली कनेक्शन समेत दस्तावेज हैं। नोटिस के विरोध में महिलाएं धरने पर बैठ गई हैं। मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका है और सपा राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे।
सिंचाई विभाग ने नहर की जमीन पर अवैध कब्जे का हवाला दिया, नोटिस मिलते ही महिलाओं का धरना, बुलडोजर के डर से सहमे परिवार, आज रामजीलाल सुमन करेंगे मुलाकात
आगरा। खंदारी के बापू नगर में दशकों से अपने घरों में रह रहे 200 से ज्यादा परिवारों के सामने अब उजड़ने का संकट खड़ा हो गया है। सिंचाई विभाग की ओर से मकान खाली करने के नोटिस दिए जाने के बाद पूरे इलाके में खलबली मची हुई है। नोटिस हाथ में आते ही लोगों के बीच सबसे बड़ा डर यह है कि कहीं अगला कदम बुलडोजर कार्रवाई का न हो।
सिंचाई विभाग का दावा है कि बापू नगर में बने मकान विभाग की संपत्ति पर हैं और लोगों ने नहर की जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण कर लिया है। इसी आधार पर परिवारों को मकान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि वे एक-दो साल से नहीं, बल्कि कई दशकों से इसी जगह रह रहे हैं और उनके पास घर से जुड़े विभिन्न दस्तावेज भी मौजूद हैं। नोटिस के बाद बापू नगर में प्रशासन बनाम स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
नोटिस आया तो घरों के बाहर बैठ गईं महिलाएं
मकान खाली करने के नोटिस मिलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। कई महिलाएं अपने घरों के बाहर धरने पर बैठ गई हैं। लोगों का कहना है कि जिन मकानों में उन्होंने अपना पूरा जीवन गुजार दिया, उन्हें अचानक अवैध बताकर खाली करने का फरमान उनकी समझ से परे है। स्थानीय परिवारों का दावा है कि उनके घरों में वर्षों से बिजली के कनेक्शन हैं और नगर निगम को हाउस टैक्स भी जमा किया जाता रहा है। लोगों का कहना है कि यदि उनके मकान अवैध थे तो इतने वर्षों तक सरकारी विभागों की ओर से उन्हें रहने और कर जमा करने की प्रक्रिया कैसे चलती रही?
‘60 साल से रह रहे हैं, अब कहां जाएं?’
बापू नगर के कई परिवारों का कहना है कि वे करीब 60 वर्षों से यहां रह रहे हैं। पीढ़ियां इसी जगह बड़ी हुईं और बच्चों की पढ़ाई से लेकर बुजुर्गों के इलाज तक उनकी पूरी जिंदगी इसी मोहल्ले से जुड़ी है। अब मकान खाली करने के नोटिस ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि यदि मकान टूटते हैं तो उनके पास सिर छिपाने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को लेकर है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को कोई भी कार्रवाई करने से पहले उनके दस्तावेजों और वर्षों से चले आ रहे कब्जे की स्थिति की जांच करनी चाहिए और प्रभावित परिवारों की बात सुनी जानी चाहिए।
बुलडोजर के डर ने बढ़ाई बेचैनी
नोटिस मिलने के बाद इलाके में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर है। हालांकि फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन परिवारों को आशंका है कि नोटिस के बाद कभी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो सकती है। लोगों का कहना है कि एक साथ 200 से ज्यादा परिवारों के सामने घर बचाने का सवाल खड़ा हो गया है। ऐसे में यदि कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल मकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सैकड़ों लोगों के जीवन और रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ेगा।
अब राजनीति भी गरमाई, सपा ने संभाला मोर्चा
बापू नगर के परिवारों को मिले नोटिस के बाद मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। सपा प्रतिनिधिमंडल ने इलाके में पहुंचकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। सपा नेता सोमेश गुप्ता ने लोगों के साथ खड़े रहने और उनकी लड़ाई लड़ने का भरोसा दिया। वहीं, सपा के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन भी सोमवार शाम बापू नगर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे। वह लोगों की समस्याएं सुनने के साथ मामले को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
आमने-सामने हैं दो दावे
पूरे विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। सिंचाई विभाग का कहना है कि जमीन विभाग की है और उस पर अवैध कब्जा कर निर्माण किए गए हैं। वहीं स्थानीय परिवार अपने दशकों पुराने निवास और बिजली कनेक्शन व हाउस टैक्स जैसे दस्तावेजों का हवाला देकर कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अब असली सवाल जमीन के स्वामित्व और कब्जे की कानूनी स्थिति को लेकर है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पहले उनके दस्तावेजों की जांच करे और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
200 परिवारों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर
बापू नगर में फिलहाल हर परिवार की निगाह प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। लोग चाहते हैं कि दशकों से बसे परिवारों को अचानक बेघर करने के बजाय उनकी समस्या का मानवीय और कानूनी समाधान निकाला जाए। अब देखने वाली बात होगी कि सिंचाई विभाग नोटिस के बाद आगे क्या कार्रवाई करता है और सरकार 200 से ज्यादा परिवारों के आशियाने बचाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकालती है या नहीं। फिलहाल नोटिस ने बापू नगर के लोगों की नींद उड़ा दी है और पूरे इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है—‘60 साल से जिस घर को अपना माना, अब उसे छोड़कर जाएं तो जाएं कहां?’