गुरु पूर्णिमा पर दयालबाग भक्ति में सराबोर, सत्संग, कृषि सेवा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा पूरा परिसर
आगरा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को दयालबाग में गुरु-प्रेम, श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अनुपम संगम देखने को मिला। दिनभर सत्संग, कृषि सेवा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शारीरिक व्यायाम और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण साकार हुआ। बड़ी संख्या में सत्संगी भाई-बहनों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा गुरु महाराज और रानी साहिबा जी के पावन दर्शन एवं सान्निध्य प्राप्त कर स्वयं को धन्य और कृतार्थ अनुभव किया।

गुरु महाराज और रानी साहिबा।
सत्संग और सेवा से गूंजा दयालबाग
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दयालबाग की संपूर्ण दिनचर्या गुरु-भक्ति और सेवाभाव से ओत-प्रोत रही। सत्संग, कृषि सेवा, शिक्षा, डेयरी तथा अन्य सामुदायिक गतिविधियों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहभागिता की। दयालबाग की जीवन-पद्धति में इन सभी गतिविधियों को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग माना जाता है और सत्संगी भाई-बहन तथा बच्चे नियमित रूप से इनमें भाग लेते हैं।
प्रेमनगर वैंटेज प्वाइंट पर हुए गुरु महाराज के दर्शन
प्रातःकाल और सायंकाल दोनों समय गुरु महाराज प्रेमनगर वैंटेज प्वाइंट पर पधारे और सिंहासन पर विराजमान हुए। पाठ के दौरान उपस्थित सत्संग संगत श्रद्धा, आनंद और उल्लास से भाव-विभोर हो उठी। गुरु महाराज एवं रानी साहिबा जी के सान्निध्य ने श्रद्धालुओं में भक्ति और कृतज्ञता का भाव और अधिक प्रगाढ़ कर दिया।
खेतों में भी दिखा सेवा और समर्पण का उत्साह
सत्संग के उपरांत गुरु महाराज एवं रानी साहिबा जी कृषि कार्य के लिए खेतों में पहुंचे। उनके आगमन से पूरा वातावरण गुरु-भक्ति और सेवाभाव से सराबोर हो गया। सत्संगी भाई-बहन और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कृषि सेवा में भाग लिया। गुरु महाराज के सान्निध्य ने सेवा कार्य को आध्यात्मिक उत्सव का स्वरूप प्रदान कर दिया।
बच्चों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक और आत्मसुरक्षा कार्यक्रम
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुपरह्यूमन स्कीम के बच्चों ने प्रातःकाल और सायंकाल दोनों समय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गुरु-प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से ओत-प्रोत इन प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। इसके साथ ही बच्चों ने शारीरिक व्यायाम और आत्मसुरक्षा के प्रदर्शन भी किए, जिन्हें उपस्थित संगत ने उत्साहपूर्वक सराहा।
गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
पूरे आयोजन के दौरान गुरु महाराज एवं रानी साहिबा जी की निरंतर दया, मेहर और सान्निध्य सत्संग समुदाय के लिए प्रेरणा, आनंद और कृतज्ञता का केंद्र बना रहा। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन श्रद्धा, सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया-
प्रीति प्रतीति हिये भई भारी।
दास आरती करन बिचारी।।
शब्द विवेक थाल लिया हाथा।
अमी धार धुन जोत जगाता।।