मथुरा में जिंदगी की जंग जीत रहे ‘आसमान के प्रहरी’, घायल सारस और गर्मी से बेहाल फ्लेमिंगो को मिला नया जीवन, वन विभाग, सेना और वाइल्डलाइफ एसओएस की सतर्कता से बची दो दुर्लभ पक्षियों की जान

मथुरा। भीषण गर्मी और मानवीय गतिविधियों के बढ़ते खतरे के बीच मथुरा में दो दुर्लभ और महत्वपूर्ण पक्षियों की जिंदगी बचाने का सराहनीय अभियान सामने आया है। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त कार्रवाई में एक गंभीर रूप से घायल सारस क्रेन और गर्मी व निर्जलीकरण से पीड़ित एक फ्लेमिंगो (राजहंस) को अलग-अलग स्थानों से सुरक्षित रेस्क्यू कर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। दोनों पक्षियों का फिलहाल वाइल्डलाइफ एसओएस की ट्रांजिट फैसिलिटी में गहन उपचार चल रहा है।

May 8, 2026 - 13:16
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मथुरा में जिंदगी की जंग जीत रहे ‘आसमान के प्रहरी’, घायल सारस और गर्मी से बेहाल फ्लेमिंगो को मिला नया जीवन, वन विभाग, सेना और वाइल्डलाइफ एसओएस की सतर्कता से बची दो दुर्लभ पक्षियों की जान
वाइल्डलाइफ एसओएस के ट्रांजिट फैसिलिटी में पक्षी का उपचार करते पक्षी।

दूसरे पक्षी का इलाज करते विशेषज्ञ।

जानकारी के अनुसार मथुरा के लक्ष्मी नगर क्षेत्र स्थित एक खेत में किसानों ने एक सारस क्रेन को घायल अवस्था में देखा। पक्षी की हालत गंभीर थी, जिसके बाद किसानों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग की सूचना पर वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट मौके पर पहुंची और सारस को सुरक्षित रेस्क्यू किया। जांच में सामने आया कि सारस का दाहिना पंख तार की फेंसिंग में फंस गया था, जिससे उसके पंख की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई।

फिलहाल उसके घाव भर चुके हैं, लेकिन पंख को हुए भारी नुकसान के कारण इलाज अभी जारी है। विशेषज्ञ लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं और उचित समय आने पर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ने की संभावना पर निर्णय लिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर मथुरा के छावनी क्षेत्र में एक फ्लेमिंगो उड़ने में असमर्थ हालत में मिला। सेना के जवानों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पक्षी को तुरंत वन विभाग कार्यालय पहुंचाया, जहां प्रारंभिक उपचार के बाद उसे वाइल्डलाइफ एसओएस अस्पताल भेज दिया गया। चिकित्सकीय जांच में फ्लेमिंगो के शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन वह अत्यधिक तापमान, लू और गंभीर निर्जलीकरण से पीड़ित पाया गया। पक्षी को लगातार पानी, पोषण और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेमिंगो अभी छोटा है, इसलिए उसे विशेष देखभाल और निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक सारस क्रेन (एंटीगोन एंटीगोन) विश्व का सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी माना जाता है और इसे आईयूसीएन रेड लिस्ट में संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया है। इसके अलावा यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है। वहीं ग्रेटर फ्लेमिंगो (फोएनिकोप्टेरस रोजियस) वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और भारत की जैव विविधता की अमूल्य धरोहर माना जाता है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने उत्तर प्रदेश वन विभाग, किसानों और सेना कर्मियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता के कारण ही इन पक्षियों की जान बचाना संभव हो पाया।

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजू राज एम.वी. ने कहा कि इस तरह के रेस्क्यू अभियान यह साबित करते हैं कि यदि किसान, सेना और आम नागरिक समय रहते जिम्मेदारी निभाएं तो वन्यजीवों की रक्षा संभव है। लोगों की जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया कई दुर्लभ जीवों के लिए जीवनदान साबित हो सकती है।

SP_Singh AURGURU Editor