ब्रजरज उत्सव की रौनक अब पांच नवंबर तक, दुकानदारों-शिल्पकारों की मांग पर तीन दिन बढ़ी अवधि; बैक स्टेज सिवलिंग्स की प्रस्तुति ने बांधा समां
मथुरा। ब्रजरज उत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सोमवार को बैक स्टेज सिवलिंग्स के प्राची और राघव की सुरीली आवाज ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत, कलात्मक अभिव्यक्ति और मंचीय प्रस्तुति के संगम ने समां बांध दिया। दूसरी ओर, धनतेरस और दीपावली पर खरीदारी की संभावनाओं को देखते हुए दुकानदारों एवं शिल्पकारों की मांग पर उत्सव की अवधि तीन दिन बढ़ा दी गई है। अब धौली प्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड में प्रदर्शनी, फूड कोर्ट और हस्तशिल्प सहित विभिन्न उत्पादों के स्टॉल 5 नवंबर तक संचालित होंगे।
परिषद के डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र ने बताया कि 23 अक्टूबर से आयोजित ब्रजरज उत्सव में दुकानदारों और शिल्पकारों ने धनतेरस एवं दीपावली के मद्देनजर मेले की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था। उनकी मांग और स्थानीय उत्पादों व हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना शामिल है।
उन्होंने बताया कि उत्सव के बाजार में करीब 150 दुकानें लगाई गई हैं। इनमें देश के विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, खानपान और स्थानीय उत्पादों की विविधता देखने को मिल रही है। हिमाचल, कश्मीर, त्रिपुरा, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक सहित कई राज्यों के कारीगरों एवं उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश की एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत तैयार वस्तुओं के साथ स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
ब्रजरज उत्सव के बाजार में सरकार की 'लोकल फॉर वोकल' और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल को भी जगह मिली है। यहां स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिल रहा है। दीपावली के अवसर पर हस्तनिर्मित वस्तुओं, पारंपरिक उत्पादों और स्वदेशी सामान की खरीदारी के लिए लोगों को एक ही परिसर में अनेक विकल्प उपलब्ध हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ब्रज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ लोककलाओं, संगीत और साहित्य को मंच दिया गया। स्थानीय लोक कलाकारों और स्ट्रीट परफॉर्मर्स ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सोमवार को बैक स्टेज सिवलिंग्स के प्राची और राघव की प्रस्तुति ने विशेष प्रभाव छोड़ा। उनकी आवाज और मंचीय अंदाज पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
उत्सव में गोकुल गांव की थीम, सेल्फी प्वाइंट, झूले, खादी के आधुनिक परिधान, सांझी कला और चित्रांकन भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बाजार और सांस्कृतिक गतिविधियों के इस संगम के चलते ब्रजरज उत्सव अब 5 नवंबर तक लोगों के लिए खुला रहेगा।