हरिवंश के फिर से राज्यसभा का उपसभापति चुना जाना लगभग तय, विपक्ष ने नहीं दिया प्रत्याशी, हरिवंश के पक्ष में पांच प्रस्ताव
मनोनीत सदस्य हरिवंश के राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुने जाने की संभावना है क्योंकि उनके पक्ष में पांच प्रस्ताव प्राप्त हुए। वहीं विपक्ष ने अपने उम्मीदवार के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।
नई दिल्ली। राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश के फिर से इस पद पर निर्विरोध चुने जाने की संभावना है क्योंकि उनके पक्ष में पांच प्रस्ताव प्राप्त हुए, वहीं विपक्ष ने अपने उम्मीदवार के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। उपसभापति पद के लिए चुनाव शुक्रवार को सुबह 11 बजे होगा।
हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद राज्यसभा के उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को चुनाव कराने की तारीख तय की है। चुनाव प्रस्तावों के नोटिस देने की अंतिम तिथि और समय गुरुवार को दोपहर 12 बजे था। सूत्रों के अनुसार, हरिवंश के पक्ष में पांच प्रस्ताव प्राप्त हुए जबकि विपक्ष की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला।
विपक्ष ने मोदी सरकार द्वारा सात वर्षों से लोकसभा में उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं करने के विरोध में चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। सदन के नेता जेपी नड्डा ने पहला प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन एस फांग्नोन कोन्यक ने किया। दूसरा प्रस्ताव भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पेश किया और भाजपा सांसद बृजलाल ने इसका समर्थन किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक प्रस्ताव पेश किया, जिसका भाजपा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर और जद (यू) सांसद संजय कुमार झा ने समर्थन किया। एक अन्य प्रस्ताव रालोद सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने पेश किया, जिसका शिवसेना सांसद मिलिंद देवरा ने समर्थन किया।
सूत्रों ने बताया कि निर्धारित समय तक विपक्ष की ओर से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उपसभापति पद के लिए चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है। पूरी संभावना है कि नड्डा द्वारा प्रस्तुत और कोन्यक के समर्थन वाले पहले प्रस्ताव को सदन ध्वनि मत से पारित कर दे। सभापति राधाकृष्णन उपसभापति पद के लिए हरिवंश के निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा करेंगे।
इसके बाद सदन के नेता और विपक्ष के नेता स्थापित परंपरा के अनुसार उन्हें आसन तक ले जाएंगे। हरिवंश दो बार सदन के उपसभापति रह चुके हैं और यदि निर्वाचित होते हैं, तो यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने इस मामले पर कोई सार्थक परामर्श भी नहीं किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि "हरिवंश 3.0" विपक्ष के सुझावों के प्रति अधिक संवेदनशील होगा।