ब्रिक्स करेंसी पर ईरान का बड़ा प्रस्ताव, पीएम मोदी, पुतिन की मौजूदगी में पेजेश्कियान ने उठाए सवाल
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने करेंसी के लिए सिस्टम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सवाल किया कि दुनिया के सामने अभी जो चुनौतियां हैं, उस पर ब्रिक्स का रुख क्या है।
नई दिल्ली। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि आज दुनिया अपने सबसे जटिल दौर से गुज़र रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने उस आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है, जिसमें देश काम करते हैं। सवाल यह है कि इन चुनौतियों के प्रति ब्रिक्स का क्या रुख है? ईरान के राष्ट्रपति ने यह बात तब कही है, जब डॉलर से मुकाबले के लिए ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देने की वकालत की जा रही है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि इस सम्मेलन के शानदार मेजबानी के लिए भारत सरकार और जनता का, और साथ ही ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारत के प्रधानमंत्री के बहुमूल्य प्रयासों का दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं। मेरे लिए यह बहुत संतोष की बात है कि आज मैं प्राइवेट सेक्टर, बिजनेस कंपनियों और उद्यमियों के प्रतिनिधियों के बीच मौजूद हूं, जो ब्रिक्स के भीतर सहयोग के विचार को ठोस आर्थिक हकीकत में बदल सकते हैं।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया अपने सबसे जटिल दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने उस आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है जिसमें देश काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि इन चुनौतियों के प्रति ब्रिक्स का क्या रुख है? हमारा मानना है कि ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार तक ही सीमित नहीं है। बल्कि, यह तब और ज़्यादा स्पष्ट होती है जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के नेटवर्क में बदला जाता है, यानी संभावित सहयोग से व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ना।
ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम के लीडर्स सेशन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि सबसे जरूरी कदमों में से एक है सदस्यों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाना। इस कदम के साथ-साथ मुद्रा से जुड़े जोखिमों और आपसी लेन-देन के निपटान के लिए जरूरी सिस्टम भी बनाना होगा।
मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि चूंकि मौजूदा फाइनेंशियल सिस्टम कुछ ही मुद्राओं पर निर्भर होने के कारण राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है, इसलिए व्यापार सहयोग को असल निवेश में बदलने के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक को सदस्य देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा के लिए फाइनेंसिंग का मुख्य जरिया बनना होगा। इसके लिए खास क्रेडिट लाइन, स्थानीय मुद्राओं में फाइनेंसिंग और प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करने के लिए गारंटी जैसे साधनों का इस्तेमाल करना होगा।