कामनवेल्थ गेम्स में साक्षी ने कर दिया गजब, स्वर्णिम पंच से इंग्लिश खिलाड़ी को किया पस्त, भारतीय सेना में दे रहीं सेवाएं
भारतीय मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने 51 किग्रा वर्ग के एकतरफा फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की रूबी वाइट को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
ग्लास्गो। कॉमनवेल्थ गेम्स की मुक्केबाजी स्पर्धा में भारतीय मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन जारी है। महिलाओं के 51 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में भारत की स्टार बॉक्सर साक्षी चौधरी ने अपने पंचों का लोहा मनवाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। खिताबी मुकाबले में साक्षी ने इंग्लैंड की मुक्केबाज रूबी वाइट को 5-0 के सर्वसम्मति से हराकर पोडियम में टॉप स्थान हासिल किया। मैच के बाद विरोधी इंग्लिश बॉक्सर ने भी भारतीय खिलाड़ी की काबिलियत का सम्मान करते हुए उन्हें गले लगाया।
पूरे मुकाबले के दौरान साक्षी चौधरी बेहद शांत और आक्रामक रणनीति के साथ उतरीं। दूसरे राउंड में रूबी के कॉर्नर से लगातार निर्देश मिल रहे थे और वे वापसी का दबाव बनाने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि, साक्षी ने अपने शानदार बचाव और सटीक काउंटर-अटैक से मेजबान मुक्केबाज को कोई मौका नहीं दिया। तीनों राउंड्स में साक्षी का दबदबा इस कदर हावी रहा कि सभी पांचों जजों ने सर्वसम्मति से भारतीय बॉक्सर के पक्ष में फैसला सुनाया।
हरियाणा के भिवानी (भारतीय मुक्केबाजी का गढ़) से ताल्लुक रखने वाली साक्षी का बचपन से ही झुकाव थोड़ा आक्रामक स्वभाव का था। बचपन में अक्सर झगड़ा करने वाली साक्षी की ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए उनके माता-पिता ने साल 2012 में उन्हें बॉक्सिंग से जोड़ा। विजेंदर सिंह के 2008 बीजिंग ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले ऐतिहासिक प्रदर्शन से प्रेरित होकर साक्षी ने रिंग में कदम रखा। उन्होंने विजेंद्र के द्रोणाचार्य अवार्डी कोच जगदीश सिंह के मार्गदर्शन में अपनी मुक्केबाजी की शुरुआती बारीकियां सीखीं।
24 वर्षीय साक्षी का अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। साल 2015 में ताइपे में हुई एआईबीए जूनियर महिला विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में अमेरिका की यारिसेल रामिरेज को हराकर उन्होंने जूनियर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। इसके अलावा वह दो बार की यूथ वर्ल्ड चैंपियन और अस्ताना में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग कप की गोल्ड मेडल विजेता भी रह चुकी हैं। वर्तमान में पटियाला स्थित एनआईएस राष्ट्रीय कैंप का हिस्सा साक्षी भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स की टीम में जगह बनाना साक्षी के लिए आसान नहीं था। इसके लिए हुए राष्ट्रीय ट्रायल्स में उन्होंने बहुचर्चित और कई बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा जैसी दिग्गजों को परास्त कर अपना टिकट पक्का किया था।