पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी पर भड़कीं कंगना, कहा - ऐसी भाषा स्वीकार नहीं, विरोध की भी मर्यादा होती है

बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि विरोध की भी एक मर्यादा होती है।

Jul 28, 2026 - 21:55
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पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी पर भड़कीं कंगना, कहा - ऐसी भाषा स्वीकार नहीं, विरोध की भी मर्यादा होती है


नई दिल्ली। बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश के 75 वर्षीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया गया और उनकी दिवंगत मां के लिए भी बेहद अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी आंदोलन में व्यक्तिगत हमले और परिवार के दिवंगत सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां किसी भी तरह स्वीकार नहीं की जा सकतीं। कंगना ने कहा कि एक सभ्य समाज में इस तरह की भाषा की कोई जगह नहीं है।
कंगना रनौत ने कहा कि यदि आंदोलन में शामिल लोग खुद को छात्र बताते हैं, तो उनका व्यवहार और भाषा उस पहचान से बिल्कुल मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा, 'हमने भी अपने समय में छात्र आंदोलनों में हिस्सा लिया है, लेकिन इस तरह की अश्लील भाषा और व्यक्तिगत हमले कभी नहीं देखे। आखिर ये कैसे छात्र हैं और इनकी भाषा इतनी अभद्र क्यों है?' उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की पहचान उसकी मर्यादा और उसके मुद्दों से होनी चाहिए, न कि गाली-गलौज से।
बीजेपी सांसद ने आंदोलन में शामिल युवाओं के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में इन लोगों को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों या कानूनी सहायता की जरूरत पड़ी, तो क्या उनके माता-पिता उसका खर्च उठा पाएंगे? कंगना ने कहा कि अधिकांश युवाओं के पास स्वयं इतने संसाधन नहीं होते कि वे ऐसे कानूनी खर्च वहन कर सकें। इसलिए उन्हें अपने भविष्य और अपने आचरण, दोनों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।
कंगना रनौत ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने 16 साल की उम्र से ही अपना करियर बनाना शुरू कर दिया था और कभी अपने माता-पिता पर बोझ नहीं बनीं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगानी चाहिए और अपने जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता ही युवाओं की सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए।
अपने बयान के अंत में कंगना रनौत ने कहा कि एक समाज के रूप में इस तरह की अभद्र भाषा, व्यक्तिगत हमलों और सार्वजनिक जीवन में गिरते संवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है। यदि विरोध की भाषा गरिमा खो दे, तो वह समाज और लोकतंत्र दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाती है।