पुरानी पेंशन और फीडर कैडर की बहाली को लेकर शिक्षकों का आक्रोश, आगरा कॉलेज में काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन
आगरा। आगरा कॉलेज के शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, फीडर कैडर व्यवस्था दोबारा लागू करने और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय-महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के आह्वान पर शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और प्रदेशव्यापी आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकजुटता दिखाई।
शिक्षकों ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपने शिक्षण एवं अन्य दायित्वों का निर्वहन किया। दोपहर 12 बजे कॉलेज परिसर स्थित गंगाधर शास्त्री उद्यान में एकत्रित होकर उन्होंने जोरदार नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
पूर्व औटा उपाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय पाल सिंह ने कहा कि शिक्षकों के हितों की रक्षा और पदोन्नति के अवसर सुनिश्चित करने के लिए पूर्व में लागू फीडर कैडर व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाना चाहिए।
स्टाफ क्लब के पूर्व सचिव प्रो. विक्रम सिंह ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करना आवश्यक है।
डॉ. सतीश निगम ने आगरा कॉलेज सहित प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी लंबित मांगों का समाधान किया जाना चाहिए। शिक्षकों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
स्टाफ क्लब के सचिव डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने कहा कि आगरा कॉलेज के शिक्षक प्रदेश के शिक्षकों की मांगों के समर्थन में एकजुट हैं और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे।
प्रो. गौरव कौशिक ने कहा कि शिक्षकों की लंबित मांगों का सम्मानजनक समाधान शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक समुदाय दोनों के हित में है। इसके लिए सभी शिक्षकों की एकजुटता और सक्रिय सहभागिता जरूरी है।
प्रदर्शन की अगुवाई फुपुक्टा के जोनल सचिव प्रो. शिवकुमार सिंह ने की। उन्होंने प्रदेश के शिक्षकों से आगामी 17, 18 एवं 19 नवंबर को लखनऊ में बड़ी संख्या में पहुंचकर आंदोलन और प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील की।
प्रदर्शन में स्टाफ क्लब सचिव डॉ. आनंद प्रताप सिंह, पूर्व सचिव प्रो. विजय कुमार सिंह, प्रो. भूपेंद्र कुमार चिकारा, प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. गौरव कौशिक, प्रो. शिवकुमार सिंह, प्रो. के. पी. तिवारी, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. स्मिता चतुर्वेदी, डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. राविंद्र प्रताप सिंह, डॉ. अविनाश जैन, प्रो. ए.के. सिंह, डॉ. अचिंत वर्मा, डॉ. अनूप सिंह, प्रो. श्याम गोविंद सिंह, प्रो. प्रभात यादव, डॉ. खुशबू यादव, डॉ. सीमा सिंह, प्रो. संध्या मान, डॉ. माधुरी यादव, डॉ. जावेद, प्रो. अवधेश जौहरी, डॉ. चेतन गौतम, प्रो. भूपेंद्र सिंह, डॉ. सपना तोमर, डॉ. अल्पना ओझा, डॉ. सत्यदेव शर्मा, प्रो. अमित चौधरी, डॉ. शैलेंद्र कुमार, डॉ. धर्मवीर सिंह यादव एवं प्रो. चंद्रवीर सिंह सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में संघर्ष जारी रखने और नवंबर में लखनऊ में प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प व्यक्त किया।