जिद पर अड़ीं ममता, बोलीं- मुझे बर्खास्त करो,  नए विधायकों से कहा- काले कपड़े पहनो

ममता बनर्जी ने टीएमसी के नव निर्वाचित विधायकों के साथ बैठक में एक बार फिर कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने धोखा देने वाले नेता को पार्टी से निकालने की बात कही है।

May 6, 2026 - 20:05
May 6, 2026 - 21:46
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जिद पर अड़ीं ममता, बोलीं- मुझे बर्खास्त करो,  नए विधायकों से कहा- काले कपड़े पहनो

कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों पर ऐतराज जताते हुए टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने एक बार फिर कहा कि उनके जो उम्मीदवार हारे हैं, उन्हें साजिश के तहत जबरदस्ती हराया गया है। उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल पुलिस, सीआरपीएफ और मुख्य चुनाव अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के 1500 से ज्यादा कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया।

एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी ने टीएमसी के नव निर्वाचित विधायकों के साथ बैठक में कहा, 'बंगाल के बाद अब इंडिया गठबंधन की टीम एकजुट है। मैं इस्तीफा नहीं दूंगी. चाहे वे मुझे बर्खास्त कर दें। मैं चाहती हूं कि यह काला दिन हो। हमें मजबूत रहना होगा। विधानसभा के पहले दिन टीएमसी के सभी विधायक काले कपड़े पहनें, जिन्होंने धोखा दिया है, उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा। मैं हंस रही हूं। मैंने उन्हें नैतिक रूप से हराया है। मैं एक आजाद पंछी हूं। मैंने सबके लिए काम किया है। हम भले ही हार गए हों, लेकिन हम लड़ेंगे।'

टीएमसी प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने कहा, 'हिंसा को रोकना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। बीजेपी ने जो कहा था और जो जमीन पर हो रहा है, वो बिल्कुल इसके उलट है। जो हिंसा हो रही है, वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। ममता बनर्जी का इस्तीफा ना देना, उनका एक सिंबॉलिक प्रोटेस्ट है। विपक्ष का नेता कौन होगा या विधानसभा में हमारी पार्टी कैसे जाएगी, इन सब बातों पर निर्णय लेने के लिए हमसे दीदी ने कहा है। वो जैसा बताएंगी हम वैसा करेंगे। विधानसभा में किस विधायक की क्या जिम्मेदारी है, ये बताने के लिए हमने उनसे आग्रह किया है।'

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए जनादेश पर सवाल उठाए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बुधवार (6 मई 2026) को स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की भूमिका केवल चुनाव कराने और परिणाम अधिसूचित करने तक सीमित है। इसके आगे की प्रक्रिया पूरी तरह संविधान के तहत होती है।