महिला आरक्षण स्वागतयोग्य, लेकिन मुस्लिम महिलाओं का सियासत से दूर रहना ही अच्छा, बरेली मौलाना रजवी का बयान बनेगा नई बहस की वजह

-आरके सिंह- बरेली। देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने को लेकर जहां सकारात्मक माहौल बन रहा है, वहीं मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी के बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना रजवी ने एक ओर महिला आरक्षण को ऐतिहासिक कदम बताया, तो दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं को राजनीति से दूरी बनाए रखने की सलाह देकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

Apr 16, 2026 - 11:47
 0
महिला आरक्षण स्वागतयोग्य, लेकिन मुस्लिम महिलाओं का सियासत से दूर रहना ही अच्छा, बरेली मौलाना रजवी का बयान बनेगा नई बहस की वजह

मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिला आरक्षण संबंधी पहल का स्वागत करते हुए कहा कि आधी आबादी को बराबरी का अवसर देना एक सकारात्मक और सराहनीय कदम है। उनका मानना है कि इससे देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे संसद तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

हालांकि, इसी बयान के साथ उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के सियासत में आने को लेकर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की राजनीति जटिल, चुनौतीपूर्ण और कई स्तरों पर संघर्षपूर्ण हो चुकी है, ऐसे में मुस्लिम महिलाओं को इस्लामी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए राजनीति से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

मौलाना रजवी के अनुसार महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए और सियासत का मौजूदा माहौल इन मूल्यों के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद सभी वर्गों की महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं और नेतृत्व कर सकती हैं, लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए इससे दूर रहना अधिक उपयुक्त रहेगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। एक ओर सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए नीतियां ला रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के बयान समाज में वैचारिक टकराव और बहस को जन्म दे रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा केवल धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकार, समानता और लोकतांत्रिक भागीदारी से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना है।

SP_Singh AURGURU Editor