शादी के 15 साल बाद घर में गूंजी थी किलकारी, टीकाकरण के बाद बुझ गया इकलौता चिराग; परिजनों ने एएनएम पर लगाए गंभीर आरोप, आगरा के पिनाहट कस्बे का मामला
नीरज परिहार- पिनाहट (आगरा)। पिनाहट कस्बे में टीकाकरण के बाद दो माह के मासूम बच्चे की तबीयत बिगड़ने और उपचार के दौरान मौत हो जाने से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने एएनएम पर जबरन टीका लगाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टीकाकरण के बाद बच्चे की हालत अचानक खराब हो गई। अस्पताल में उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। घटना से आक्रोशित परिजन मृत बच्चे को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पिनाहट पहुंच गए और वहां हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को शांत कराया।
मामला पिनाहट थाना क्षेत्र के कस्बे के मोहल्ला पूरनपुरा का है। यहां रहने वाले रनवीर के घर शादी के करीब 15 वर्ष बाद बच्चे का जन्म हुआ था। लंबे इंतजार के बाद परिवार में आई इस खुशी से घर में उत्सव जैसा माहौल था। दो माह का मासूम पूरे परिवार की खुशियों का केंद्र बना हुआ था। लेकिन टीकाकरण के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने और फिर मौत हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिजनों का आरोप है कि एएनएम ने बच्चे को जबरन टीका लगाया था। इसके बाद उसकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। बच्चे की हालत बिगड़ती देखकर परिवार के लोग उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उसका इलाज किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उपचार के दौरान मासूम की मौत हो गई।
बच्चे की मौत के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। वे मृत बच्चे को लेकर सीएचसी पिनाहट पहुंच गए और टीकाकरण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उनका कहना था कि टीका लगाए जाने के बाद ही बच्चे की हालत बिगड़ी, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को समझाकर शांत कराया और मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। मृत बच्चे के पिता रनवीर ने पुलिस को तहरीर दी है। इसके आधार पर पुलिस ने बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह जांच का विषय है कि बच्चे की मौत का कारण क्या रहा और टीकाकरण की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी मामले की जांच किए जाने की आवश्यकता है।