ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में उद्योगों को अनुमति देने में जल्दबाज़ी न हो।

ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (टीटीजेड) में उद्योगों को अनुमति देने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक और निष्पक्ष आकलन आवश्यक है। आगरा में लगातार बढ़ते वाहन, वायु प्रदूषण, सूखती यमुना, घटती हरियाली और बढ़ती धूल पहले ही ताजमहल एवं जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केवल सीमित और गैर-प्रदूषणकारी एमएसएमई आवेदनों पर विशेषज्ञों की निगरानी में विचार की अनुमति दी है, इसे व्यापक औद्योगिक छूट नहीं माना जाना चाहिए। लेख में सुझाव दिया गया है कि टीटीजेड में केवल स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योगों को ही कड़ी जांच के बाद अनुमति मिले तथा यमुना पुनर्जीवन, वृक्षारोपण, धूल नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि ताजमहल और क्षेत्र का पर्यावरण सुरक्षित रह सके।

Aug 1, 2026 - 20:25
 0
ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में उद्योगों को अनुमति देने में जल्दबाज़ी न हो।

-बृज खंडेलवाल-

क्या हम ताजमहल को बचा रहे हैं, या धीरे-धीरे उसे धूल, धुंध और धुएँ में दफ़न कर रहे हैं?

आगरा की हवा साल के अधिकांश दिनों में ज़हरीली रहती है। हर दिन उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम गुजरने वाले हज़ारों ट्रक, डंपर, बसें और भारी वाहन शहर की साँसों पर नया बोझ डालते हैं। यमुना और सहायक नदियाँ सूख रही हैं, तालाब और झीलें गायब हो चुकी हैं, पेड़ों की हरियाली घट रही है और सड़कों पर बेकाबू ट्रैफिक दम घोंट रहा है। ऐसे हालात में ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में नए उद्योगों की अनुमति देने से पहले हर फ़ायदे और संभावित नुक़सान का गहरा, वैज्ञानिक आकलन ज़रूरी है। आज का छोटा फ़ैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी पर्यावरणीय त्रासदी बन सकता है।

ताज ट्रिपेजियम जोन (लगभग 10,400 वर्ग किमी) में 1990 के दशक से वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 1990 के आसपास आगरा क्षेत्र में लगभग 1.9–2.1 लाख वाहन थे; 2026 के मध्य तक निजी वाहन लगभग 8.5 लाख पहुँच गए हैं (आरटीओ का कुल आँकड़ा करीब 16.9 लाख)। यह 35 वर्षों में 4–8 गुना वृद्धि है।

स्थानीय वाहनों की यह वृद्धि पारगमन यातायात से और बढ़ जाती है। आगरा यमुना एक्सप्रेसवे (रोज़ाना 50,000 से अधिक वाहन) और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भारी यातायात है। राष्ट्रीय राजमार्गों से भी हज़ारों ट्रक और बसें गुज़रती हैं। स्थानीय और पारगमन यातायात से वाहन-किलोमीटर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के हालिया प्रयास कमजोर पड़े हैं। अध्ययन और आधिकारिक आकलन बार-बार वाहनों को TTZ की हवा की गुणवत्ता की समस्या का प्रमुख कारण बताते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के पूर्ण प्रतिबंध में कुछ राहत देते हुए TTZ में लगभग 400 लंबित गैर-प्रदूषणकारी एमएसएमई आवेदनों पर विचार करने की अनुमति दी है। इसे उद्योगों के लिए खुला निमंत्रण नहीं समझना चाहिए। अदालत ने रोज़गार और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का निर्देश दिया; हर आवेदन को NEERI और CEC के विशेषज्ञों की सहमति से मंज़ूरी लेनी होगी और विवाद में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगी। भविष्य में किसी भी ढील को बेहद एहतियात के साथ ही देना चाहिए। क्षेत्र की हवा अभी भी चिंताजनक है और खतरे टले नहीं हैं।

1996 में सुप्रीम कोर्ट ने कोयला/कोक से चलने वाले सैकड़ों उद्योगों को प्राकृतिक गैस अपनाने या बंद करने का आदेश दिया था। तब SO₂ का स्तर 17–22 µg/m³ और SPM 400–750 µg/m³ तक था। आदेश से SO₂ घटकर 4–10 µg/m³ रह गया और NO₂ भी कम हुआ, जिससे ताजमहल को पहुंचने वाले नुकसान में राहत मिली।

फिर भी पूरा चित्र तसल्लीबख़्श नहीं है। बारीक धूल-कण अभी भी बहुत अधिक हैं। PM₁₀ कई स्थानों पर 120–180 µg/m³ या अधिक दर्ज होता है; संवेदनशील क्षेत्रों की सीमा 60 है। PM₂.₅ का वार्षिक औसत अक्सर 80–100 µg/m³ रहता है। सर्दियों में स्थिति और ख़राब होती है। मानसून में वायु गुणवत्ता कभी-कभी सामान्य रहेती है, पर सर्दियों में अक्सर "खराब" या "गंभीर" श्रेणी में पहुँच जाती है। यही धूल ताजमहल पर जमती है और लोगों की सेहत पर बुरा असर डालती है। पिछले तीन दशकों में सुधार हुआ है, पर मंज़िल दूर है।

प्रदूषण का कारण सिर्फ़ उद्योग नहीं है। यमुना लगभग सूख चुकी और प्रदूषित है; नदी अब वह नमी और ठंडक नहीं देती जो कभी आसपास का प्राकृतिक वातावरण बनाए रखती थी। मिट्टी कटाव बढ़ रहा है, हरियाली घट रही है; कुछ हिस्सों में हरित क्षेत्र लगभग 7 प्रतिशत रह गया है। पेड़ों की कमी से धूल नियंत्रित नहीं हो पाती। सड़कों की धूल, निर्माण, छोटे उद्योग, वाहनों का धुआँ और पराली/बायोमास जलाने का धुँआ भी संकट बढ़ा रहे हैं।

इन हालात में TTZ को और खोलना, चाहे उद्योग "गैर-प्रदूषणकारी" ही क्यों न हों, सुरक्षित नहीं है। क्षेत्र की पर्यावरणीय वहन क्षमता का पूर्ण अध्ययन नहीं हुआ है और विज़न डॉक्यूमेंट लंबित है। एक बार उद्योग लग जाने के बाद नियमों का सख़्ती से पालन कराना मुश्किल रहा है। नए उद्योगों से यातायात, निर्माण और ऊर्जा मांग बढ़ेगी, जिससे अब तक मिले लाभ कमजोर पड़ सकते हैं।

इसलिए आगे बढ़ने का रास्ता सोच-समझकर तय किया जाना चाहिए। केवल उन्हीं व्हाइट और ग्रीन श्रेणी के एमएसएमई को अनुमति मिलनी चाहिए जो बिजली या प्राकृतिक गैस का उपयोग करें और जिनकी हर आवेदन पर विशेषज्ञों द्वारा गहराई से जाँच हो। प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए।

साथ ही यमुना में स्वच्छ जल बहाल करना, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, मिट्टी संरक्षण, सड़कों व वाहनों पर कड़ा नियंत्रण और वायु गुणवत्ता की निगरानी व रिपोर्टिंग भी ज़रूरी हैं। जब तक धूल-कणों का स्तर स्पष्ट रूप से घटकर क्षेत्र की पर्यावरणीय क्षमता मज़बूत न हो जाए, उद्योगों को और छूट नहीं दी जानी चाहिए।

ताजमहल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण की सेहत का आईना है। 1996 के सख्त नियमों ने प्रदूषण घटाने में सिद्ध किया था।

SP_Singh AURGURU Editor