भाजपा के मंडल अध्यक्ष हो इसलिए समझौतानामे के 20 हजार ही दे दो, पुलिसकर्मी की बात सुन सन्न हुए नेताजी
आगरा के एकता थाने में भाजपा मंडल अध्यक्ष से पति-पत्नी के विवाद में समझौतानामा शामिल करने के नाम पर 20 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा है। मंडल अध्यक्ष का दावा है कि पुलिसकर्मी ने 50 हजार रुपये की मांग बताकर भाजपा पदाधिकारी होने के कारण 20 हजार में काम करने की बात कही। इसी थाने में वारंट की जानकारी देने के बदले रिश्वत मांगने और पैसे नहीं मिलने पर ताराचंद्र को पकड़ने पहुंचने का भी आरोप है। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया ने डीसीपी सिटी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। इसी बीच विधायक चौधरी बाबूलाल की भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत में नामजद दरोगा आशीष त्यागी को दोबारा सिकंदरा में पोस्टिंग मिलने से पुलिस विभाग की पोस्टिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया मंडल अध्यक्ष को लेकर पहुंचे डीसीपी सिटी के पास, थाना प्रभारी समेत जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
गौरव प्रताप सिंह
आगरा। आगरा कमिश्नरेट में पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधायक चौधरी बाबूलाल द्वारा पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए की गई शिकायत का मामला अभी सुर्खियों में ही था कि अब एकता थाने के पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने और लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। खास बात यह है कि इस बार शिकायत करने वाला व्यक्ति भाजपा का मंडल अध्यक्ष है। आरोप है कि पति-पत्नी के विवाद में समझौतानामा थाने में शामिल करने के एवज में मंडल अध्यक्ष से 20 हजार रुपये की रिश्वत ली गई।
भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय लोधी का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने उनसे साफ कहा कि इस मामले में सामान्य तौर पर 50 हजार रुपये लगते हैं, लेकिन वह भाजपा के मंडल अध्यक्ष हैं और खुद थाने आए हैं, इसलिए 20 हजार रुपये में काम कर दिया जाएगा। मंडल अध्यक्ष के मुताबिक उन्होंने 20 हजार रुपये पुलिसकर्मी को दिलवा दिए।
मामला भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया तक पहुंचा तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। मंडल अध्यक्ष को साथ लेकर वह डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के पास पहुंचे और एकता थाने में कथित भ्रष्टाचार को लेकर नाराजगी जताई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि थाने में भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें मिल रही हैं और इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। उन्होंने जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के साथ थाना प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। डीसीपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है।
पति-पत्नी के विवाद में समझौते के बाद मांगे 20 हजार
भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय लोधी के मुताबिक करीब आठ दिन पहले क्षेत्र में एक पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। पत्नी ने पति के खिलाफ एकता थाने में तहरीर दी थी। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के कुछ सभ्रांत लोगों के साथ मिलकर दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया। समझौतानामे की प्रति थाने में देने और मामले में आगे कार्रवाई नहीं कराने के लिए वह पुलिसकर्मियों से मिले। आरोप है कि इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने उनसे रिश्वत की मांग की। विजय लोधी का कहना है कि पुलिसकर्मी ने कहा कि “इस मामले में वैसे तो 50 हजार रुपये लगते हैं, लेकिन आप मंडल अध्यक्ष हैं, इसलिए 20 हजार रुपये दे दीजिए।” मंडल अध्यक्ष के अनुसार उन्होंने पुलिसकर्मी को 20 हजार रुपये दिलवा दिए। इसके बाद उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया को दी।
वारंट की जानकारी देने के लिए भी रिश्वत मांगने का आरोप
इसी थाने से जुड़ा एक दूसरा मामला भी सामने आया है। अकबरपुर निवासी ताराचंद्र पुत्र साहब सिंह के खिलाफ वर्ष 2010 में बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था। बताया गया है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्होंने जुर्माने की राशि भी जमा कर दी थी, लेकिन एनओसी नहीं ली। आरोप है कि बाद में वारंट जारी होने की जानकारी सामने आने पर एकता थाने में वारंट का काम देखने वाले पुलिसकर्मी ने ताराचंद्र से रिश्वत की मांग की। उनसे कहा गया कि पैसे देने पर उन्हें यह जानकारी दी जाएगी कि उन्हें किस अदालत में और किस तारीख को पेश होना है। ताराचंद्र ने कथित तौर पर रिश्वत देने से इनकार कर दिया और इसकी जानकारी भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय लोधी को दी। मंडल अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने थाना प्रभारी सौरभ सिंह से भी मामले की शिकायत की, लेकिन आरोप है कि तीन दिन तक उन्हें टाल दिया गया और ताराचंद्र को यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस कोर्ट में किस तारीख को जाना है।
