पीएम मोदी ने कहा,  30 वर्षों के इतिहास से सबक लें,  महिला आरक्षण का विरोध किया तो महिलाएं माफ नहीं करेंगी,  परिसीमन पर राज्यों को दिया भरोसा

पीएम मोदी ने विपक्ष को चेताते हुए कहा कि पिछले 30 वर्षों के इतिहास से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया, उन्हें चुनावों में महिलाओं ने माफ नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में परिसीमन पर सदन को भरोसा दिलाया है कि वह इस बात की पूरी गारंटी देने के लिए तैयार हैं कि इस प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।

Apr 16, 2026 - 19:46
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पीएम मोदी ने कहा,  30 वर्षों के इतिहास से सबक लें,  महिला आरक्षण का विरोध किया तो महिलाएं माफ नहीं करेंगी,  परिसीमन पर राज्यों को दिया भरोसा


नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और सभी दलों से इसे खुले मन से समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो दल इसका विरोध कर रहे हैं,  इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण 25-30 साल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन अब यह अवसर मिला है तो इसे गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने इसे “आधी आबादी को उनका हक देने” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी सुप्रीमो का जिक्र करते हुए हल्के अंदाज़ में कहा कि वे उनके मित्र हैं और कभी-कभार उनकी मदद भी कर देते हैं। साथ ही उन्होंने धमेंद्र  यादव का भी आभार जताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद में चल रहा यह मंथन देश की राजनीतिक दिशा और दशा दोनों तय करेगा। इससे जो “अमृत” निकलेगा, वह भारत के भविष्य को आकार देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के बीच यह जरूरी है कि 50% आबादी को नीति निर्धारण में बराबरी का मौका मिले।

पीएम मोदी ने विपक्ष को चेताते हुए कहा कि पिछले 30 वर्षों के इतिहास से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया, उन्हें चुनावों में महिलाओं ने माफ नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए संविधान सर्वोपरि है और इसी संविधान की ताकत है कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति देश की सर्वोच्च जिम्मेदारी निभा सकता है।

अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इस बार भी महिला आरक्षण लागू नहीं हो पाया, तो देश की माताओं और बहनों को जवाब देना मुश्किल होगा। इसलिए सभी सांसदों को इस ऐतिहासिक अवसर को नहीं गंवाना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिलाने के लिए राज्यों को हर तरह से भरोसा दिलाने की कोशिश की है। पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा है कि वह वादा करते हैं कि परिसीमन को लेकर होने वाले निर्णय प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाए गए विधेयकों पर अपने संबोधन में बहुत ही दमदार तरीके से अपनी सरकार का पक्ष रखा है और सभी सांसदों को यकीन दिलाया है कि वह इसका श्रेय लेने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही किसी के साथ भेदभाव होने देंगे।

पीएम मोदी ने कहा, "इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं...ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी। ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी..भूतकाल से जो परिसीमन का अनुपात चला आ रहा है, उस अनुपात में भी कोई बदलवा नहीं होगा।"

अगर गारंटी शब्द चाहिए तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं। क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है।

पीएम मोदी ने संसद में साफ तौर पर कहा कि वह चाहते हैं कि महिलाओं को उनका हक मिले और वह इसका क्रेडिट भी नहीं चाहते। यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है,  इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी को कोई राजनीतिक फायदा नहीं होगा....हमें क्रेडिट नहीं चाहिए।

हम अहंकार में न रहें कि नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं...यह उनका हक है। हमने कई दशकों से इसे रोका है, इसे पारित कराना पाप से प्रायश्चित कर पाप मुक्ति का अवसर है। आज देश जो प्रगति कर रहा है, उनमें पंचायतों, शहरी निकायों में काम करने वाली महिलाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान है, इस ऋण को हमें स्वीकार करना चाहिए।