अद्रमुक में फूट, 30 विधायक विजय के समर्थन में, फ्लोर टेस्ट से पहले तमिलनाडु में सियासी बवाल

अद्रमुक विधायक षणमुगम ने कहा है कि वह विजय को समर्थन पत्र सौंपेंगे। इनमें टीवीके सरकार को समर्थन दिया जाएगा। हमने इस पार्टी की स्थापना डीएमके के विरोध में की थी।

May 12, 2026 - 20:13
May 12, 2026 - 23:20
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अद्रमुक में फूट, 30 विधायक विजय के समर्थन में, फ्लोर टेस्ट से पहले तमिलनाडु में सियासी बवाल

चेन्नई। तमिलनाडु में अभी सियासी संग्राम थमा नहीं है। अम्मा की पार्टी में फिर से फूट पड़ गई है। फ्लोर टेस्ट के दौरान अद्रमुक  बनाम अद्रमुक के बीच तनातनी देखने को मिल सकती है। विजय एक तरफ फ्लोर टेस्ट की तैयारी कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ वह अद्रमुक के उन बागी नेताओं से घर जाकर मिल रहे हैं, जो उन्हें समर्थन दे चुके हैं। यह मुलाकात उस वक्त हुई, जब कुछ घंटों पहले उन्होंने टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की। इनमें विधायक एसपी वेलुमणि और षणमुगम की अगुवाई में 30 विधायक हैं, जो पार्टी में पलानीस्वामी के नेतृत्व का विरोध कर रहे हैं। 

षणमुगम ने कहा है कि वह विजय को समर्थन पत्र सौंपेंगे। इनमें टीवीके सरकार को समर्थन दिया जाएगा। हमने इस पार्टी की स्थापना डीएमके के विरोध में की थी। पिछले 53 सालों से हमारी राजनीति डीएमके विरोध पर केंद्रित रही है। एक प्रस्ताव दिया गया था कि डीएमके के समर्थन से अद्रमुक की सरकार बनाई जाए, लेकिन हमारे ज्यादातर सदस्यों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इधर, अद्रमुक के नेता एग्री एस.एस. कृष्णमूर्ति ने बागी विधायकों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ काम करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कृष्णमूर्ति ने कहा कि अद्रमुक ने सभी विधायकों को निर्देश जारी किया है। इसमें तमिलनाडु विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट में टीवीके के खिलाफ वोट करने की अपील की गई है। साथ ही कहा है कि जो विधायक पार्टी निर्देशों के खिलाफ काम करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इधर पलानीस्वामी के करीबी ओ.एस.मनियन ने इस मामले में बताया कि अद्रमुक के सभी 47 विधायकों ने विधायक दल के नेता के तौर एडप्पादी के. पलानीस्वामी को अपना समर्थन दिया है। इन विधायकों का समर्थन पत्र स्पीकर जे.सी. डी. प्रभाकर को सौंप दिया गया है।

वेलुमणि ने जोर देकर कहा है कि इस कदम का मतलब पार्टी में फूट पड़ना नहीं है। पलानीस्वामी डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने के लिए इच्छुक थे। हमने उस फैसले का विरोध किया। अद्रमुक का गठन ही डीएमके को हराने के लिए किया गया था। अंदरुनी मतभेद तब सामने आए, जब षणमुगम के नेतृत्व में अद्रमुक विधायकों के एक समूह ने प्रोटेम स्पीकर एम.वी. करुपैया को लेटर सौंपकर वेलुमणि को विधायक दल का नेता नियुक्त करने की मांग की। विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के चलते पलानीस्वामी को हटाने की मांग उठ चुकी है।