पैसे नहीं मिले तो पुलिस पहुंची पकड़ने
बुधवार को पुलिसकर्मी ताराचंद्र को पकड़ने के लिए उसके घर पहुंच गए। पुलिस की कार्रवाई देखकर क्षेत्रीय लोगों ने जब उससे कारण पूछा तो पुलिसकर्मी कथित तौर पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। मामला बढ़ता देख पुलिस को ताराचंद्र को बिना गिरफ्तार किए वापस लौटना पड़ा। दोनों घटनाओं की जानकारी मिलने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पुलिस की इस तरह की कार्यप्रणाली से आम जनता में गलत संदेश जा रहा है और सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है।
‘एकता थाने में भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड टूट रहे’
डीसीपी सिटी से मुलाकात के दौरान जिलाध्यक्ष ने एकता थाने की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि थाने में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि वहां जिम्मेदार लोगों में यह विश्वास पैदा हो गया है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कथित भ्रष्टाचार में शामिल पुलिसकर्मियों के साथ-साथ थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच कराने और कार्रवाई करने की मांग की। डीसीपी सिटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पहले भी रिश्वत की शिकायतें, पैसे लौटे लेकिन मुकदमा नहीं-जिलाध्यक्ष
प्रशांत पौनिया का कहना है कि इससे पहले भी उनके स्तर से पुलिसकर्मियों द्वारा रिश्वत लेने की कई शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी हैं। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में शिकायत के बाद पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर रिश्वत की रकम वापस तो करा दी गई, लेकिन भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। उनका यह भी आरोप है कि ऐसे पुलिसकर्मियों को कुछ समय के लिए साइडलाइन करने के बाद दोबारा महत्वपूर्ण अथवा अच्छी पोस्टिंग दे दी गई। यही वजह है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों के बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
जिलाध्यक्ष सीएम से करेंगे आगरा पुलिस की शिकायत
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया ने कहा है कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर आगरा में पुलिस की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों से उन्हें अवगत कराएंगे। उनका कहना है कि यदि पुलिसकर्मी आम जनता का शोषण करेंगे तो इसका सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ेगा।
विधायक की शिकायत में नाम, फिर भी री-पोस्टिंग
पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच विधायक चौधरी बाबूलाल द्वारा पुलिस कमिश्नर से की गई शिकायत में शामिल पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग भी सवालों के घेरे में आ गई है। विधायक ने जिन छह पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, उनमें रुनकता चौकी प्रभारी आशीष त्यागी का नाम भी शामिल है। आशीष त्यागी को लेकर विभाग में इसलिए चर्चा है क्योंकि वह लंबे समय तक सिकंदरा थाने में तैनात रहे। इसके बाद उन्हें रुनकता चौकी प्रभारी की जिम्मेदारी मिली, लेकिन बाद में सिकंदरा थाने में ही दोबारा पोस्टिंग दिए जाने पर सवाल खड़े हो गए। पुलिस विभाग में नगर और देहात जोन में पुलिसकर्मियों की तैनाती के लिए तीन वर्ष की अवधि निर्धारित किए जाने की बात कही जाती है। आरोप है कि आशीष त्यागी के मामले में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रही और उन्हें लगातार नगर जोन में ही तैनाती मिलती रही।
विधायक चौधरी बाबूलाल की भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत में नाम आने के बाद आशीष त्यागी की पोस्टिंग और विभागीय भूमिका को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हाल ही में उन्हें मेडल मिलने की बात भी सामने आई है। एक तरफ पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच रही हैं, वहीं दूसरी ओर शिकायत में नाम शामिल रहे पुलिसकर्मी को दोबारा उसी क्षेत्र में तैनाती मिलने से पुलिस विभाग की पारदर्शिता और पोस्टिंग नीति पर सवाल उठ रहे हैं। अब एकता थाने के ताजा आरोपों और विधायक की शिकायत में शामिल पुलिसकर्मियों को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर है। खासतौर पर यह देखना अहम होगा कि रिश्वत के आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाती है।