बरेली की दो अदालतों ने सुनाए कड़े फैसले: दहेज के लिए हत्या में पति को उम्रकैद, नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को 20 साल

-आरके सिंह- बरेली। जिले की अदालतों ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के दो मामलों में कड़ा फैसला सुनाते हुए दोषियों को सख्त सजा दी। दहेज हत्या के मामले में दोषी पति को आजीवन कारावास, जबकि नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाकर बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में युवक को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों मामलों में अदालत ने दोषियों पर कुल 70 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

Sep 11, 2026 - 13:16
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बरेली की दो अदालतों ने सुनाए कड़े फैसले: दहेज के लिए हत्या में पति को उम्रकैद, नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को 20 साल

दहेज हत्या में पति को उम्रकैद

अपर सत्र न्यायाधीश-07 कुलदीप कुमार की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में धीरज सरन रस्तोगी को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 498ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

एडीजीसी राजेश्वरी गंगवार के अनुसार बलरामपुर जिले के उतरौला थाना क्षेत्र निवासी ननकन प्रसाद सोनी ने अपनी पुत्री आरती उर्फ पार्वती की शादी 22 जून 2018 को धीरज सरन रस्तोगी पुत्र राममूरत रस्तोगी निवासी ग्वालियरपुरम, हार्टमैन मंदिर के पास, थाना प्रेमनगर, बरेली के साथ की थी। शादी में छह लाख रुपये दहेज दिया गया था।

आरोप था कि शादी के कुछ समय बाद धीरज ने कार की मांग करते हुए आरती के साथ मारपीट शुरू कर दी। 17 अगस्त 2019 को आरती की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। मामले में थाना प्रेमनगर में धारा 498ए, 304बी, 302 भादंसं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

पुलिस अधीक्षक दक्षिणी अंशिका वर्मा के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाह पेश किए। प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने 10 सितंबर 2026 को धीरज को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

नाबालिग से दुष्कर्म में 20 साल का कठोर कारावास

विशेष पॉक्सो अदालत ने 14 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में सचिन को 20 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

एडीजीसी राजीव तिवारी के अनुसार पीड़िता की मां ने 24 मार्च 2022 को थाना भमोरा में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि गांव का रहने वाला सचिन, उम्र 22 वर्ष, उसकी 14 वर्षीय पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था।

अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह पेश किए गए। विशेष न्यायालय पॉक्सो-03, बरेली के न्यायाधीश जुनैद मुजफ्फर ने सचिन को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2)/6 में दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 363 में चार वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये तथा धारा 366 में पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।

अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत प्रभावी अभियोजन पैरवी का परिणाम है।

SP_Singh AURGURU Editor