‘ग्रीन गैस’के बिल के नाम 2.98 लाख की साइबर ठगी, लिंक दबाते ही खाली हो गया खाता

आगरा में ग्रीन गैस बिल जमा कराने के नाम पर साइबर ठगी का नया मामला सामने आया है। दयालबाग निवासी गिरीश शर्मा को ठग ने गैस कनेक्शन कटने का डर दिखाकर 130 रुपये का भुगतान करने के लिए लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैंग हो गया और उनके खाते से 98-98 हजार रुपये की तीन ट्रांजेक्शन में कुल 2.98 लाख रुपये निकल गए। पीड़ित ने न्यू आगरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

Sep 11, 2026 - 20:47
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‘ग्रीन गैस’के बिल के नाम 2.98 लाख की साइबर ठगी, लिंक दबाते ही खाली हो गया खाता

साइबर ठगों ने निकाला ठगी का नया तरीका, 130 रुपये का बिल बताकर भेजी एपीके फाइल, मोबाइल हैंग होते ही खाते से तीन बार में उड़ाए 2.98 लाख रुपये

आगरा। साइबर ठग अब बिजली, बैंक और केवाईसी के बाद गैस बिल के नाम पर भी लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। आगरा में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्रीन गैस का बकाया बिल जमा कराने के नाम पर एक बुजुर्ग को कॉल किया गया और महज 130 रुपये जमा कराने का झांसा देकर उनके मोबाइल पर लिंक भेज दिया गया। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैंग हो गया और कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से करीब 2.98 लाख रुपये निकल गए। पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। पुलिस साइबर ठगी के इस मामले की जांच में जुटी है।

कॉल कर कहा- बिल जमा नहीं हुआ, कनेक्शन काट देंगे

दयालबाग निवासी गिरीश शर्मा के मुताबिक, करीब तीन दिन पहले उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि उनके गैस कनेक्शन का बिल जमा नहीं हुआ है। अगर तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा। ठग ने बातचीत के दौरान उन्हें ज्यादा रकम का भुगतान करने के बजाय महज 130 रुपये जमा करने की बात कही। इससे पीड़ित को शक नहीं हुआ। इसके बाद साइबर ठग ने उनके मोबाइल पर एक लिंक भेजा और भुगतान अपडेट करने के लिए उस पर क्लिक करने को कहा।

लिंक दबाते ही हैंग हो गया मोबाइल

गिरीश शर्मा ने जैसे ही भेजे गए लिंक पर क्लिक किया, उनका मोबाइल अचानक हैंग हो गया। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह मामूली सा दिखने वाला लिंक उनके बैंक खाते पर साइबर ठगों को पहुंच दिला चुका है। कुछ देर बाद उनके मोबाइल पर बैंक से लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आने लगे। खाते से 98-98 हजार रुपये की तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन हुईं और कुल 2.98 लाख रुपये खाते से निकल गए। बैंक का मैसेज देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल अपना बैंक खाता चेक किया तो रकम गायब थी। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत न्यू आगरा थाने में दर्ज कराई।

130 रुपये के बहाने खाते पर डाला डाका

साइबर ठगी के इस मामले में ठगों का तरीका खासा शातिराना रहा। पहले गैस कनेक्शन कटने का डर दिखाया गया, फिर महज 130 रुपये का भुगतान बताकर पीड़ित को भरोसे में लिया गया। इसके बाद मोबाइल पर लिंक भेजकर ऐसा जाल बिछाया गया कि लिंक पर क्लिक करते ही कुछ ही समय में खाते से लाखों रुपये साफ हो गए। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में ठग अक्सर लिंक के जरिए APK (Android Package Kit) फाइल या संदिग्ध एप्लीकेशन इंस्टॉल कराने की कोशिश करते हैं। ऐसी फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद साइबर अपराधियों को डिवाइस की गतिविधियों तक पहुंच मिल सकती है और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी खतरे में पड़ सकती है।

70 हजार से ज्यादा PNG उपभोक्ताओं पर साइबर ठगों की नजर

आगरा में ग्रीन गैस लिमिटेड के 70 हजार से अधिक घरेलू PNG उपभोक्ता हैं। बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को देखते हुए साइबर ठग गैस बिल और कनेक्शन से जुड़े मामलों को ठगी का नया हथियार बना रहे हैं। ग्रीन गैस लिमिटेड के विपणन प्रबंधक किशन सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से उपभोक्ताओं को साइबर ठगी से बचाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उपभोक्ताओं को किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई एप्लीकेशन डाउनलोड नहीं करनी चाहिए और न ही संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना चाहिए।

कनेक्शन कटने का डर दिखे तो हो जाएं सावधान

साइबर ठग गैस कनेक्शन बंद होने, बकाया बिल अपडेट करने, रिफंड दिलाने, मीटर संबंधी समस्या दूर करने या भुगतान अपडेट करने के नाम पर उपभोक्ताओं को फोन कर रहे हैं। इसके बाद व्हाट्सएप संदेश या लिंक भेजकर ठगी का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल पर अपनी बैंकिंग डिटेल, ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड की जानकारी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। कंपनी के नाम पर भेजे गए किसी संदिग्ध लिंक या APK फाइल को भी खोलने अथवा इंस्टॉल करने से बचना चाहिए।

एक क्लिक और लाखों साफ

आगरा के इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए बहाने तलाश रहे हैं। पहले 130 रुपये की छोटी रकम का भरोसा दिलाया गया और फिर उसी बहाने पीड़ित के खाते से करीब तीन लाख रुपये उड़ा दिए गए। साइबर ठगी से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है कि किसी अनजान कॉलर के कहने पर कोई लिंक न खोलें, APK फाइल इंस्टॉल न करें और भुगतान या कनेक्शन से जुड़ी जानकारी हमेशा कंपनी के अधिकृत माध्यम से ही सत्यापित करें।