शाम सात बजे के बाद खाना बंद? कोच राजन ने खोली डाइट के मिथकों की पोल, बोले- शरीर में कोई अलार्म नहीं बजता
आगरा। वजन घटाने के नाम पर शाम सात बजे के बाद खाना छोड़ देना, तराजू पर बढ़ा हर किलो फैट समझ लेना और ‘हेल्दी’ मानकर मुट्ठी भर नट्स खा जाना—डाइट और फिटनेस से जुड़े ऐसे कई प्रचलित मिथकों पर शुक्रवार को होटल होलीडे इन में आयोजित ‘स्पाइसी शुगर की अदालत’ में खुलकर चर्चा हुई। स्पाइसी शुगर संस्था के कार्यक्रम में प्रसिद्ध डाइट कोच एवं फिटनेस इन्फ्लुएंसर कोच राजन ने खानपान और वजन घटाने से जुड़े सवालों के व्यावहारिक जवाब दिए और सोशल मीडिया पर चल रही कई धारणाओं की पोल खोली।
संस्था की संस्थापक अध्यक्ष पूनम सचदेवा ने डाइट से जुड़े सवाल किए, जबकि संस्था के सदस्यों ने भी खानपान और फिटनेस से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं कोच राजन के सामने रखीं। कोच राजन ने कहा कि शरीर में ऐसा कोई अलार्म नहीं लगा होता, जो शाम 7:01 बजे बजकर भोजन को फैट के रूप में जमा करना शुरू कर दे।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की दिनचर्या अलग होती है। किसी का काम सुबह शुरू होता है तो किसी का देर रात। दिल्ली-गुरुग्राम जैसे शहरों में नौकरी या व्यवसाय करने वाले लोगों को घर पहुंचने में ही काफी समय लग जाता है। ऐसे में सभी को शाम सात बजे डिनर करने की सलाह व्यावहारिक नहीं है। वजन घटाने में खाने के समय के बजाय पूरे दिन में कितना और क्या खाया जा रहा है तथा कुल कैलोरी सेवन अधिक महत्वपूर्ण है। रात 10 बजे भोजन करने वाला व्यक्ति भी वजन कम कर सकता है, बशर्ते वह अपनी कुल कैलोरी जरूरत और संतुलित खानपान बनाए रखे।
तराजू पर बढ़ा हर किलो फैट नहीं
वजन मशीन पर एक-दो किलो वजन बढ़ते ही परेशान होने वालों को कोच राजन ने समझाया कि तराजू पर बढ़ा हर किलो फैट नहीं होता। कई बार यह वॉटर वेट हो सकता है। भोजन, शरीर में पानी की मात्रा और पीरियड्स के आसपास होने वाले बदलावों के कारण वजन अस्थायी रूप से ऊपर-नीचे हो सकता है। इसलिए एक दिन के आंकड़े देखकर पूरी डाइट बदलने या तनाव लेने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने वजन घटाने की प्रक्रिया को व्यवसाय से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह दुकान या फैक्ट्री में कभी बड़ा ऑर्डर मिलने पर खुशी होती है और कभी काम कम होने पर स्थिति सामान्य रहती है, उसी तरह वजन में भी उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। रास्ता सही हो और प्रयास लगातार जारी रहें तो अंतिम परिणाम अच्छा आएगा।
आलू परांठा दुश्मन नहीं, मात्रा का रखें हिसाब
घर के खाने और पसंदीदा व्यंजनों को लेकर भी कोच राजन ने लोगों को राहत दी। उन्होंने कहा कि वजन घटाने के लिए हर पसंदीदा चीज को जिंदगी से बाहर करना जरूरी नहीं है। घर का खाना खाते हुए भी फिटनेस लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आलू परांठे जैसे भोजन में मुख्य बात उसकी मात्रा और पूरे दिन के भोजन का संतुलन है।
मिठाई छोटी, कैलोरी का हिसाब बड़ा
बेसन की बर्फी, गुलाब जामुन और अन्य मिठाइयों को लेकर पूछे गए सवालों पर कोच राजन ने कहा कि मिठाई का आकार देखकर ही उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, उसमें मौजूद कैलोरी भी समझनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक मिठाई का पीस कई बार करीब एक रोटी जितनी कैलोरी दे सकता है, जबकि गुलाब जामुन में लगभग 150 से 200 कैलोरी तक हो सकती हैं। इसलिए मिठाई खाते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
हेल्दी नट्स भी ज्यादा हुए तो बढ़ेगी कैलोरी
नट्स और सीड्स को लेकर उन्होंने कहा कि नट्स हेल्दी जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें जितना चाहें उतना खाया जाए। इनमें कैलोरी काफी अधिक होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बाजार में मिलने वाला 250 ग्राम का नट्स पैक करीब 1250 कैलोरी तक का हो सकता है। फैट लॉस के दौरान इसकी मात्रा नियंत्रित रखते हुए लगभग 15-20 ग्राम तक की मात्रा को ध्यान में रखा जा सकता है।
फिटनेस सात दिन का प्रोजेक्ट नहीं
कोच राजन ने कहा कि वजन मशीन पर घटता हुआ आंकड़ा मोटिवेशन देता है, लेकिन किसी दिन वजन बढ़ा हुआ दिखाई दे तो इसे असफलता नहीं मानना चाहिए। सही डाइट, नियमितता और धैर्य के साथ चलने पर अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। फिटनेस कोई सात दिन का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव की प्रक्रिया है।
कार्यक्रम में पावनी सचदेवा, चांदनी ग्रोवर, सिमरन अवटानी और शिखा जैन ने सभी का स्वागत किया। संस्था के सदस्यों ने डाइट और खानपान से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका कोच राजन ने व्यावहारिक तरीके से जवाब दिया।