तेहरान से सीधे अमेरिका जाएंगे मुनीर,  ट्रंप को देंगे ईरान का संदेश,  अमेरिका ने कहा- ईरान से वार्ता प्रोडक्टिव

अमेरिका-ईरान के बीच ठप पड़ी वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे हैं। वह ईरानी नेतृत्व से बातचीत कर रहे हैं।

Apr 16, 2026 - 20:05
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तेहरान से सीधे अमेरिका जाएंगे मुनीर,  ट्रंप को देंगे ईरान का संदेश,  अमेरिका ने कहा- ईरान से वार्ता प्रोडक्टिव

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच ठप पड़ी शांति वार्ता को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान पहुंच गए हैं, जहां वह ईरानी नेतृत्व से अहम बातचीत कर रहे हैं। यहां से वह सीधे अमेरिका जाएंगे। 

उनके साथ पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं, जो इस कूटनीतिक मिशन की अहमियत को दिखाता है। इस्लामाबाद में हुई पिछली वार्ता के फेल होने के बाद यह पहली बड़ी पहल मानी जा रही है। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ईरान को अमेरिका के ‘फाइनल और बेस्ट ऑफर’ के करीब लाने की कोशिश करेगा। हालांकि यह आसान नहीं दिख रहा, क्योंकि ईरान पहले ही कह चुका है कि उसकी तरफ से कोई नया प्रस्ताव नहीं आया है। सबसे बड़ा अड़ंगा यूरेनियम एनरिचमेंट का मुद्दा बना हुआ है, जिस पर दोनों देशों के बीच गहरी खाई है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरी दौर की बातचीत फिर से पाकिस्तान में ही हो सकती है। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा कि बातचीत ‘प्रोडक्टिव’ है और पाकिस्तान ही इस पूरे संवाद का मुख्य मध्यस्थ बना रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि अगले कुछ दिनों में बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि यह बातचीत जल्द आगे बढ़ सकती है। इधर, खाड़ी क्षेत्र में भी कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सऊदी अरब, कतर और तुर्की के दौरे पर हैं। ये सभी देश इस संघर्ष से सीधे प्रभावित हुए हैं और स्थायी शांति चाहते हैं।

हालांकि, दूसरी तरफ अमेरिका ने दबाव की रणनीति भी जारी रखी है। अमेरिका ने रूस और ईरान के तेल पर दी गई छूट खत्म करने का फैसला लिया है। इससे वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ सकता है और भारत जैसे देशों को भी झटका लग सकता है, जिन्होंने इस छूट के दौरान बड़ी मात्रा में तेल खरीदा था। विशेषज्ञ मानते हैं कि एक तरफ बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ आर्थिक दबाव और सैन्य रणनीति भी जारी है। यही ‘डुअल स्ट्रैटेजी’ इस पूरे संकट को और जटिल बना रही है।

ब्रिटेन के मध्य पूर्व मंत्री हामिश फाल्कोनर ने लेबनान में जारी हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए पुरजोर मांग की है कि वहां ‘तुरंत संघर्षविराम’ होना चाहिए। उन्होंने इजरायल और लेबनान के बीच शुरू हुई सीधी बातचीत का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि यह युद्ध लेबनान की अपनी मर्जी से शुरू नहीं हुआ है, बल्कि इसका खामियाजा वहां के बेगुनाह नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। फाल्कोनर ने लेबनान पर हो रहे हमलों को बेहद भयावह बताते हुए कहा है कि नागरिक आबादी पर इसके विनाशकारी प्रभाव पड़ रहे हैं, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ब्रिटिश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय लेबनान को इस महायुद्ध की आग से बचाने के लिए एकजुट हो रहा है और वाशिंगटन में इजरायल व लेबनान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज है।