भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष की मां समेत तीन पर एडीए का मुकदमा, अधिग्रहित जमीन की बिक्री का आरोप
आगरा के मौजा मोहम्मदपुर में अधिग्रहित जमीन की बिक्री के आरोप में एडीए ने भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष की मां ऊषा महाजन समेत प्रेम सिंह और सुशील कुमार गोयल के खिलाफ कोर्ट में सिविल सूट दायर किया है। मामला खसरा नंबर 261 स्थित प्लॉट नंबर 5 से जुड़ा है, जिसका क्षेत्रफल 200 वर्ग गज यानी 167.22 वर्ग मीटर है। एडीए ने कथित बिक्री को लेकर न्यायालय में कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
मोहम्मदपुर में 200 वर्ग गज के प्लॉट को लेकर कार्रवाई, खसरा नंबर 261 की संपत्ति पर एडीए ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने अधिग्रहित भूमि की बिक्री किए जाने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ अदालत में सिविल सूट दायर किया है। मामला मौजा मोहम्मदपुर, तहसील एवं जिला आगरा स्थित एक भूखंड से जुड़ा है। कार्रवाई में भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष की मां ऊषा महाजन समेत प्रेम सिंह और सुशील कुमार गोयल के नाम सामने आए हैं।
एडीए के मुताबिक विवादित संपत्ति खसरा नंबर 261 में स्थित प्लॉट नंबर 5 है। इस भूखंड का क्षेत्रफल 200 वर्ग गज, यानी करीब 167.22 वर्ग मीटर बताया गया है। प्राधिकरण का आरोप है कि संबंधित भूमि अधिग्रहण के दायरे में आने के बावजूद उसकी बिक्री का प्रयास/लेनदेन किया गया।
अधिग्रहित जमीन की बिक्री को लेकर विवाद
मोहम्मदपुर की इस संपत्ति को लेकर एडीए और संबंधित पक्षों के बीच विवाद खड़ा हुआ है। प्राधिकरण का कहना है कि अधिग्रहित भूमि पर संबंधित व्यक्तियों को बिक्री अथवा हस्तांतरण का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद जमीन को लेकर लेनदेन किए जाने का मामला सामने आने के बाद एडीए ने न्यायालय की शरण ली। प्राधिकरण की ओर से दायर सिविल सूट में ऊषा महाजन, प्रेम सिंह और सुशील कुमार गोयल को पक्षकार बनाया गया है। मुकदमे के जरिए एडीए ने विवादित संपत्ति के संबंध में अपने अधिकार और अधिग्रहण की स्थिति को न्यायालय के समक्ष रखा है।
200 वर्ग गज के प्लॉट पर टिकी निगाहें
विवाद का केंद्र प्लॉट नंबर 5 है, जिसका क्षेत्रफल 200 वर्ग गज है। दस्तावेजों में इसका क्षेत्रफल 167.22 वर्ग मीटर दर्ज है। खसरा नंबर 261 की इसी जमीन को लेकर एडीए ने कानूनी कार्रवाई शुरू की है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह साधारण निजी जमीन का विवाद नहीं, बल्कि अधिग्रहित भूमि के कथित हस्तांतरण से जुड़ा है। अब न्यायालय में दाखिल वाद के बाद संपत्ति के स्वामित्व, अधिग्रहण की स्थिति और कथित बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की कानूनी जांच का रास्ता खुल गया है।
कोर्ट में तय होगा जमीन पर किसका अधिकार
एडीए की कार्रवाई के बाद अब इस विवाद में न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। संबंधित पक्षों की ओर से अपना पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट होगा कि विवादित भूमि किस स्थिति में अधिग्रहित हुई थी और उसके बाद उसके संबंध में किया गया कथित लेनदेन वैधानिक था या नहीं। एडीए के सिविल सूट से मोहम्मदपुर की इस जमीन का विवाद अब सीधे न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है। मामले में आगे होने वाली सुनवाई और अदालत के आदेश से यह स्पष्ट होगा कि विवादित प्लॉट पर वैधानिक अधिकार किसका माना जाएगा।