मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ईरान पर अमेरिकी बमबारी, क़ेश्म द्वीप को बनाया निशाना; ट्रंप प्रशासन के कदम से बढ़ा युद्ध का खतरा

वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के मतदान से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार, (2 नवंबर को) अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क़ेश्म द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे सीमित और रक्षात्मक बताया है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने द्वीप पर कई विस्फोटों की खबर दी है। चुनाव से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

Nov 3, 2026 - 20:15
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मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ईरान पर अमेरिकी बमबारी, क़ेश्म द्वीप को बनाया निशाना; ट्रंप प्रशासन के कदम से बढ़ा युद्ध का खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब है क़ेश्म द्वीप

क़ेश्म ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिहाज से इसकी अहमियत इतनी अधिक है कि दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है।

इस क्षेत्र पर नियंत्रण और यहां सैन्य मौजूदगी ईरान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से अमेरिकी सैन्य विमानों और अन्य संसाधनों को खतरा पैदा हो सकता था। इसी क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से हमले किए गए।

इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क़ेश्म द्वीप के दक्षिण में दो अमेरिकी सैन्य ड्रोन मार गिराने का दावा किया था। सोमवार देर रात द्वीप पर कई विस्फोट हुए। हेंगम द्वीप और बंदर अब्बास के आसपास भी विस्फोटों की खबरें आईं। हालांकि, इस कार्रवाई में सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान और हताहतों की संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अमेरिका का दावा- व्यापक युद्ध शुरू करना मकसद नहीं

अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई को सीमित बताते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य ईरान के साथ व्यापक युद्ध शुरू करना नहीं, बल्कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

हालांकि, इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। अमेरिकी मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान ईरान के खिलाफ कुछ सीमित सैन्य कार्रवाइयां की गई थीं, जिनका सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया।

मिडटर्म चुनाव के बीच ट्रंप की सैन्य रणनीति पर सवाल

अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट के नियंत्रण का फैसला होना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

ईरान के साथ संघर्ष, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें अमेरिकी मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। ट्रंप पहले चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ नए हमले नहीं करने की बात कह चुके थे। ऐसे में मतदान से ठीक पहले सैन्य कार्रवाई ने उनकी रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, इस हमले को चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश बताने के लिए फिलहाल कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। लेकिन इसका समय अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय जरूर बन गया है।

ट्रंप का दावा- समझौता करना चाहता है ईरान

सैन्य कार्रवाई के बीच ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत की संभावनाओं को भी खारिज नहीं किया है। सोमवार को लिंकन मेमोरियल के सामने आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका संघर्ष में जीत रहा है और ईरान समझौता करना चाहता है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत के जरिए समझौते की संभावनाओं पर सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति हुई है।

कतर के माध्यम से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चलने की खबरें हैं। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले रोकने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभी किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी है।

नेतन्याहू भी चाहते हैं ईरान पर नए हमले

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उन्होंने ट्रंप के साथ हालिया बातचीत में ईरान पर नए हमलों की जरूरत का मुद्दा उठाया था।

दूसरी ओर, मध्य पूर्व के कई देशों को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक सैन्य संघर्ष शुरू होने पर पूरा क्षेत्र इसकी चपेट में आ सकता है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और इराक में सक्रिय सशस्त्र संगठनों की संभावित भागीदारी भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती है।

ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान ने तनाव कम करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही उसने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और युद्धविराम जैसी शर्तें भी रखी हैं।

ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की ओर से नया सैन्य हमला होने पर ईरान जवाब देने के लिए तैयार है।

SP_Singh AURGURU Editor