योगी कैबिनेट विस्तार, 6 नए मंत्रियों ने ली शपथ, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश

योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार में भूपेंद्र सिंह चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री पद मिला। अजित पाल और सोमेन्द्र तोमर को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया। शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संपन्न कराया। यह विस्तार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ 2027 चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

May 10, 2026 - 15:58
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योगी कैबिनेट विस्तार, 6 नए मंत्रियों ने ली शपथ, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश
जनभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल नए मंत्रियों को शपथ दिलातीं हुईं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में रविवार को हुए बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार में कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जनभवन में आयोजित समारोह में सभी नेताओं को मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस विस्तार में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी और पूर्व समाजवादी पार्टी नेता मनोज पाण्डेयय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वहीं कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान, सुरेन्द्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके अलावा अजीत पाल और सोमन्द्र तोमर को राज्य मंत्री से पदोन्नत कर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया।

शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पकंज चौधरी तथा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना दिया।

मंत्रियों का राजनीतिक सफर और जीवन परिचय

भूपेंद्र सिंह चौधरी का संगठन से सत्ता तक का लंबा सफर है। चौधरी का जन्म 30 जून 1966 को हुआ। उन्होंने आरएन इंटर कॉलेज से 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की। राम मंदिर आंदोलन से राजनीति में सक्रिय हुए भूपेंद्र चौधरी ने भाजपा संगठन में जमीनी स्तर से काम शुरू किया। वर्ष 1995 में वे मुरादाबाद भाजपा के जिला मंत्री बने और 1996 में जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। 1999 में उन्होंने संभल लोकसभा सीट से मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा, हालांकि जीत नहीं सके। इसके बाद संगठन में लगातार सक्रिय रहते हुए पश्चिम यूपी के क्षेत्रीय मंत्री और फिर क्षेत्रीय अध्यक्ष बने। 2016 में पहली बार भाजपा कोटे से विधान परिषद सदस्य बने। योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पंचायती राज मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए और बाद में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। 2022 में दोबारा एमएलसी बनने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। अब एक बार फिर उन्हें कैबिनेट में अहम जिम्मेदारी मिली है।

मनोज पांडेय: सपा से भाजपा सरकार तक का सफर

मनोज पांडेय का जन्म 15 अप्रैल 1968 को हुआ। उन्होंने कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की। रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय लंबे समय तक समाजवादी पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे। वर्ष 2012 में पहली बार विधायक बने और सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 2022 में तीसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें विधानसभा में सपा का मुख्य सचेतक बनाया गया। हालांकि 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद उन्होंने चीफ व्हिप पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में उन्हें सपा से निष्कासित कर दिया गया। अब भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाकर पार्टी ने रायबरेली और पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

कृष्णा पासवान: लगातार चौथी बार विधायक बनीं

कृष्णा पासवान का जन्म 1 अगस्त 1963 को हुआ। वे 12वीं पास हैं और फतेहपुर की खागा सीट से विधायक हैं। उन्होंने 2007 में भाजपा टिकट पर किशुनपुर सीट से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। परिसीमन के बाद खागा सीट से राजनीति शुरू की और 2012, 2017 तथा 2022 में लगातार जीत दर्ज की। दलित महिला चेहरे के रूप में भाजपा ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।

हंसराज विश्वकर्मा: राम मंदिर आंदोलन से मंत्री पद तक

हंसराज विश्वकर्मा का जन्म 31 जुलाई 1972 को हुआ। उन्होंने काशी विद्यापीठ से स्नातक किया। वे राम मंदिर आंदोलन से सक्रिय राजनीति में आए और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबी माने जाते रहे। 2002 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए।
2004 में भाजपा में वापसी के बाद संगठन में लगातार सक्रिय रहे। वे तीन बार वाराणसी भाजपा जिलाध्यक्ष रहे। 2023 में राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के लिए मनोनीत किए गए। अब उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने कारीगर और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

सुरेंद्र दिलेर: पिता की विरासत से मंत्री पद तक

सुरेंद्र दिलेर का जन्म 15 मार्च 1967 को हुआ। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। वे दिवंगत सांसद राजवीर सिंह दिलेर के पुत्र हैं और लंबे समय तक संगठन एवं चुनावी प्रबंधन में सक्रिय रहे। 2024 में पिता के निधन के बाद भाजपा ने उन्हें खैर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत हासिल की। मंत्री बनाकर भाजपा ने जाटव समाज और पश्चिम यूपी में अपना राजनीतिक संतुलन मजबूत करने का संकेत दिया है।

कैलाश सिंह राजपूत: कई दलों का अनुभव, भाजपा में मजबूत वापसी

कैलाश सिंह राजपूत का जन्म 1 अगस्त 1956 को हुआ। उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की है।
1996 में भाजपा से पहली बार तिर्वा सीट से विधायक बने। बाद में 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर चर्चा में आए। इसके बाद भाजपा में वापसी कर 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की। लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

राजनीतिक संदेश क्या?

योगी सरकार के इस कैबिनेट विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मंत्रिमंडल में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश स्पष्ट दिखाई दी। भाजपा ने पश्चिम यूपी, बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करने का संकेत दिया है। साथ ही मनोज पांडेय को शामिल कर विपक्षी दलों को भी राजनीतिक संदेश दिया गया है।